इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूलों में हिजाब पहनने की अनुमति देने से इनकार करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के लिए स्कूल की यूनिफॉर्म के नियमों का पालन करना जरूरी है. कोर्ट के मुताबिक, यूनिफॉर्म से बच्चों में समानता की भावना बनी रहती है और स्कूल की पहचान भी कायम रहती है.
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हाईकोर्ट के इस फैसले पर मौलाना यासूब अब्बास ने पुनर्विचार की अपील की है. उन्होंने कहा कि भारत में सभी धर्मों को अपनी धार्मिक आजादी हासिल है. ऐसे में हिजाब को लेकर आए इस फैसले पर अदालत को दोबारा विचार करना चाहिए.
मौलाना यासूब अब्बास ने कहा, “जिस तरीके से हिजाब को लेकर हाईकोर्ट का फैसला आया है, मैं माननीय न्यायालय से इस फैसले पर पुनर्विचार की अपील करता हूं.” उन्होंने कहा कि भारत में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, यहूदी और पारसी समेत अलग-अलग धर्मों के लोग रहते हैं और सभी को धार्मिक स्वतंत्रता हासिल है.
उन्होंने कहा कि एक छोटी बच्ची के हिजाब पहनने पर इस तरह का फैसला आना उनके लिए चिंता की बात है. मौलाना ने कहा कि हाईकोर्ट को इस मामले पर फिर से विचार करना चाहिए.
‘स्कूल-कॉलेज में हिजाब पहनने पर रोक नहीं लगाई जा सकती’
मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि अगर कोई बच्ची हिजाब पहनकर स्कूल, कॉलेज या यूनिवर्सिटी जाती है तो उसके हिजाब पहनने पर रोक नहीं लगाई जानी चाहिए.
उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला देते हुए कहा कि अगर संविधान में धार्मिक आजादी का अधिकार है तो उसके बाद इस तरह के फैसलों पर भी विचार किया जाना चाहिए. मौलाना ने अदालतों में ऐसे छोटे-छोटे मामलों को ले जाने से भी बचने की अपील की.
‘हिजाब पहनना है तो खुलेआम पहनिए’
मौलाना यासूब अब्बास ने मुस्लिम महिलाओं और बच्चियों से कहा कि अगर वे हिजाब पहनना चाहती हैं तो खुले तौर पर पहनें. उन्होंने कहा कि एक मुस्लिम होने के नाते इस्लाम में हिजाब को लेकर अधिकार दिए गए हैं.
मौलाना ने एक बार फिर हाईकोर्ट से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की. उनका कहना है कि हिजाब का मामला धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा है और इसे केवल स्कूल की यूनिफॉर्म के नियमों तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए.
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