स्कूल में हिजाब पहनने की मांग पर इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला, 11वीं की स्टूडेंट ने मांगी थी परमिशन, अब आया ये जजमेंट

आनंद राज

25 Aug 2026 (अपडेटेड: 25 Aug 2026, 12:16 PM)

प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल की 11वीं कक्षा की एक मुस्लिम छात्रा को स्कूल ड्रेस के साथ हिजाब पहनने की अनुमति नहीं मिली है. बता दें छात्रा ने इसके लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने याचिका खारिज कर दी.

Allahabad High Court Hijab Case

Allahabad High Court Hijab Case (Photo: AI Generated)

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Allahabad High Court Hijab Case: प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल की 11वीं कक्षा की एक मुस्लिम छात्रा को स्कूल ड्रेस के साथ हिजाब पहनने की अनुमति नहीं मिली है. बता दें छात्रा ने इसके लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने याचिका खारिज कर दी. अदालत ने कहा कि हिजाब पहनना इस्लाम का अनिवार्य धार्मिक हिस्सा साबित नहीं होता. साथ ही कोर्ट ने कहा कि स्कूल को अपनी निर्धारित ड्रेस लागू करने का अधिकार है, अगर नियम सभी छात्रों के लिए समान रूप से लागू होता है.

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11वीं की छात्रा ने कोर्ट से मांगी थी अनुमति

यह मामला प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल का है. स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली मुस्लिम छात्रा ने अपनी याचिका में स्कूल की तय ड्रेस के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगी थी. छात्रा की ओर से दलील दी गई कि वह क्लास 6 से 10 तक हिजाब पहनकर स्कूल आती रही है और उस दौरान स्कूल की ओर से इसका विरोध नहीं किया गया. छात्रा ने इसी आधार पर आगे भी हिजाब पहनने की अनुमति दिए जाने की मांग की थी.

हाईकोर्ट ने धार्मिक प्रथा को लेकर क्या कहा?

इस याचिका पर न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने सुनवाई की. अदालत ने कहा कि ऐसा कोई धार्मिक या कानूनी साक्ष्य सामने नहीं रखा गया, जिससे यह साबित हो कि हिजाब पहनना इस्लाम में अनिवार्य धार्मिक प्रथा है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल किसी धार्मिक प्रथा का दावा करने के आधार पर धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के तहत राहत नहीं दी जा सकती. इसी आधार पर छात्रा की मांग को स्वीकार नहीं किया गया.

पुराने नियम में मिली छूट से नहीं बनता अधिकार

छात्रा की ओर से यह भी बताया गया कि वह कई सालों से स्कूल में हिजाब पहनकर आती रही है. इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि किसी संस्थान की ओर से पहले दी गई सहमति या छूट अपने आप में स्थायी कानूनी अधिकार नहीं बन जाती. कोर्ट के मुताबिक केवल इसलिए कि कक्षा 6 से 10 तक छात्रा को हिजाब पहनने की अनुमति मिली, वह आगे भी उसी व्यवस्था को जारी रखने का अधिकार नहीं मांग सकती.

ड्रेसकोड लागू करने का स्कूल को अधिकार

कोर्ट ने स्कूल के ड्रेस कोड और अनुशासन को लेकर भी टिप्पणी की. पीठ ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में एकरूपता और अनुशासन बनाए रखने के लिए ड्रेसकोड लागू किया जाता है. यदि स्कूल की ड्रेस नीति सभी छात्रों पर समान रूप से लागू होती है और किसी विशेष छात्र के साथ भेदभाव नहीं करती, तो व्यक्तिगत पसंद के आधार पर उसमें बदलाव की मांग नहीं की ुजा सकती. अदालत ने माना कि स्कूल अपनी पहचान और अनुशासन बनाए रखने के लिए निर्धारित ड्रेस कोड लागू कर सकता है.

कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में पिछले न्यायिक आदेशों का भी उल्लेख किया. पीठ ने कहा कि विभिन्न हाईकोर्ट के फैसलों में यह माना गया है कि महिलाओं के लिए हिजाब पहनना इस्लामी आस्था का अनिवार्य हिस्सा नहीं है. अदालत ने कर्नाटक हाईकोर्ट के पिछले फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उससे अलग राय अपनाने का कोई कारण नहीं है. सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्रा की याचिका खारिज कर दी और स्कूल प्रबंधन को अपना निर्धारित ड्रेसकोड लागू करने की अनुमति दी.