कौशांबी पुलिस में 'सिंह पोस्टिंग' का ये कैसा आंकड़ा लेकर आ गए अखिलेश यादव, चर्चा बढ़ी तो मिला ये जवाब

अखिलेश कुमार

05 May 2025 (अपडेटेड: 05 May 2025, 06:18 PM)

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव बीते कुछ दिनों से लगातार यूपी पुलिस में जाति के आधार पर ड्यूटी की तैनाती का मुद्दा उठा रहे हैं.

Akhilesh Yadav, Akhilesh Yadav News, PDA, pda फॉर्मूले, Prayagraj, Prayagraj News, Prayagraj Police, Prayagraj Police Case, Samajwadi Party, UP News, UP Politics, अखिलेश यादव, प्रयागराग, प्रयागराज पुलिस, ठाकुर, यूपी न्यूज

UP News

Google CTA

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव बीते कुछ दिनों से लगातार यूपी पुलिस में जाति के आधार पर ड्यूटी की तैनाती का मुद्दा उठा रहे हैं. साथ ही यह भी आरोप लगा चुके हैं कि आगरा, मैनपुरी और चित्रकूट जिलों के अधिकांश थानों में क्षत्रिय थानेदार तैनात हैं. इस बीच उन्होंने इस मुद्दे को उठाते हुए कौशांबी जिले को लेकर यह आरोप लगाया है.

यह भी पढ़ें...

अखिलेश यादव ने कौशांबी पुलिस पर आरोप लगाते हुए यह दावा किया है कि 'कौशांबी में एसएचओ और एसओ की कुल 15 तैनाती है, जिसमें से 7 क्षत्रिय हैं. तीन अन्य सामान्य जाति के हैं और केवल 5 पीडीए से हैं. 

 

 

कौशांबी पुलिस ने अखिलेश यादव के आरोपों का किया खंडन

अखिलेश यादव के इन आरोपों का खंडन करते हुए कौशांबी पुलिस ने कहा कि 'जिले में कुल 16 थाने हैं. सभी थानों में शासनादेश के क्रम में सभी वर्गों से एसएचओ, SHO पद पर नियुक्त हैं. सामान्य जाति के 8, पिछड़ी जाति के 4, अनुसूचित जाति के 4 एसएचओ और एसओ नियुक्त हैं. जाति विशेष के 7 थाना प्रभारियों की नियुक्त किए जाने की बात असत्य है. 


पहले भी अखिलेश ने लगाए थे ये आरोप

बता दें कि बीते कुछ दिनों पहले भी अखिलेश यादव ने यूपी के थानों में थानेदारों की नियुक्ति को लेकर कहा था कि PDA समुदायों के साथ अन्याय हो रहा है. उनके अनुसार, एक विशेष जाति खासकर ठाकुर और ब्राह्मण, को थानेदार के पदों पर तरजीह दी जा रही है. उन्होंने आगरा में 48 थानों में केवल 15 PDA समुदाय के थानेदार होने का दावा किया था.

अखिलेश यादव के इन आरोपों को उत्तर प्रदेश के डीजीपी प्रशांत कुमार ने सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि थानेदारों की नियुक्ति में आरक्षण नियमों का कड़ाई से पालन किया जाता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि योग्यता और वरिष्ठता के आधार पर सभी वर्गों को उचित अवसर दिए जाते हैं. डीजीपी ने यह भी बताया कि थानेदारों की तैनाती की मासिक समीक्षा की जाती है ताकि किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव न हो.