Impact Feature- एसोटेक ग्रुप: 40 साल में कैसे बना लोगों का भरोसेमंद नाम

यूपी तक

• 12:04 PM • 27 Aug 2026

भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में चार दशकों से सक्रिय एसोटेक समूह के संस्थापक संजीव श्रीवास्तव ने संघर्ष, नोटबंदी और कोरोना संकट के बावजूद भरोसे का नाम गढ़ा है. एनसीआर से लेकर भुवनेश्वर और रांची जैसे टियर-2 शहरों तक फैले असोटेक समूह की सफलता, समय पर प्रोजेक्ट डिलीवरी और पारदर्शिता की पूरी कहानी पढ़िए.

 संजीव श्रीवास्तव, एसोटेक ग्रुप के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक

संजीव श्रीवास्तव, एसोटेक ग्रुप के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक

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भारतीय रियल एस्टेट जगत में चार दशक तक निरंतर सक्रिय रहना अपने आप में एक उपलब्धि है. एसोटेक समूह के संस्थापक संजीव श्रीवास्तव ने इन्हीं 40 वर्षों में केवल अपार्टमेंट और टाउनशिप नहीं बनाईं, बल्कि एक ऐसा नाम भी गढ़ा जो बाजार के उतार-चढ़ाव से कहीं अधिक मजबूत साबित हुआ.

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संघर्ष से पहचान तक

जब भारत में संगठित रियल एस्टेट विकास अपनी शुरुआती अवस्था में था, तब एसोटेक समूह ने अपनी यात्रा शुरू की. बीते वर्षों में कंपनी ने एनसीआर, ओडिशा, झारखंड समेत कई क्षेत्रों में विस्तार किया. आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं में कंपनी की प्राथमिकता संरचनात्मक गुणवत्ता और

दीर्घकालिक बसावट रही, न कि त्वरित बिक्री. संजीव श्रीवास्तव का मानना रहा है कि यह कारोबार केवल ईंट-गारे का नहीं, बल्कि भरोसे का है. उनका सिद्धांत स्पष्ट था: हर उस खरीदार को वही मिले जिसका वादा किया गया था, खासकर जब बात जीवन भर की बचत की हो.

कठिन दौर में परीक्षा

भारतीय रियल एस्टेट ने नोटबंदी, रेरा का नियामक बदलाव, एनबीएफसी तरलता संकट और कोरोना महामारी जैसे कई झटके झेले. निर्माण और बिक्री एक साथ ठप हो गए. कई डेवलपर जो तेजी के समय में अधिक कर्ज लेकर चले थे, वे टिक नहीं पाए. लेकिन एसोटेक समूह इन संकटों से गुजरा और कार्यप्रणाली को सुधारा. परियोजना वित्त में अनुशासन लाया गया और खरीदारों से पारदर्शी संवाद पर जोर दिया गया.

भरोसा ही पहचान

श्रीवास्तव की सोच की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि रियल एस्टेट में निर्माण से पहले विश्वास जरूरी है. उनके नेतृत्व में एसोटेक समूह ने तय समय पर पोजेशन देना और होमबायर्स से खुला संवाद रखना अपनी आदत बनाया. रेरा लागू होने के बाद भी यह प्रथा हर कंपनी में देखने को नहीं मिलती.

अब टियर-2 शहरों की ओर रुख

आज एसोटेक समूह भुवनेश्वर और रांची जैसे टियर-2 बाजारों में विस्तार कर रहा है. श्रीवास्तव का मानना है कि भारत की अगली रियल एस्टेट विकास कहानी केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगी. बढ़ती आय, बेहतर बुनियादी ढांचा और प्रवासन के चलते टियर-2 शहरों में भी वही संगठित और गुणवत्तापूर्ण विकास की मांग बढ़ रही है, जो अब तक महानगरों की पहचान रही है.

चार दशक का निष्कर्ष

संजीव श्रीवास्तव के शब्दों में, रियल एस्टेट में दीर्घायु किसी एक सफल लॉन्च से नहीं मिलती. यह एक-एक डिलीवर्ड प्रोजेक्ट, एक-एक संतुष्ट खरीदार और एक-एक निभाए गए वादे से अर्जित होती है. रांची, गाजियाबाद और भुवनेश्वर में नई लॉन्चिंग के साथ एसोटेक समूह अपने अगले अध्याय में प्रवेश कर रहा है. और चार दशक पुराना यही मूल सिद्धांत अब भी उसकी राह तय कर रहा है.

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