सुप्रीम कोर्ट में जाकर CJI को गाली देने वाले प्रबल प्रताप यादव ने अब क्या कह दिया, क्या है आगे का प्लान?

अमित तिवारी

• 07:23 PM • 31 Aug 2026

Prabal Pratap Yadav News: प्रबल प्रताप यादव 4 सितंबर 2026 से 'राष्ट्रीय न्याय व्यवस्था परिवर्तन यात्रा' शुरू करेंगे. प्रयागराज से शुरू होकर यात्रा दिल्ली तक जाएगी.

Prabal Yadav

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इटावा के प्रबल प्रताप यादव एक बार फिर चर्चा में हैं. कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट में कागज फेंकने और सीजेआई को अपशब्द कहने के मामले के बाद अब उन्होंने न्याय व्यवस्था में बदलाव के लिए पदयात्रा का ऐलान किया है. प्रबल प्रताप यादव का दावा है कि इस यात्रा का मकसद न्यायपालिका में भ्रष्टाचार खत्म करना, व्यवस्था में बदलाव लाना और न्यायपालिका को संसद के बराबर ताकतवर बनाना है.

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प्रबल प्रताप ने अपनी इस मुहिम का नाम 'राष्ट्रीय न्याय व्यवस्था परिवर्तन यात्रा' रखा है. उनके मुताबिक यह पदयात्रा 4 सितंबर 2026 से शुरू होगी और 4 नवंबर 2026 तक चलेगी. यात्रा की शुरुआत प्रयागराज के चंद्रशेखर आजाद पार्क से होगी और इसका समापन नई दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में होगा.

प्रयागराज से दिल्ली तक पैदल यात्रा

प्रबल प्रताप यादव के मुताबिक, यह पूरी यात्रा पैदल होगी और शांतिपूर्ण तरीके से निकाली जाएगी. उन्होंने कहा कि उन्हें सरकार, किसी राजनीतिक पार्टी या न्यायपालिका से कुछ नहीं कहना है, बल्कि वह अपनी बात सीधे आम लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं.

उनका कहना है कि समस्या आम जनता की है और अगर पीड़ित लोग खुद अपनी बात नहीं रखेंगे तो कोई और उनकी बात रखने वाला नहीं होगा. उन्होंने यह भी कहा कि कोई राजनीतिक पार्टी इस मुद्दे को नहीं उठाती है.

प्रबल प्रताप के मुताबिक यह यात्रा उत्तर प्रदेश के करीब 13 जिलों से होकर गुजरेगी. प्रयागराज से निकलने के बाद यात्रा लखनऊ जाएगी. इसके बाद शाजापुर और सहारनपुर होते हुए हरियाणा में प्रवेश करेगी. हरियाणा में पानीपत और सोनीपत के रास्ते यात्रा दिल्ली पहुंचेगी और करीब 4 नवंबर के आसपास इसका समापन होगा.

वकीलों से साथ आने की अपील

यात्रा में साथ आने वालों को लेकर प्रबल प्रताप ने सबसे पहले अधिवक्ताओं से अपील की है. उन्होंने कहा कि वकील फिर से अपनी भूमिका में आएं. उन्होंने अंग्रेजों के समय वकीलों की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि देश को एक बार फिर वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ की जरूरत है.

जिला अदालतों और शिक्षण संस्थानों में जाएंगे

प्रबल प्रताप के मुताबिक पदयात्रा के दौरान रास्ते में आने वाले जिलों के जिला एवं सत्र न्यायालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में भी जाएंगे. यहां वह अधिवक्ताओं, छात्रों और आम लोगों को अपनी मुहिम के बारे में बताएंगे. यानी इस बार उनकी मुहिम सुप्रीम कोर्ट के अंदर विरोध तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वह सड़क पर उतरकर अपनी बात लोगों तक पहुंचाने का दावा कर रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट में कागज फेंकने पर क्या बोले प्रबल प्रताप?

प्रबल प्रताप यादव इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में विरोध के तरीके को लेकर चर्चा में आए थे. उनका कहना है कि वह साइबर फ्रॉड की शिकायत लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे और अपनी बात देशभर तक पहुंचाने के लिए उन्होंने विरोध का यह तरीका अपनाया.

उन्होंने अपने तरीके की तुलना भगत सिंह से भी की. उनका कहना है कि भगत सिंह ने अपनी आवाज देश तक पहुंचाने के लिए धमाके का सहारा लिया था, जबकि उन्होंने अपनी बात लोगों तक पहुंचाने के लिए कागज फेंकने और शब्दों के जरिए विरोध का रास्ता चुना.

प्रबल प्रताप ने कहा कि उन्होंने किसी व्यक्ति को गाली नहीं दी, बल्कि सिस्टम को गाली दी और उनके मुताबिक सिस्टम गाली खाने लायक है. उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा असर चाहिए था कि पूरे देश में उनकी बात सुनी जाए.

'सबसे बड़ा करप्शन यही कि अयोग्य लोग वहां तक पहुंच कैसे रहे'

न्याय व्यवस्था में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर प्रबल प्रताप से जब सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा भ्रष्टाचार यही है कि अयोग्य लोग उस स्तर तक पहुंच कैसे रहे हैं. उन्होंने न्याय व्यवस्था में बदलाव की जरूरत बताते हुए अपनी पदयात्रा को इसी मुहिम का हिस्सा बताया है.

विवादित बयान और तरीका भी रहा चर्चा में

प्रबल प्रताप का पिछला विरोध प्रदर्शन उनके बयान और विरोध के तरीके को लेकर भी विवादों में रहा था. अब सुप्रीम कोर्ट के अंदर विरोध के बाद उन्होंने सड़क पर पदयात्रा के जरिए न्याय व्यवस्था में बदलाव की आवाज उठाने का दावा किया है. अब यह यात्रा 4 सितंबर से शुरू होनी है. प्रयागराज से शुरू होकर उत्तर प्रदेश और हरियाणा के रास्ते दिल्ली पहुंचने वाली इस पदयात्रा के जरिए प्रबल प्रताप यादव अपनी बात आम लोगों, अधिवक्ताओं और छात्रों तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे.

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