IAS Divya Mittal: आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद उनकी करीब 11 साल की प्रशासनिक यात्रा भी चर्चा में है. इस दौरान उन्होंने अलग-अलग जिलों और कई पदों पर जिम्मेदारी संभाली. हालांकि, अपने विदाई संदेश में उन्होंने खास तौर पर मिर्जापुर और देवरिया का जिक्र किया. यही बात अब लोगों का ध्यान खींच रही है कि आखिर इन दोनों जिलों से जुड़ी ऐसी कौन-सी यादें हैं, जिन्हें दिव्या मित्तल ने अपनी नौकरी छोड़ते समय सबसे ज्यादा वजन दिया.
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दिव्या मित्तल ने अपने सोशल मीडिया संदेश में प्रशासनिक सेवा के दौरान मिले अनुभवों और लोगों से जुड़ी यादों को साझा किया. उन्होंने मिर्जापुर को लेकर लिखा कि यहां उन्होंने सीखा कि असंभव कोई तथ्य नहीं, बल्कि सिर्फ एक राय है. वहीं देवरिया से मिली सीख को उन्होंने इस तरह बताया कि सही के साथ खड़ा होना कोई विकल्प नहीं, बल्कि कर्तव्य है.
मेरठ से शुरू हुआ प्रशासनिक सफर
दिव्या मित्तल की शुरुआती प्रशासनिक तैनाती मेरठ में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के तौर पर हुई. उन्होंने 27 नवंबर 2015 को मेरठ में कार्यभार संभाला और 2 मई 2017 तक इस पद पर रहीं. इसके बाद 3 मई 2017 को उन्हें गोंडा में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) बनाया गया.
गोंडा में करीब एक साल काम करने के बाद 17 अप्रैल 2018 को उनकी पोस्टिंग कानपुर नगर में हुई. यहां उन्हें UPSIDC से जुड़ी जिम्मेदारी मिली. इससे साफ है कि उनके शुरुआती करियर में जिला प्रशासन के साथ-साथ विकास और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े कामों का अनुभव भी शामिल रहा.
कानपुर के बाद बरेली विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी
कानपुर नगर के बाद 15 फरवरी 2019 को दिव्या मित्तल को बरेली विकास प्राधिकरण का वाइस चेयरमैन बनाया गया. करीब डेढ़ साल बाद उन्हें फिर जिला प्रशासन की जिम्मेदारी मिली.
11 सितंबर 2020 को उन्होंने संत कबीर नगर की जिलाधिकारी के रूप में पदभार संभाला. यहां से जिला प्रशासन की कमान संभालने वाली अधिकारी के तौर पर उनकी पहचान और मजबूत हुई.
इसके करीब दो साल बाद 17 सितंबर 2022 को उनका तबादला मिर्जापुर कर दिया गया. यही वह जिला है, जिसे उन्होंने बाद में अपने इस्तीफे के संदेश में दिव्या ने खास तरीके से याद किया.
मिर्जापुर से जुड़ी कौन-सी यादें हैं खास?
दिव्या मित्तल 17 सितंबर 2022 से 1 सितंबर 2023 तक मिर्जापुर की जिलाधिकारी रहीं. इस्तीफे के समय उन्होंने इस कार्यकाल की कई यादें साझा कीं. उन्होंने लिखा कि मिर्जापुर ने उन्हें सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, सिर्फ एक राय है. अपने संदेश में उन्होंने मां विंध्यवासिनी का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक, मां विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर उन्हें समझ आया कि असली शक्ति किसी पद से नहीं, बल्कि उनकी कृपा और लोगों के भरोसे से आती है.
मिर्जापुर की एक और घटना ने दिव्या मित्तल के मन पर गहरी छाप छोड़ी. उन्होंने लहुरियादह की पहाड़ी की एक बुजुर्ग महिला को याद किया. उनके मुताबिक, जब गांव में पहली बार पानी पहुंचा तो उस महिला ने कोई शब्द नहीं कहा. उन्होंने कांपते हाथों से दिव्या मित्तल के सिर को छुआ और उन्हें आशीर्वाद दिया. दिव्या मित्तल ने लिखा कि वह पल उनके लिए किसी सरकारी पद या उपलब्धि से कहीं बड़ा था. पद भले ही चला गया, लेकिन उस बुजुर्ग महिला का स्पर्श उनकी जिंदगी में हमेशा बना रहेगा.
मिर्जापुर के बाद लखनऊ और फिर देवरिया
मिर्जापुर से तबादले के बाद 4 सितंबर 2023 को दिव्या मित्तल को प्रतीक्षारत किया गया. इसके बाद 1 फरवरी 2024 को उन्हें लखनऊ में CEO, UPRRDA की जिम्मेदारी मिली.
हालांकि, कुछ ही महीनों बाद उनकी फिर जिला प्रशासन में वापसी हुई. 13 जुलाई 2024 को उन्हें देवरिया का जिलाधिकारी बनाया गया. उन्होंने यहां करीब पौने दो साल तक डीएम के तौर पर काम किया. इसके बाद 6 मई 2026 को उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव बनाया गया और उनकी तैनाती लखनऊ में हो गई.
देवरिया को भी क्यों किया याद?
दिव्या मित्तल ने अपने विदाई संदेश में मिर्जापुर के साथ देवरिया को भी खास जगह दी. उन्होंने लिखा कि देवरिया ने उन्हें सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, बल्कि कर्तव्य है.
उनके संदेश से साफ था कि प्रशासनिक सेवा को वह सिर्फ पद और जिम्मेदारियों के रूप में नहीं देखतीं, बल्कि इसे लोगों की जिंदगी में बदलाव लाने के माध्यम के तौर पर देखती हैं.
उन्होंने लिखा कि अपने लिए देखे गए सपने पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे गए सपनों को जीना था. उनके मुताबिक असली संतोष तब मिला, जब किसी परिवार को पहली बार जमीन का अधिकार मिला, किसी दिव्यांग को सम्मान के साथ जीने का अवसर मिला या किसी किसान के खेत तक पानी पहुंचा.
यही वजह है कि इस्तीफे के संदेश में उन्होंने अपनी पोस्टिंग की पूरी सूची गिनाने के बजाय उन जगहों को याद किया, जहां से उन्हें व्यक्तिगत और मानवीय स्तर पर बड़ी सीख मिली.
दिव्या मित्तल ने खुद बताई इस्तीफे की वजह
इस्तीफे के बाद दिव्या मित्तल ने इस फैसले को लेकर अपनी चुप्पी भी तोड़ी. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा किसी दबाव या अचानक आए किसी ट्रिगर मोमेंट का नतीजा नहीं है. फैसला उन्होंने काफी सोच-विचार के बाद लिया है.
उन्होंने कहा कि IAS की नौकरी उनके जीवन का सिर्फ एक अध्याय है, पूरी जिंदगी नहीं. दिव्या मित्तल के मुताबिक उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं, रुचियों और परिवार को ध्यान में रखते हुए रास्ता चुना है.
आगे की योजना को लेकर उन्होंने संकेत दिया कि वह लेखन, शिक्षण और समाज सेवा से जुड़े काम कर सकती हैं. उन्होंने अपनी दो बेटियों और परिवार की जिम्मेदारियों का भी जिक्र किया. हालांकि, भविष्य में वह वास्तव में क्या करेंगी, इसे लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है.
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