पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से ठीक पहले फलता विधानसभा क्षेत्र एक बैटलफील्ड में तब्दील हो गया है. उत्तर प्रदेश के चर्चित आईपीएस अधिकारी और चुनाव आयोग के ऑब्जर्वर अजय पाल शर्मा ने जब मंगलवार को भारी सुरक्षा बल के साथ टीएमसी के गढ़ में कदम रखा, तो स्थिति विस्फोटक हो गई. जुबानी जंग अब सीधी भिड़ंत में बदल चुकी है और फलता की सड़कों पर भारी नारेबाजी और हंगामे का दौर शुरू हो गया है.
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क्या है ताजा अपडेट?
ANI के अनुसार, ऑब्जर्वर अजय पाल शर्मा के नेतृत्व में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के जवानों ने फलता विधानसभा क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान चलाया. जैसे ही अजय पाल शर्मा भारी फोर्स के साथ टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान के कार्यालय के पास पहुंचे और तलाशी शुरू की, वहां मौजूद टीएमसी समर्थक उग्र हो गए.
सैकड़ों की तादाद में जमा हुए कार्यकर्ताओं ने न केवल सर्च ऑपरेशन का विरोध किया, बल्कि केंद्रीय सुरक्षा बलों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. इस दौरान अजय पाल शर्मा के काफिले को देखते ही 'मुर्दाबाद' के नारे लगने लगे, जिससे इलाके में भारी तनाव फैल गया.
क्या है विवाद की जड़?
अजय पाल शर्मा और जहांगीर खान के बीच इस भीषण टकराव की शुरुआत तब हुई जब शर्मा टीएमसी प्रत्याशी के घर के बाहर खड़े होकर उनके परिजनों को चेतावनी देते नजर आए थे. उन्होंने कड़क लहजे में कहा था, "अगर जनता को धमकाने की खबर आई, तो कायदे से खबर लेंगे... फिर बाद में रोना-पछताना काम नहीं आएगा." इतना ही नहीं, अजय पाल ने जहांगीर खान की सुरक्षा में तैनात नियमों से ज्यादा पुलिसकर्मियों को लेकर स्थानीय एसपी को नोटिस थमा दिया था. इस सख्ती ने टीएमसी खेमे में नाराजगी की आग लगा दी थी.
फिर सामने आया जहांगीर खान का आक्रामक पलटवार
इस सख्ती के जवाब में जहांगीर खान ने भी फिल्मी अंदाज में पलटवार किया था. उन्होंने जनसभाओं में केंद्रीय बलों को 'बीजेपी का दलाल' करार देते हुए कहा था कि "खेला उन्होंने शुरू किया है, लेकिन खत्म हम करेंगे. पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त!" उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर यहां का जनसमुद्र सड़कों पर उतर आया तो बाहरी अधिकारी और फोर्स हवा में उड़ जाएंगे.
कौन हैं IPS अजय पाल शर्मा?
यूपी कैडर के 2011 बैच के आईपीएस अजय पाल शर्मा की पहचान एक 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' की है. डेंटिस्ट से पुलिस अफसर बने अजय पाल ने यूपी के नोएडा और रामपुर जैसे संवेदनशील जिलों में अपराधियों की कमर तोड़ी है. उनकी इसी कड़क छवि को देखते हुए चुनाव आयोग ने उन्हें पश्चिम बंगाल के संवेदनशील इलाकों में निष्पक्ष चुनाव कराने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है, जिसे लेकर अब बंगाल की सत्ताधारी पार्टी और उनके बीच सीधा संघर्ष देखने को मिल रहा है.
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