इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में भी भारी आक्रोश और मातम का माहौल है. अयातुल्लाह अली खामेनई की मौत के बाद लोग आक्रोशित हैं. इस बीच गोंडा के शास्त्रीनगर निवासी और चकबंदी विभाग से सेवानिवृत्त इतरत हुसैन का परिवार इस वक्त गहरी चिंता में है क्योंकि उनके बेटे और बेटी सपरिवार ईरान के खूम शहर में रह रहे हैं.
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ईरान में मौजूद है गोंडा का परिवार
सेवानिवृत्त इतरत हुसैन के बेटे और व्यवसायी सबाहत हुसैन ने यूपी Tak से बातचीत में बताया कि उनका छोटा भाई और बहन का परिवार ईरान में रहकर पढ़ाई और कामकाज कर रहा है. उन्होंने बताया कि उनके छोटे भाई फसाहत हुसैन इस्लामिक स्टडी में पीएचडी कर रहे हैं. वे अपनी पत्नी ऐनुल हुदा और दो बेटियों इंसिया जैनब और ताहिरा जैनब के साथ खूम शहर में हैं.
सबाहत की बहन मेराज फातिमा अपने दो बेटों रजा हसन और मोहम्मद हसन के साथ वहीं मौजूद हैं. बहन के पति मोहम्मद हसन फिलहाल अपने घर मेरठ आए हुए हैं.
'मौत का खौफ नहीं, हम छिपने वाले लोग नहीं'
सबाहत हुसैन ने बताया कि परिवार से लगातार संपर्क हो रहा है और सभी सुरक्षित हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या परिवार वहां बंकरों में है, तो उन्होंने दो टूक कहा, "हम कर्बला के बाशिंदे हैं, हम खुलेआम रहना जानते हैं. हमें मौत का खौफ नहीं है और हम छुपने वाले लोग नहीं हैं. ईरान के लोग सड़कों पर हैं."
सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामनेई की शहादत पर भारी आक्रोश
सबाहत हुसैन के मुताबिक, उन्हें अपने परिवार की उतनी चिंता नहीं है जितनी अपने सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह खामनेई की शहादत का दुख है. उन्होंने कहा कि 'अयातुल्लाह साहब ने कभी डरना नहीं सिखाया. जालिम आतंकवादियों ने उन्हें शहीद कर दिया है.' उन्होंने जोर देकर कहा कि 'खामनेई साहब शहीद नहीं हुए हैं वह जिंदा थे हैं और हमेशा जिंदा रहेंगे. उन्होंने जुल्म के आगे कभी झुकना नहीं सिखाया."
गोंडा के इमामबाड़ों में दुआ और मजलिस
ईरान की इस घटना के बाद गोंडा नगर के करीब 80 शिया घरों के इमामबाड़े में नमाज के बाद विशेष दुआ की गई. मौलाना मुन्तसिर ने जालिमों की सख्त मजम्मत (निंदा) करते हुए कहा कि अयातुल्लाह खामनेई साहब हम लोगों के रहबर थे. इस घटना से पूरे आलम-ए-इस्लाम को गहरा सदमा पहुंचा है. इमामबाड़ों में मजलिस का दौर जारी है और शहीदों की सलामती व शांति के लिए दुआएं की जा रही हैं.
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