AK-47 से लेकर पुलिस फायरिंग तक... संभल हिंसा केस में ASP अनुज चौधरी से पूछे गए 150 सवाल

यूपी तक

16 May 2026 (अपडेटेड: 18 Jul 2026, 10:21 PM)

Sambhal Violence Case News: संभल हिंसा मामले में शनिवार को जिला जज डॉ. विदुषी सिंह की अदालत में करीब दो घंटे तक लंबी गवाही और जिरह चली. इस दौरान संभल के तत्कालीन सीओ और वर्तमान में फिरोजाबाद के एएसपी अनुज चौधरी की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गवाही दर्ज की गई.

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ASP Anuj Chaudhary (File Photo)

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UP News: संभल हिंसा मामले में शनिवार को जिला जज डॉ. विदुषी सिंह की अदालत में करीब दो घंटे तक लंबी गवाही और जिरह चली. इस दौरान संभल के तत्कालीन सीओ और वर्तमान में फिरोजाबाद के एएसपी अनुज चौधरी की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गवाही दर्ज की गई. सुनवाई के दौरान जिला न्यायाधीश भी पूरे समय कोर्ट में मौजूद रहीं.

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हथियार और लोकेशन को लेकर पूछे गए सवाल

क्राइम नंबर 340 के तहत चल रहे इस मामले में आरोपियों के वकील आसिफ अख्तर ने एएसपी अनुज चौधरी से करीब 150 सवाल पूछे. इन सवालों में ज्यादातर तकनीकी बातें और घटना से जुड़े मुद्दे शामिल थे. जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित के अनुसार, बचाव पक्ष ने अधिकारी से गहन सवाल पूछकर उनकी जानकारी को परखने की कोशिश की. जब अनुज चौधरी से पूछा गया कि हिंसा के समय वह कहां मौजूद थे और उनके पास कौन सा हथियार था, तो उन्होंने बताया कि उनके पास 9mm की पिस्टल थी, जबकि उनके साथ मौजूद सुरक्षाकर्मी के पास AK-47 और एक पंप गन थी.

AK-47 और गोलियों को लेकर भी पूछे सवाल

जिरह के दौरान बचाव पक्ष ने तकनीकी सवाल भी पूछे. उनसे पूछा गया कि AK-47 में किस प्रकार की गोली इस्तेमाल होती है. इस पर एएसपी अनुज चौधरी ने जवाब दिया कि AK-47 में 7.62×39MM कारतूस का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि उनकी 9mm पिस्टल में 9mm की गोली लगती है. पुलिस फायरिंग से जुड़े सवालों पर एएसपी अनुज चौधरी ने कहा कि उग्र भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की ओर से केवल पंप गन और रबर बुलेट का इस्तेमाल किया गया था.

केस से अलग सवालों पर जज ने जताई आपत्ति

सरकारी वकील राहुल दीक्षित ने बताया कि जिरह के दौरान विपक्षी वकीलों ने कई ऐसे सवाल भी पूछने की कोशिश की, जिनका इस केस से सीधा संबंध नहीं था. इस पर अभियोजन पक्ष ने आपत्ति जताई. इसके बाद जिला जज डॉ. विदुषी सिंह ने हस्तक्षेप करते हुए निर्देश दिया कि केवल संभल हिंसा से जुड़े सवाल ही पूछे जाएं.

आरोपी पक्ष ने पुलिस की थ्योरी पर उठाए सवाल

वहीं मुख्य आरोपी मुल्ला अफरोज के वकील आसिफ अख्तर ने अदालत के बाहर पुलिस की जांच पर सवाल खड़े किए. उनका दावा है कि हिंसा में जिन चार लोगों की मौत हुई थी, वे जनता की नहीं बल्कि पुलिस की कथित फायरिंग में मारे गए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने शुरुआत में इस तथ्य को एफआईआर में शामिल नहीं किया और बाद में मामले को अलग दिशा देने के लिए मृतकों के परिजनों के जरिए नई एफआईआर दर्ज करवाई.

क्या था पूरा मामला?

बता दें कि 24 नवंबर 2024 को संभल की जामा मस्जिद में एडवोकेट कमीशन के सर्वे के दौरान अचानक पथराव और बवाल शुरू हो गया था, जिसने बाद में हिंसक रूप ले लिया. इस हिंसा में चार स्थानीय युवकों की मौत हो गई थी. पुलिस ने इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड दुबई में बैठे शारिक साठा को बताया था. पुलिस के मुताबिक उसके गैंग से जुड़े मुल्ला अफरोज, मोहम्मद गुलाम और मोहम्मद वारिस फिलहाल जेल में बंद हैं. कानूनी जानकारों का मानना है कि इस अहम गवाही के बाद आने वाले महीनों में इस मामले में अंतिम फैसला आ सकता है.