प्रतीक यादव के अंतिम संस्कार में फूट-फूटकर रोने वाला ये शख्स कौन, जिनके आंसू पोछती दिखी अपर्णा की बेटी

लखनऊ के भैंसा कुंड में प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार हुआ. इस दौरान उनके ससुर अरविंद सिंह बिष्ट के साथ मुखाग्नि में हाथ लगाने वाले 4 लोगों और वहां फूट-फूट कर रोने वाले शख्स के बारे में जानिए.

Prateek Yadav Last Rites

सुषमा पांडेय

• 01:21 PM • 16 May 2026

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Prateek Yadav Last Rites Emotional Video: मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का लखनऊ के भैंसा कुंड घाट पर अंतिम संस्कार संपन्न हो गया और वे पंच तत्वों में विलीन हो गए. इस दुखद घड़ी में पूरा यादव परिवार और अपर्णा यादव का मायका एक साथ खड़ा नजर आया. लेकिन अंतिम विदाई के दौरान घाट से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जो इस वक्त सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक भारी चर्चा का विषय बनी हुई है. यह तस्वीर प्रतीक यादव को मुखाग्नि दिए जाने के वक्त की है, जहां उनके ससुर अरविंद सिंह बिष्ट मुखाग्नि दे रहे थे. इस दौरान उनके साथ 4 अन्य लोगों ने भी मुखाग्नि में हाथ लगाया था. आखिर ये चार लोग कौन थे, चिता के चबूतरे पर फूट-फूट कर रोने वाले उस युवक का प्रतीक से क्या रिश्ता था और शास्त्रों के अनुसार इस मुखाग्नि का क्या विधान है, आइए विस्तार से समझते हैं.

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संकट के समय 'चट्टान' की तरह खड़े रहे अखिलेश यादव

अंतिम संस्कार के दौरान तमाम तरह के मनमुटावों की खबरों को पीछे छोड़ते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव प्रतीक के परिवार के साथ चट्टान की तरह खड़े दिखाई दिए. घाट से एक बेहद भावुक कर देने वाली वीडियो भी सामने आई, जहां अखिलेश यादव एक बड़े भाई और पिता की तरह प्रतीक की सबसे छोटी बेटी को गोद में पुचकारते, चॉकलेट खिलाते और उसे संभालते नजर आए. बच्ची भी मासूमियत से अखिलेश के कान में कुछ कहती दिखी, जिसने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं.

ससुर के साथ मुखाग्नि देने वाले वो 4 लोग कौन थे?

जब चिता को मुखाग्नि दी जा रही थी, तब अपर्णा यादव के पिता अरविंद सिंह बिष्ट के साथ चार और करीबियों ने लकड़ी पर हाथ लगाया था. अंतिम संस्कार के वक्त चबूतरे पर घुंघराले बालों वाला एक युवक फूट-फूट कर बिलखता नजर आया, जिसके आंसू खुद प्रतीक की बड़ी बेटी प्रथमा पोंछ रही थी वह कोई और नहीं बल्कि प्रतीक की मां दिवंगत साधना गुप्ता के भाई सचिन गुप्ता के बेटे चिराग गुप्ता थे. 
सचिन पति गुप्ता के दूसरे बेटे सक्षम भी वहां मौजूद थे.

प्रतीक के दूसरे दिवंगत मामा नितिन पति गुप्ता के बेटे कुणाल भी चिता के पास हाथ लगाए खड़े थे. प्रतीक अपने इन ममेरे भाइयों के दिल के बेहद करीब थे. इन रिश्तेदारों के अलावा जो चौथा शख्स सबसे पीछे दाढ़ी में खड़ा था वो थे उपेंद्र, जो प्रतीक यादव के पर्सनल ड्राइवर थे.  प्रतीक अपने ड्राइवर से बेहद लगाव रखते थे इसलिए इस भावुक पल में वो भी शामिल थे.

क्या कहता है शास्त्रों का विधान? क्यों पड़ी 5 लोगों की जरूरत?

मुखाग्नि की इस तस्वीर को लेकर सोशल मीडिया पर यह बहस छिड़ गई कि क्या ससुर अपने दामाद को मुखाग्नि दे सकता है? जब इस बारे में शास्त्रों और कर्मकांड के जानकारों से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर शास्त्र सम्मत विधान के अनुसार ससुर अपने दामाद को सीधे मुखाग्नि नहीं दे सकता. पंडितों के मुताबिक, किसी विशेष या विकट परिस्थिति में यदि ससुर मुखाग्नि देता है तो शास्त्रों के विधान को पूरा करने और उसका प्रतिफल बनाए रखने के लिए परिवार के अन्य सगे भाइयों (जैसे ममेरे भाइयों) का चिता में हाथ लगाना अनिवार्य हो जाता है. यही वजह थी कि शास्त्रों के नियम और भावनात्मक जुड़ाव के एक अद्भुत सामंजस्य के तहत इन पांच लोगों ने मिलकर प्रतीक यादव को अंतिम विदाई दी.

बेटे की तरह मानते थे ससुर

मुखाग्नि देते वक्त अरविंद सिंह बिष्ट खुद अपने आंसुओं को नहीं रोक पाए. उन्होंने अपनी एक भावुक पोस्ट में लिखा था कि वे प्रतीक को उनके बचपन के दिनों से जानते थे और वे उनके लिए दामाद नहीं, बल्कि सगे बेटे जैसे बन चुके थे.