उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए खेती में होने वाले नुकसान की भरपाई अब और भी आसान हो गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को राहत पहुंचाने के लिए हाई-टेक डिजिटल विकल्प पेश किए हैं. अब ओलावृष्टि, बेमौसम बारिश या अन्य प्राकृतिक आपदा से फसल बर्बाद होने पर किसान घर बैठे इसकी सूचना दे सकते हैं.
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खेती-किसानी में प्राकृतिक आपदाएं अक्सर मेहनत पर पानी फेर देती हैं, लेकिन अब उत्तर प्रदेश के किसानों को दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है. प्रदेश में संचालित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के अंतर्गत फसल क्षति की सूचना देने के लिए सरकार ने कई डिजिटल माध्यम उपलब्ध कराए हैं.
यदि आपकी फसल को नुकसान पहुंचा है, तो आप नीचे दिए गए माध्यमों से तत्काल जानकारी साझा कर सकते हैं:
1. टोल-फ्री नंबर 14447 (KRPH)
किसान भाई किसी भी समय टोल-फ्री नंबर 14447 पर कॉल करके अपनी फसल के नुकसान की जानकारी दे सकते हैं. इस नंबर के जरिए न केवल शिकायत दर्ज होगी, बल्कि योजना से जुड़ी विस्तृत जानकारी भी प्राप्त की जा सकती है.
2. व्हाट्सएप चैटबॉट: 7065514447
आजकल हर किसी के पास व्हाट्सएप है, इसी को देखते हुए सरकार ने व्हाट्सएप चैटबॉट नंबर 7065514447 जारी किया है. इस नंबर पर मैसेज भेजकर किसान अपनी फसल क्षति की सूचना साझा कर सकते हैं. यह तकनीक के माध्यम से किसानों को जोड़ने की एक बड़ी पहल है.
3. क्रॉप-इंश्योरेंस ऐप (Crop-Insurance-App)
स्मार्टफोन यूजर किसान 'क्रॉप-इंश्योरेंस ऐप' डाउनलोड कर सकते हैं. इस ऐप के माध्यम से सीधे फोटो और विवरण अपलोड करके नुकसान की रिपोर्ट दर्ज की जा सकती है, जिससे बीमा क्लेम की प्रक्रिया तेज हो जाती है.
4. आधिकारिक पोर्टल: pmfby.gov.in
योजनाओं से संबंधित आधिकारिक जानकारी और ऑनलाइन शिकायत के लिए किसान फसल बीमा पोर्टल https://pmfby.gov.in पर भी लॉग-इन कर सकते हैं.
5. जिला स्तरीय अधिकारियों से संपर्क
डिजिटल माध्यमों के अतिरिक्त यदि किसी किसान को कोई समस्या आती है, तो वे सीधे अपने जनपद के उप कृषि निदेशक, जिला कृषि अधिकारी, बीमा कंपनी के प्रतिनिधि से संपर्क कर सकते हैं. जनपद स्तर पर कार्यरत बीमा कंपनी के प्रतिनिधि किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने के लिए बाध्य हैं.
योगी सरकार का उद्देश्य: समयबद्ध राहत
उत्तर प्रदेश सरकार का मुख्य उद्देश्य आपदा की स्थिति में किसानों को बिना किसी देरी के बीमा राशि दिलाना है. इन माध्यमों के जरिए बीमा प्रक्रियाओं को अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाया गया है. सरकार की मंशा है कि 'अन्नदाता' को संकट की घड़ी में भटकना न पड़े और उन्हें उचित मुआवजा समय पर मिल सके.
विशेष टिप: फसल नुकसान के 72 घंटे के भीतर सूचना देना अनिवार्य होता है, ताकि सर्वेयर समय पर आकर नुकसान का आंकलन कर सके.
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