यूपी में 100 दिन का खास इंटेसिव अभियान चलाने जा रही योगी सरकार, खोजे जाएंगे टीबी के मरीज

उत्तर प्रदेश सरकार फरवरी से 100 दिनों का विशेष सघन टीबी रोगी खोज अभियान शुरू कर रही है, जिसका उद्देश्य प्रदेश को तपेदिक मुक्त बनाना है. इस अभियान में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से टीबी मरीजों की पहचान, समय पर जांच, इलाज, जागरूकता और पुनर्वास पर विशेष जोर दिया जाएगा.

यूपी तक

• 12:35 PM • 16 Jan 2026

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उत्तर प्रदेश को तपेदिक (टीबी) मुक्त बनाने के संकल्प के साथ योगी सरकार फरवरी महीने से एक बड़ा और विशेष अभियान शुरू करने जा रही है. 100 दिनों तक चलने वाले इस 'विशेष सघन टीबी रोगी खोज अभियान' के जरिए राज्य के कोने-कोने से मरीजों की पहचान कर उनका समय पर इलाज सुनिश्चित किया जाएगा. इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि इसमें सांसदों से लेकर पार्षदों तक की जनभागीदारी सुनिश्चित की जाएगी.

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100 दिनों के अभियान की रूपरेखा और रणनीति 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद स्वास्थ्य महानिदेशक (डीजी) डॉ. आरपी सिंह सुमन ने सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) को विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी है. इस रणनीति के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

जनप्रतिनिधियों का साथ: सभी सीएमओ को अगले दो महीनों के भीतर सांसदों के साथ जनपद स्तरीय समीक्षा बैठक करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके साथ ही विधायकों, एमएलसी, ग्राम प्रधानों और पार्षदों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा.

जांच का लक्ष्य: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में ओपीडी में आने वाले 5 प्रतिशत और जिला अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों में 10 प्रतिशत मरीजों को टीबी जांच के लिए रेफर करना अनिवार्य होगा.

सैंपल ट्रांसपोर्ट: आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से टीबी जांच के नमूनों को प्रयोगशाला तक पहुंचाने के लिए सैम्पल ट्रांसपोर्टरों की व्यवस्था की जाएगी.

निःक्षय मित्र: स्थानीय गैर सरकारी संगठनों (NGOs), कॉरपोरेट जगत और संस्थानों को 'निःक्षय मित्र' बनने के लिए प्रेरित किया जाएगा ताकि मरीजों को पोषण और सहायता मिल सके.

किन क्षेत्रों पर रहेगा विशेष जोर?

सरकार ने इस बार उन क्षेत्रों और वर्गों पर ध्यान केंद्रित किया है जहाँ संक्रमण का खतरा अधिक होता है:

बुजुर्ग और गंभीर रोगी: अधिक उम्र के लोगों और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की प्राथमिकता के आधार पर स्क्रीनिंग होगी.
मलिन बस्तियां और जेल: सभी कारागारों और मलिन बस्तियों में टीबी स्क्रीनिंग कराने के सख्त निर्देश दिए गए हैं.
श्रमिक और चालक: कारखानों में काम करने वाले मजदूरों के लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे. साथ ही परिवहन विभाग के चालकों और कंडक्टरों की भी जांच की जाएगी.

स्कूलों और विश्वविद्यालयों में जागरूकता अभियान

टीबी के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के लिए प्राथमिक स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालयों तक विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. छात्र-छात्राओं के बीच निबंध और पोस्टर प्रतियोगिताएं कराई जाएंगी ताकि युवा पीढ़ी इस बीमारी के लक्षणों और बचाव के प्रति सजग हो सके. आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि वे घर-घर जाकर टीबी के लक्षणों वाले लोगों को पहचान सकें.

टीबी से होने वाली मौतों में आई 17% की कम

स्वास्थ्य सचिव डॉ. पिंकी जोवल के अनुसार, सरकार के पिछले प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं. 7 दिसंबर 2024 से चलाए जा रहे सघन खोज अभियान के कारण वर्ष 2015 की तुलना में प्रति लाख मरीजों की संख्या और टीबी से होने वाली मृत्यु दर में 17 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. इसी सफलता को बरकरार रखने के लिए अब फरवरी से दोबारा यह सघन अभियान चलाया जा रहा है.

रोजगार से भी जुड़ेंगे टीबी मरीज

योगी सरकार केवल इलाज तक ही सीमित नहीं है. स्वास्थ्य विभाग ने कौशल विकास विभाग को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि टीबी रोगियों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार हेतु प्रशिक्षित किया जाए, ताकि वे स्वस्थ होने के बाद आत्मनिर्भर बन सकें. इस अभियान को सफल बनाने के लिए 'माई भारत' वॉलंटियर्स और पंजीकृत निःक्षय मित्रों का भी भरपूर सहयोग लिया जाएगा.

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