स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी और शिक्षकों को टैबलेट, यूपी में बदल गया पूरा शिक्षा मॉडल

यूपी तक

• 12:55 PM • 10 Jul 2026

UP Government Schools: उत्तर प्रदेश में बच्चों के भविष्य के लिए सरकार लगातार आधूनिक शिक्षा की मजबूत नीव रख रही है. प्रदेश की सरकार स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए निपुण विद्यालय, डिजीटल लाइब्रेरी, लैब और शिक्षकों को टैबलेट दे रही है.

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UP Government Schools: उत्तर प्रदेश में बच्चों के भविष्य के लिए सरकार लगातार आधुनिक शिक्षा की मजबूत नींव रख रही है. प्रदेश की सरकार स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए तेजी से काम कर रही है. इसी कड़ी में राज्य सरकार ने बच्चों की शुरुआती शिक्षा के लिए आधुनिक क्लासरूम और डिजिटल माध्यमों से पढ़ाई कराने पर जोर दिया है.

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इस शानदार पहल का ही नतीजा है कि यूपी ने 'ASER' और 'परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण-2024' की रिपोर्ट के अनुसार कक्षा 3 के छात्रों ने भाषा और गणित के विषय में राष्ट्रीय औसत को पीछे छोड़ दिया है. इसके साथ ही सरकार ने राज्य के 32,400 से ज्यादा परिषदीय स्कूलों को निपुण विद्यालय के रूप में विकास किया है.

32 हजार से ज्यादा निपुण विद्यालय

प्रदेश में 32,400 से अधिक परिषद विद्यालयों को निपुण विद्यालयों के रूप में विकसित किया गया है. इन स्कूलों में बच्चों की शुरुआती पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए जरूरी संसाधनों और पढ़ाने के नए तरीकों पर काम किया गया है.

स्कूलों में बढ़ीं डिजिटल सुविधाएं

राज्य के 31,878 स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम की सुविधा उपलब्ध कराई गई है. इसके अलावा 14,988 स्कूलों में आईसीटी लैब बनाई गई हैं और 1,129 स्कूलों को डिजिटल लाइब्रेरी से जोड़ा गया है. इन सुविधाओं का उद्देश्य बच्चों को आधुनिक तरीके से पढ़ाई का अवसर देना है.

शिक्षकों को मिले टैबलेट

डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के 2,61,530 शिक्षकों को टैबलेट दिए गए हैं. इससे शिक्षकों को पढ़ाई के दौरान डिजिटल संसाधनों का इस्तेमाल करने में मदद मिल रही है.

राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन

'ASER' रिपोर्ट और 'PARAKH राष्ट्रीय सर्वेक्षण-2024' के अनुसार उत्तर प्रदेश में कक्षा 3 के छात्रों ने भाषा और गणित के विषय में राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन किया है. यह शुरुआती शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में राज्य के प्रयासों का अच्छा परिणाम माना जा रहा है.

निपुण भारत मिशन का मुख्य उद्देश्य

निपुण का पूरा नाम 'नेशनल इनिशिएटिव फॉर प्रोफिशिएंसी इन रीडिंग विद अंडरस्टैंडिंग एंड न्यूमरेसी' है. इसे भारत सरकार ने नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत शुरू किया था. इसका सबसे बड़ा लक्ष्य है कि कक्षा 3 तक के सभी बच्चों को बुनियादी भाषा (पढ़ना और समझना) और गणित का अच्छा ज्ञान मिले. इस योजना के तहत बच्चों को चीजें रटाने के बजाय उन्हें अच्छे से समझाने पर जोर दिया जाता है. जानकारी के मुताबिक अगर बच्चे शुरुआत में ही पढ़ना और गणित लगाना सीख लेते हैं, तो उन्हें आगे की कक्षाओं में पढ़ाई करने के दौरान परेशानी नहीं होती है.

सीखने के तरीके में बदलाव

उत्तर प्रदेश में निपुण भारत मिशन के तहत पढ़ाई के तरीके में कई बदलाव किए गए हैं. अब केवल सिलेबस खत्म करने पर नहीं, बल्कि इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है कि बच्चा वास्तव में क्या सीख रहा है. इसके लिए सीखने के तय लक्ष्य बनाए गए हैं और बच्चों की प्रगति पर लगातार नजर रखी जाती है.

खेल-खेल में हो रही पढ़ाई

स्कूलों में पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए खेल, कहानी, समूह गतिविधियां और हाथों से किए जाने वाले अभ्यास को बढ़ावा दिया जाता है. इससे बच्चों की पढ़ाई में रुचि बढ़ती है और वे विषयों को बेहतर तरीके से समझते हैं.

शिक्षकों की ट्रेनिंग और लगातार जांच

बच्चों की पढ़ाई का स्तर जांचने के लिए समय-समय पर टेस्ट लिए जाते हैं. इससे बच्चों की कमियाँ जल्दी पहचानकर दूर की जाती हैं. इसके साथ ही, पढ़ाई की गुणवत्ता और जिम्मेदारी को बेहतर बनाए रखने के लिए जिले और ब्लॉक स्तर पर स्कूलों की जांच भी की जाती हैं.