मेरठ के चर्चित ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर जारी विवाद के बीच अब एक नया घटनाक्रम सामने आया है. प्रदर्शनकारियों को थप्पड़ मारने के बाद मेरठ के SSP अविनाश पांडे के CUG नंबर पर आई एक कथित फोन कॉल का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वायरल ऑडियो में कॉल करने वाला खुद को अधिवक्ता नरेंद्र चौधरी बताते हुए SSP से अकेले मुलाकात कराने की बात कहता सुनाई देता है. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.
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थप्पड़ विवाद के बाद वायरल हुआ कथित कॉल ऑडियो
मेरठ में दलित छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर प्रदर्शन के दौरान SSP अविनाश पांडे ने प्रदर्शनकारियों को थप्पड़ मार दिए थे. इस दौरान कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें SSP भीड़ के बीच लोगों को थप्पड़ मारते दिखाई दिए. इसके बाद एक और वीडियो सामने आया, जिसमें पुलिस की प्रिजनर्स वैन में हिरासत में लिए गए रवि गौतम को थप्पड़ मारते हुए SSP दिखाई देते हैं. इन वीडियो के वायरल होने के बाद विपक्ष ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए. इसी बीच अब SSP के CUG नंबर पर आई एक कथित फोन कॉल का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है.
कॉलर ने क्या कहा?
वायरल ऑडियो के मुताबिक कॉल करने वाले ने खुद को अधिवक्ता नरेंद्र चौधरी बताया. उसने SSP के पीआरओ इंस्पेक्टर रमाकांत पचौरी से बात करते हुए कहा कि उसकी SSP अविनाश पांडे से अकेले में मुलाकात कराई जाए. बातचीत के दौरान कॉलर कथित तौर पर कहता है कि उसे SSP के साथ उसी तरह गाड़ी में बंद कर दिया जाए, जैसे वायरल वीडियो में दिखाई दिया था. इस पर पीआरओ ने उससे पूछा कि क्या वह धमकी दे रहा है. जवाब में कॉलर ने कहा कि वह सिर्फ यह सवाल उठा रहा है कि एक वकील को थप्पड़ कैसे मारा गया.
ऑडियो वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हलचल
इस कॉल के बाद पुलिस अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी गई. कॉल करने वाले की पहचान के लिए सर्विलांस और साइबर सेल को लगाया गया है. पुलिस का कहना है कि कथित धमकी भरी कॉल की जांच की जा रही है.
पुलिस ने क्या कहा?
मामले पर पुलिस का कहना है कि ललिता गौतम हत्याकांड में पहले ही मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. पुलिस के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और इंटरनेट रिकॉर्ड के आधार पर मामले का खुलासा किया गया था. जांच की जिम्मेदारी क्षेत्राधिकारी ब्रह्मपुरी को दी गई थी और परिजनों को जांच की प्रगति की जानकारी भी दी गई थी. पुलिस का यह भी कहना है कि जांच के दौरान दो लोगों के नाम पुलिस ने अपने स्तर से बढ़ाए थे.
'कुछ अराजक तत्व परिवार को उकसा रहे थे'
पुलिस के मुताबिक, कुछ अराजक तत्व परिवार को उकसा रहे थे और उन्हें विभिन्न प्रकार के प्रलोभन दिए जा रहे थे. पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने कमिश्नरी पार्क में ज्ञापन देने की योजना बनाई थी, जिसकी अनुमति दी गई थी. पुलिस के अनुसार, मौके पर ADM City, SP Rural, SP Traffic और अन्य अधिकारी मौजूद थे. अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन कुछ लोगों ने कलेक्ट्रेट गेट के सामने सड़क जाम कर दी.
पुलिस ने दावा किया कि इनमें कुछ ऐसे लोग भी शामिल थे जो जनपद के बाहर के थे. पुलिस के मुताबिक, एक व्यक्ति दिग्विजय सिंह भाटी अमरोहा से जिला बदर है, जबकि एक अन्य व्यक्ति पर पहले राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई हो चुकी है. पुलिस का यह भी दावा है कि कुछ नाबालिग लड़कों को बहला-फुसलाकर प्रदर्शन में बुलाया गया था.
'न्यूनतम बल प्रयोग किया गया'
पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को कई बार समझाने के बावजूद जब सड़क जाम नहीं हटाया गया, तब आवश्यक न्यूनतम बल प्रयोग कर उन्हें वहां से हटाया गया. पुलिस के मुताबिक, वीडियो साक्ष्यों और सोशल मीडिया विश्लेषण के आधार पर जिन लोगों की भूमिका सामने आई है, उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा रहा है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है.
गांव में सुरक्षा बढ़ाई गई
इस पूरे घटनाक्रम के बाद मेरठ पुलिस हाई अलर्ट पर है. ललिता गौतम के गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. गांव में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है और मीडिया व राजनीतिक दलों के नेताओं की एंट्री भी प्रतिबंधित बताई जा रही है.
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
ललिता गौतम हत्याकांड और प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. सपी चीफ अखिलेश यादव से लेकर नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद तक ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं.
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