आगरा में पूर्व एआरटीओ ललित कुमार के घर विजिलेंस की छापेमारी के बाद सामने आईं तस्वीरें और शुरुआती जांच से जुड़े दावे पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बने हुए हैं. जांच एजेंसियों का दावा है कि तलाशी के दौरान घर के अलग-अलग हिस्सों से नकदी, सोना, आभूषण, निवेश से जुड़े दस्तावेज और कई संपत्तियों के रिकॉर्ड मिले. सूत्रों के अनुसार, घर के बेड, सोफे, फॉल्स सीलिंग, दीवारों और अन्य जगहों को इस तरह तैयार किया गया था कि उन्हें सामान्य नजर से पहचान पाना मुश्किल था. अब विजिलेंस सिर्फ बरामदगी ही नहीं, बल्कि कथित संपत्ति के स्रोत और उससे जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है.
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कैसे शुरू हुई कार्रवाई?
विजिलेंस अधिकारियों के मुताबिक, पूर्व एआरटीओ ललित कुमार के खिलाफ लंबे समय से आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायतें मिल रही थीं. पहले शिकायतों का गोपनीय सत्यापन किया गया. प्रारंभिक जांच में आरोपों के समर्थन में सामग्री मिलने के बाद विशेष अदालत से सर्च वारंट लिया गया और फिर एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी शुरू की गई.
शुरुआत में जांच सामान्य तलाशी की तरह चल रही थी, लेकिन जल्द ही अधिकारियों को संदेह हुआ कि घर में कई ऐसी संरचनाएं बनाई गई हैं जिनका सामान्य उपयोग नहीं है.
बेड, सोफा, फॉल्स सीलिंग और दीवारों में बने थे कथित सीक्रेट कम्पार्टमेंट
जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि तलाशी के दौरान घर में कई जगह विशेष रूप से बनाए गए छिपे हुए खांचे मिले. इनमें बेड के भीतर बने कम्पार्टमेंट, सोफे के अंदर छिपे बॉक्स, फॉल्स सीलिंग में बंद चेंबर, दीवारों के भीतर सीक्रेट लॉकर और स्टोर रूम में बनाई गई अलग कैविटी शामिल हैं.
सूत्रों के अनुसार, जैसे-जैसे इन स्थानों को खोला गया, वहां से कथित तौर पर नकदी, सोना और दस्तावेज बरामद होते गए. जांच अधिकारियों का कहना है कि सामान्य तौर पर इन छिपी हुई जगहों का पता लगाना लगभग असंभव था.
दीवारों पर हथौड़े चले तो जांच में आया बड़ा मोड़
जांच के दौरान टीम को कुछ दीवारों की मोटाई और निर्माण को लेकर संदेह हुआ. सूत्रों के अनुसार, जब दीवारों की परतें हटाई गईं तो उनके भीतर बने गुप्त कम्पार्टमेंट सामने आए.
बताया जा रहा है कि इन्हीं स्थानों से बड़ी मात्रा में सोना, नकदी और महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले. जांच एजेंसियां इसे सबसे अहम बरामदगी मान रही हैं क्योंकि इससे कथित तौर पर संपत्ति छिपाने के सुनियोजित तरीके का संकेत मिलता है.
करीब 13 किलो सोना मिलने का दावा, अब जांच का फोकस उसका स्रोत
विजिलेंस की कार्रवाई में करीब 13 किलोग्राम सोना मिलने का दावा किया गया है. मौजूदा बाजार कीमत के हिसाब से इसकी कीमत कई करोड़ रुपये आंकी जा रही है.
हालांकि जांच एजेंसियां सिर्फ इसकी कीमत नहीं जोड़ रही हैं. अब यह पता लगाया जा रहा है कि यह सोना कब खरीदा गया, भुगतान किस खाते से हुआ, खरीद के दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं और क्या यह घोषित आय से मेल खाता है.
1.62 करोड़ रुपये नकद... हर पैकेट की अलग जांच
सूत्रों के अनुसार, 1.62 करोड़ रुपये की नकदी एक जगह नहीं बल्कि अलग-अलग कमरों, अलमारियों और गुप्त स्थानों से पैकेटों में बंद मिली.
अब हर पैकेट की अलग-अलग लिस्टिंग की जा रही है. यदि किसी पैकेट पर बैंक, तारीख या अन्य पहचान संबंधी निशान मिलते हैं तो वे जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं.
पासवर्ड भूलने का दावा, डिजिटल तिजोरी खुलने में लगा समय
छापेमारी के दौरान जांच टीम के सामने एक डिजिटल तिजोरी भी आई. सूत्रों के मुताबिक अधिकारियों ने उसका पासवर्ड मांगा तो ललित कुमार ने कथित तौर पर कहा कि उन्हें पासवर्ड याद नहीं है.
इस कारण कुछ समय के लिए कार्रवाई प्रभावित हुई. बाद में तकनीकी विशेषज्ञ बुलाए गए और काफी प्रयास के बाद तिजोरी खोली गई. उसके भीतर भी दस्तावेज और अन्य सामग्री मिलने की बात सामने आई है.
वित्तीय दस्तावेजों की होगी गहन जांच
विजिलेंस अधिकारियों का मानना है कि जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा नकदी नहीं बल्कि वित्तीय दस्तावेज हैं.
तलाशी के दौरान मिले म्यूचुअल फंड निवेश, फिक्स्ड डिपॉजिट, बैंक निवेश, संपत्तियों की रजिस्ट्रियां और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड का अब आयकर विभाग, बैंक खातों और अन्य एजेंसियों के रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा.
लखनऊ, आगरा और नोएडा तक फैली संपत्तियों की जांच
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि ललित कुमार और उनके परिवार के नाम पर लखनऊ, आगरा और नोएडा में कई जमीन, मकान और प्लॉट हैं.
अब जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि इन संपत्तियों की खरीद के समय घोषित आय कितनी थी और भुगतान किस माध्यम से किया गया.
क्या अकेले संभव था इतना बड़ा नेटवर्क?
जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो क्या इतने बड़े स्तर पर कथित संपत्ति जुटाने और उसे छिपाने का काम अकेले संभव था?
इसी वजह से अब बिचौलियों, कथित सहयोगियों और विभाग से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है.
फॉरेंसिक और बैंक रिकॉर्ड से मिलेगी आगे की दिशा
बरामद दस्तावेजों को फॉरेंसिक और वित्तीय जांच के लिए भेजा जा रहा है. जांच एजेंसियां बैंक ट्रांजैक्शन, निवेश, संपत्ति खरीद और डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान करेंगी. इसी के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई का दायरा तय किया जाएगा.
अब जांच का सबसे बड़ा सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कितना सोना और कितना कैश मिला. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित तौर पर यह संपत्ति वर्षों तक छिपी कैसे रही? क्या घर को पहले से ही गुप्त लॉकरों को ध्यान में रखकर तैयार कराया गया था? क्या इसमें और लोग भी शामिल थे? या फिर इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था? इन सभी सवालों के जवाब अब विजिलेंस की वित्तीय और फॉरेंसिक जांच के बाद ही सामने आएंगे.
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