Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे की चोरी का मामला दिन प्रतिदिन गहराता जा रहा है. जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसमें हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. पुलिस और जांच एजेंसियों की तफ्तीश में अब यह बात सामने आई है कि चोरी की गई रकम को सिर्फ ऐश-ओ-आराम पर खर्च नहीं किया गया बल्कि इसे पूरी योजना से बढ़ाने की कोशिश भी की गई थी. आरोपियों ने इस पैसे को शेयर बाजार (स्टॉक मार्केट) में लगाने, लोगों को सूद पर देने और जमीन खरीदने में इस्तेमाल किया था. फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे वित्तीय नेटवर्क की एक-एक कड़ी को बारीकी से जोड़ने में जुटी हुई हैं.
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पैसे को कई गुना बढ़ाने के लिए किया निवेश
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मामले के मुख्य आरोपी अनुकल्प मिश्रा और उसके साथी अविनाश ने पूछताछ में यह स्वीकार किया है कि उन्होंने चढ़ावे से चुराई गई रकम का एक बड़ा हिस्सा शेयर बाजार में इन्वेस्ट किया था. इसके अलावा अतिरिक्त कमाई के लालच में इस पैसे को मोटी ब्याज दरों पर बाजार में भी चलाया गया. हालांकि पुलिस केवल इन बयानों पर निर्भर नहीं है. अधिकारी अब आरोपियों के डीमैट खातों, बैंक ट्रांजैक्शंस और निवेश से जुड़े दस्तावेजों की गहनता से पड़ताल कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि जब तक सारे वित्तीय कागजात का मिलान नहीं हो जाता तब तक किसी अंतिम नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता.
रिश्तेदारों के बैंक खातों का हुआ इस्तेमाल
इस पूरे खेल में खुद को बचाने के लिए आरोपियों ने सीधे अपने खातों में पैसे नहीं मंगाए. जांच में जो 'मनी ट्रेल' (पैसों के लेन-देन का रास्ता) सामने आया है, उसके अनुसार आरोपियों ने सबसे पहले चोरी की रकम को अपने रिश्तेदारों और बेहद करीबी लोगों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया. इसके बाद अलग-अलग समय पर उन खातों से पैसे वापस अपने पर्सनल खातों में मंगवाए. जांच एजेंसियों का मानना है कि ऐसा जानबूझकर पैसों के असली सोर्स को छिपाने के लिए किया गया था. इस संदिग्ध हेरफेर को देखते हुए अब तक 30 बैंक खातों को फ्रीज किया जा चुका है. इन खातों में खाताधारकों की कमाई से कई गुना ज्यादा का लेन-देन पाया गया है, जिसकी वजह से अब इनके इनकम टैक्स रिकॉर्ड और बैंक स्टेटमेंट्स की स्क्रूटनी की जा रही है.
घरों की तलाशी में मिली नकदी, जेवर और जमीन के कागजात
जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस टीम मुख्य आरोपी अनुकल्प मिश्रा को लेकर उसके घर पहुंची जहां उसके परिजनों से लंबी पूछताछ की गई और घर खंगाला गया. इससे पहले अन्य सह-आरोपियों लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय के ठिकानों पर भी छापेमारी की जा चुकी है. इन तलाशियों के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में कैश, सोने के गहने और एक कार बरामद हुई है. हालांकि किस आरोपी के पास से कितनी संपत्ति मिली, इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है. अनुकल्प के घर से करीब एक एकड़ जमीन के दस्तावेज भी मिले हैं, जिसे कागजों पर 6.7 लाख रुपये में खरीदा दिखाया गया है. वर्तमान में इस जमीन की बाजार कीमत करोड़ों में बताई जा रही है, इसलिए जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि इस जमीन को खरीदने के लिए पैसा कहां से आया था.
कैसे खुला यह पूरा मामला?
इस पूरे विवाद की शुरुआत जून के पहले हफ्ते में हुई थी जब राम मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी और चोरी की लिखित शिकायत सामने आई. मामले की गंभीरता को देखते हुए श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सिफारिश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने तुरंत एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया. एसआईटी की शुरुआती जांच में गबन के पुख्ता सबूत मिलने के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और चढ़ावे की गिनती के काम से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद ही पूछताछ में इस बड़े वित्तीय रैकेट का भंडाफोड़ हुआ.
वीआईपी पास सिस्टम में भी सेंधमारी
जांच के दायरे में अब केवल पैसों की चोरी ही नहीं बल्कि मंदिर के पास जारी करने की व्यवस्था भी आ गई है. सूत्रों के मुताबिक एक अन्य आरोपी टिन्नू यादव ने पास जारी करने वाले सिस्टम का गलत फायदा उठाया और अवैध रूप से बड़ी संख्या में पास जारी किए. अब तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर इस बात की जांच हो रही है कि आखिर इस सिस्टम में कहां चूक हुई ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ी को दोबारा होने से रोका जा सके.
ट्रस्ट ने प्रशासनिक स्तर पर किए बड़े बदलाव
इस बड़ी चूक के बाद श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव करने शुरू कर दिए हैं. इसके तहत ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास की शक्तियों को बढ़ा दिया गया है. उनके नाम से एक नई डिजिटल आईडी तैयार की गई है, जिसके जरिए अब श्रद्धालुओं के वीआईपी पास जारी किए जाएंगे. वहीं, दूसरी ओर चंपत राय और अनिल मिश्रा की पुरानी डिजिटल आईडी को तत्काल प्रभाव से ब्लॉक (निष्क्रिय) कर दिया गया है. ट्रस्ट का मानना है कि इस नई व्यवस्था से पास जारी करने की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनेगी.
22 जुलाई की बैठक में बदल सकते हैं कई नियम
सूत्रों से संकेत मिले हैं कि आने वाली 22 जुलाई को राम मंदिर ट्रस्ट की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है, जिसमें कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं. इस बैठक में चढ़ावे के प्रबंधन को पूरी तरह पारदर्शी बनाने, श्रद्धालुओं के दर्शन की व्यवस्था को सुगम करने, पूजा-पद्धति को पारंपरिक रामानंदीय परंपरा के अनुसार ढालने, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को हाई-टेक बनाने जैसी योजनाओं पर मुहर लग सकती है. इसके साथ ही ट्रस्ट में जो पद खाली पड़े हैं, उन्हें भरने पर भी विचार किया जाएगा.
जांच एजेंसियों के सामने खड़े बड़े सवाल
फिलहाल इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों के सामने कुछ बुनियादी और बड़े सवाल खड़े हैं. अधिकारी मुख्य रूप से यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर मंदिर के चढ़ावे से कुल कितनी रकम चोरी की गई थी? इस रकम का कितना हिस्सा बैंकों के जरिए घुमाया गया और कितना पैसा शेयर बाजार या जमीनों में लगा है? इसके अलावा सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस पूरे घोटाले में पकड़े गए आरोपियों के अलावा कुछ और बड़े चेहरे या सफेदपोश लोग भी शामिल हैं? जांच दल इन सभी सवालों के जवाब ढूंढने के लिए लगातार कड़ियां जोड़ रहा है.
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