Akash Anand Poster: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के भीतर इन दिनों काफी उथल-पुथल मचा हुआ है. मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को अपरिपक्व बताकर पार्टी के सभी अहम पदों से हटा दिया है. पदों से हटाए जाने के बाद अब आकाश का राजनीतिक भविष्य भी खतरे में दिख रहा है. पूर्वांचल के आजमगढ़ जिले से एक ऐसा पोस्टर सामने आया है, जिसमें आकाश आनंद की फोटो को बड़े सफाई से हटाया गया है. ये पोस्टर सगड़ी विधानसभा सीट से बसपा प्रत्याशी शंकर यादव की एक रैली में लगाए गए थे. अब इस घटना के बाद सियासी गलियारों में फिर से ये बहस छिड़ की है कि क्या आकाश आनंद को जमीन पर भी पूरी तरह से किनारे किया जा रहा है.
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पोस्टर से कटी आकाश की तस्वीर
आजमगढ़ की सगड़ी विधानसभा सीट पर बसपा प्रत्याशी शंकर यादव के समर्थन में बड़े पोस्टर लगाए गए थे. इन पोस्टर पर मायावती के ठीक बगल में आकाश आनंद की तस्वीर भी लगी हुई थी. लेकिन, पार्टी से साइडलाइन किए जाने के बाद इन पोस्टरों से आकाश आनंद की तस्वीर को बड़ी सफाई से काटकर हटा दिया गया है.
प्रत्याशी शंकर यादव बताई वजह
जब इस कटे हुए पोस्टर को लेकर प्रत्याशी शंकर यादव से सवाल किया गया, तो उन्होंने बहुत ही अजीब जवाब दिया है. शंकर यादव का कहना है कि 'बड़े पोस्टर तेज हवा की वजह से फट जाते हैं. हवा आसानी से आर-पार हो सके, इसलिए पोस्टर को बीच से काटा गया था ताकि वह हवा में फटे नहीं.' उन्होंने यह भी कहा कि अगर पोस्टर को काटा नहीं जाता है, तो लोग इसे उखाड़कर अपने घर ले जाते हैं.
सोशल मीडिया के बायो में बदलाव
मायावती के सख्त रुख और फटकार के बाद आकाश आनंद भी बैकफुट पर हैं. पदों से हटाए जाने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपने बायो में बदलाव किया है. उन्होंने खुद को 'बसपा कार्यकर्ता' की जगह हटाकर सिर्फ एक 'सपोर्टर' लिख दिया है. इससे यह संदेश जा रहा है कि वह फिलहाल खुद को पार्टी के मुख्य ढांचे से बाहर मानकर चल रहे हैं.
मायावती ने रखी ये बड़ी शर्त
इन तमाम चर्चाओं के बीच मायावती ने एक और शर्त रखी है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि अगर आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लेते हैं, तभी आकाश आनंद का बसपा के अंदर भविष्य को लेकर कोई विचार किया जा सकता है. इस शर्त ने आकाश आनंद की पार्टी में वापसी को और भी मुश्किल बना दिया है.
कौन हैं सगड़ी के प्रत्याशी शंकर यादव?
सगड़ी से जिसे मायावती ने टिकट दिया है, वह इससे पहले भी तीन बार अपनी किस्मत आजमा चुके हैं. वह दो बार निर्दलीय और एक बार बसपा के टिकट से चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें हार का ही सामना करना पड़ा है. शंकर यादव पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के भी करीबी रहे है और अब एक बार फिर बसपा के हाथी पर सवार हो गए हैं. उनका दावा है कि इस बार उन्हें दलित, यादव, निषाद, चौहान और ब्राह्मण सहित सर्व समाज का पूरा समर्थन मिल रहा है.
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