सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में 5वीं गिरफ्तारी, कासगंज से दिल्ली लाकर पूछताछ के बाद लेबर कांट्रेक्टर सनोज को किया गया अरेस्ट

यूपी तक

09 Sep 2026 (अपडेटेड: 09 Sep 2026, 10:51 AM)

दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे की जांच में पुलिस ने एक और बड़ी कार्रवाई की है. इमारत गिरने के मामले में पांचवीं गिरफ्तारी हुई है. पुलिस ने यूपी के कासगंज से लेबर कांट्रेक्टर सनोज को हिरासत में लिया था. उसे दि

Satya Niketan Building Collapse

Satya Niketan Building Collapse

Google CTA

Labour Contractor Sanoj Arrest: दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे की जांच में पुलिस ने एक और बड़ी कार्रवाई की है. इमारत गिरने के मामले में पांचवीं गिरफ्तारी हुई है. पुलिस ने यूपी के कासगंज से लेबर कांट्रेक्टर सनोज को हिरासत में लिया था. उसे दिल्ली लाकर पूछताछ की गई, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. इस कार्रवाई के साथ ही हादसे की जांच अब बिल्डिंग मालिक और उसके परिवार से आगे बढ़कर निर्माण से जुड़े लोगों तक पहुंच गई है.

यह भी पढ़ें...

कासगंज से हिरासत में लिया गया था सनोज

पुलिस के मुताबिक, लेबर कांट्रेक्टर सनोज को उत्तर प्रदेश के कासगंज से हिरासत में लिया गया था. इसके बाद उसे दिल्ली लाया गया, जहां जांच अधिकारियों ने उससे हादसे और इमारत में हुए निर्माण से जुड़ी जानकारी को लेकर पूछताछ की. पूछताछ के बाद उसकी गिरफ्तारी की गई है. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इमारत में अतिरिक्त मंजिलों के निर्माण के दौरान उसकी क्या भूमिका थी और किन लोगों के निर्देश पर काम कराया गया था.

हादसे में अब तक पांच गिरफ्तारियां

सनोज की गिरफ्तारी के साथ ही सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में गिरफ्तारियों की संख्या पांच हो गई है. इससे पहले पुलिस ने बिल्डिंग मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया था. हरिराम को राजस्थान के भिवाड़ी से पकड़ा गया था. पुलिस के मुताबिक, हरिराम के नाम पर बिजली कनेक्शन था, जबकि बेटा महेश बिल्डिंग का मैनेजमेंट देखता था और प्रॉपर्टी कागजों में उर्मिला के नाम थी. इसके अलावा मामले में दो अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है.

पुरानी इमारत पर बढ़ाया गया था कथित लोड

पुलिस की FIR में हादसे को लेकर पहले ही कई गंभीर बातें सामने आ चुकी हैं. जांच के मुताबिक, सत्य निकेतन की पुरानी इमारत के ऊपर कथित तौर पर चार अतिरिक्त मंजिलें बनवाई गई थीं. आरोप है कि ज्यादा किराया कमाने के लिए यह निर्माण कराया गया, जबकि बिल्डिंग की क्षमता को लेकर मालिक को पहले से जानकारी थी.

FIR में पुलिस ने दावा किया है कि इमारत ज्यादा भार सहने की स्थिति में नहीं थी. इसके बावजूद ऊपरी मंजिलों का निर्माण कराया गया. अब लेबर कांट्रेक्टर सनोज की गिरफ्तारी के बाद पुलिस यह भी जांच करेगी कि इन मंजिलों के निर्माण में उसकी क्या भूमिका रही और निर्माण का काम किस तरीके से कराया गया था.

HostelDaze नाम से चल रहा था PG

हादसे के समय इमारत में HostelDaze नाम से PG चल रहा था. ग्राउंड फ्लोर के अलावा बिल्डिंग में चार मंजिलें थीं और यहां बड़ी संख्या में छात्र और अन्य लोग रह रहे थे. 6 सितंबर को अचानक इमारत भरभराकर गिर गई और कई लोग मलबे में दब गए. रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कुल 12 लोगों को बाहर निकाला गया था. इनमें 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 5 लोग घायल हुए. मृतकों में कई छात्र भी शामिल थे. घायलों को AIIMS ट्रॉमा सेंटर और सफदरजंग अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था.

गैर इरादतन हत्या की धाराएं

बिल्डिंग गिरने के मामले में दक्षिण कैंपस थाने में FIR दर्ज की गई थी. यह FIR FIR नंबर 153/2026 के तहत दर्ज हुई और इसमें BNS की धारा 105, 290 और 125(a) लगाई गई हैं. पुलिस ने प्रथम दृष्टया इमारत के निर्माण और उसकी सुरक्षा में गंभीर लापरवाही की आशंका जताई है. अब लेबर कांट्रेक्टर की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि पुरानी इमारत पर अतिरिक्त मंजिलें बनाने की पूरी प्रक्रिया क्या थी, निर्माण में कौन-कौन लोग शामिल थे और हादसे से पहले बिल्डिंग की सुरक्षा को लेकर क्या स्थिति थी.

अब निर्माण से जुड़े लोगों की भूमिका पर जांच

सत्य निकेतन हादसे में लगातार हो रही गिरफ्तारियों से साफ है कि पुलिस सिर्फ संपत्ति के मालिकों की भूमिका तक जांच सीमित नहीं रख रही है. अब निर्माण और लेबर व्यवस्था से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा रही है. लेबर कांट्रेक्टर सनोज से पूछताछ के आधार पर पुलिस को निर्माण से जुड़े दूसरे लोगों के बारे में भी जानकारी मिलने की उम्मीद है. मामले की जांच दक्षिण कैंपस थाने के इंस्पेक्टर नरेंद्र कुमार कर रहे हैं. पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब इमारत अतिरिक्त भार सहने की स्थिति में नहीं थी, तो उस पर चार मंजिलों का निर्माण कैसे हुआ और इस पूरे निर्माण में किन-किन लोगों की भूमिका थी.