नीरज चोपड़ा को पछाड़कर भारत के नंबर-1 जेवलिन थ्रोअर बने 'रोहित यादव', उधार लेकर खरीदी थी जेवलिन, कहानी जानकर हो जाएंगे भावुक

आदित्य भारद्वाज

• 06:56 PM • 02 Jul 2026

Rohit Yadav Javelin Thrower: रोहित यादव 25 साल की उम्र में नीरज चोपड़ा को पीछे छोड़ते हुए भारत के नंबर वन जेवलिन थ्रोअर बन गए हैं. 28 जून को भुवनेश्वर के कलिंगा में आयोजित 65वीं नेशनल इंटर स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 87.05 मीटर दूर जेवलिन फेंकर उन्होंने यह बड़ा मुकाम हासिल किया है.

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Rohit Yadav Javelin Thrower: महज 14 साल की उम्र में लकड़ी की जेवलिन से प्रैक्टिस शुरू करने वाले रोहित यादव ने आज इतिहास रच दिया है. 25 साल की उम्र में रोहित ने नीरज चोपड़ा को पीछे छोड़ते हुए भारत के नंबर वन जेवलिन थ्रोअर का मुकाम हासिल कर लिया है. इसके साथ ही वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दूसरे नंबर पर आ गए हैं. रोहित ने यह ऐतिहासिक सफलता भुवनेश्वर के कलिंगा में आयोजित एक प्रतियोगिता में हासिल की है और जापान में होने वाले 20वें एशियाई खेलों के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है. उनके पिता का सपना है कि बेटा अब देश के लिए ओलंपिक में मेडल भी जीते.

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देसी जुगाड़ से कराई थी तैयारी

भारत का टॉप जेवलिन थ्रोअर बनने का रोहित का सफर बहुत मुश्किलों भरा रहा है. वह बेहद गरीब परिवार से आते हैं. जब संसाधन नहीं थे, तो उनके पिता सभाजीत यादव ने सीमेंट के पत्थर और पटिया से ही घर पर एक देसी जिम बना दिया था. इसी जिम में वह सुबह-शाम रोहित को ट्रेनिंग कराते थे. जेवलिन बहुत महंगी आती थी, इसलिए पिता ने लकड़ी की जेवलिन बनाकर रोहित की प्रैक्टिस शुरू कराई थी.

खेत को बना दिया था स्टेडियम

गांव के आस-पास कोई स्टेडियम नहीं था, लेकिन पिता ने हार नहीं मानी. उन्होंने घर के पास वाले एक खेत को ही स्टेडियम में बदल दिया. जेवलिन फेंकने के लिए मिट्टी और कीचड़ वाले रास्ते को ट्रैक की तरह इस्तेमाल किया गया. पिता ने एक पेड़ पर चद्दर की कई परतें टांग दीं और उस पर निशाना लगाकर रोहित को बेसिक ट्रेनिंग दी. कड़े अभ्यास का ही यह नतीजा रहा है कि रोहित बहुत कम समय में ही देश के नंबर वन जेवलिन थ्रोअर बन गए.

स्कूल नेशनल गेम्स से शुरू सफर

रोहित यादव के जेवलिन थ्रो के सफर की शुरुआत स्कूल नेशनल गेम्स से हुई थी. पिता की देसी ट्रेनिंग का ही असर था कि रोहित ने बहुत कम समय में अपनी एक अलग पहचान बना ली. नीरज चोपड़ा के ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने के बाद रोहित ने अपनी तैयारी और भी तेज कर दी. रोहित नीरज को अपना आदर्श मानते हैं. उनके पिता ने बताया कि नीरज चोपड़ा ने भी कई बार रोहित को जेवलिन की अहम तकनीक सिखाई है.

नीरज को पछाड़ नंबर वन बने

रोहित ने 28 जून को भुवनेश्वर के कलिंगा में चल रही 65वीं नेशनल इंटर स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में यह बड़ा मुकाम हासिल किया है. चैंपियनशिप के अंतिम दिन रोहित ने अपने पांचवें प्रयास में 87.05 मीटर दूर जेवलिन फेंका है. इसी शानदार प्रदर्शन के दम पर रोहित ने नेशनल रैंकिंग में नीरज चोपड़ा को पछाड़ दिया है और वह देश के नंबर वन और दुनिया के नंबर दो जेवलिन थ्रोअर बन गए हैं.

उधार लेकर खरीदी थी असली जेवलिन

रोहित के पिता सभाजीत यादव का कहना है कि, 'मेरा सपना है कि रोहित ओलंपिक में मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करे.' उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनके पास कोई सुविधा नहीं थी, लेकिन उन्हें पता था कि उनका बेटा एक दिन बड़ा नाम करेगा. इसीलिए उन्होंने उधार पैसे लेकर रोहित के लिए असली जेवलिन खरीदी थी. पिता गुरु द्रोणाचार्य की तरह रोहित को बेहद कड़ाई के साथ प्रैक्टिस कराते थे.

पिता खुद हैं 101 मेडल विजेता

रोहित के पिता सभाजीत यादव खुद एक मैराथन धावक हैं. उन्होंने 50 साल की उम्र में मैराथन दौड़ना शुरू किया था. वह मैराथन में जो प्राइज मनी जीतते थे, उसी से घर का खर्च चलता था. उन्होंने देश के कई हिस्सों में हाफ और फुल मैराथन दौड़ी है. उनके पास मैराथन दौड़ में जीते हुए कुल 101 पदक मौजूद हैं.