यूपी के बाहुबली नेता और जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के मुखिया राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह द्वारा दायर धोखाधड़ी के मामले में लखनऊ कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह समेत चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने इंस्पेक्टर हजरतगंज को आदेश दिया है कि इस मामले में अक्षय प्रताप सिंह, रोहित प्रताप सिंह, अनिल सिंह और रामदेव यादव के खिलाफ केस दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए.
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क्या है पूरा विवाद?
भानवी सिंह द्वारा दायर की गई याचिका के अनुसार, यह मामला एक साझेदारी फर्म और करोड़ों की संपत्ति से जुड़ा है. भानवी सिंह ने 10 फरवरी 2014 को एक साझेदारी फर्म बनाई थी, जिसके नाम पर करीब 5 करोड़ रुपये की संपत्तियां दर्ज थीं. आरोप है कि अक्षय प्रताप सिंह और उनके सहयोगियों ने साजिश रचकर नवंबर 2020 में फर्म का आधिकारिक पता बदलकर अपना निजी आवास दर्ज करा लिया. याचिका में कहा गया है कि फर्म के नाम पर दर्ज कीमती संपत्तियों को हड़पने के उद्देश्य से दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर हेराफेरी और जालसाजी की गई.
मामले में लंबे समय से चल रही थी कानूनी लड़ाई
फर्जी दस्तावेजों के जरिए फर्म हड़पने के इस मामले में कानूनी लड़ाई काफी समय से चल रही थी. सबसे पहले भानवी सिंह ने लखनऊ एसीजेएम कोर्ट में अर्जी दाखिल की, जिस पर एमपी-एमएलए कोर्ट ने परिवाद चलाने का आदेश दिया. भानवी सिंह ने इसके बाद निगरानी याचिका डाली ताकि मामले की सुनवाई कोर्ट की सीधी निगरानी में हो. इस आदेश के खिलाफ अक्षय प्रताप सिंह ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. हालांकि, हाई कोर्ट ने अक्षय प्रताप की याचिका को खारिज कर दिया और सेशन कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा.
अब आगे क्या?
हाईकोर्ट से अक्षय प्रताप सिंह को झटका लगने और सेशन कोर्ट के आदेश के लागू होने के बाद, अब लखनऊ की निचली अदालत ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट के ताजा आदेश के बाद हजरतगंज पुलिस एमएलसी और उनके सहयोगियों पर मुकदमा दर्ज कर जांच को आगे बढ़ाएगी.
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