Opinion: लैंडलॉक्ड यूपी का जलमार्ग इंफ्रास्ट्रक्चर, देश में नंबर वन बनने की ऐतिहासिक यात्रा

UP News: योगी सरकार के 9 साल. 'लैंडलॉक्ड' बाधा को पार कर उत्तर प्रदेश बना देश का 'लॉजिस्टिक्स गेटवे'. 11 राष्ट्रीय जलमार्गों और वाराणसी मल्टी-मॉडल टर्मिनल के दम पर निर्यात में हुई ₹1.86 लाख करोड़ की ऐतिहासिक वृद्धि.

Waterways Infrastructure, Representative pic from PIB

यूपी तक

• 05:54 PM • 20 Mar 2026

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भौगोलिक तौर पर 'लैंडलॉक्ड' होने के कारण उत्तर प्रदेश को लंबे समय तक व्यापारिक और लॉजिस्टिक्स चुनौतियों का सामना करना पड़ा. लेकिन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली 'डबल इंजन' सरकार के पिछले 9 वर्षों में, राज्य ने इस भौगोलिक बाधा को एक अवसर में बदल दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को मिशन के रूप में अपनाते हुए, उत्तर प्रदेश आज *जलमार्गों के व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर* के माध्यम से उत्तर भारत के एक प्रमुख 'लॉजिस्टिक्स गेटवे' के रूप में उभर रहा है.

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जलमार्ग इंफ्रास्ट्रक्चर: कम लागत और अधिक दक्षता का मंत्र

योगी सरकार ने परिवहन के सबसे किफायती और प्रभावी साधन के रूप में जलमार्गों को प्राथमिकता दी है. स्रोतों के अनुसार, देश के कुल 111 राष्ट्रीय जलमार्गों में से 11 अकेले उत्तर प्रदेश में स्थित हैं. इन जलमार्गों के विकास से न केवल माल ढुलाई की लागत में कमी आई है, बल्कि परिवहन का समय भी घटा है, जिससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में वृद्धि हुई है.

राष्ट्रीय जलमार्ग-1 और क्षेत्रीय विस्तार

उत्तर प्रदेश के जल परिवहन का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (वाराणसी-हल्दिया) है. इस जलमार्ग का 425 किलोमीटर का एक बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश में स्थित है. सरकार की दूरदर्शी योजना के तहत, अब इस जलमार्ग को वाराणसी से आगे बढ़ाकर अयोध्या तक विस्तारित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है. यह विस्तार न केवल अयोध्या को वैश्विक जल परिवहन मानचित्र पर लाएगा, बल्कि पवित्र शहर के सांस्कृतिक और व्यापारिक विकास को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा.

वाराणसी: देश का पहला मल्टी-मॉडल टर्मिनल

जलमार्ग इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में वाराणसी एक वैश्विक केंद्र बनकर उभरा है. वाराणसी में देश का पहला मल्टी-मॉडल टर्मिनल स्थापित किया गया है, जो सड़क, रेल और जलमार्गों के बीच एक सेतु का कार्य करता है. इसके अतिरिक्त, वाराणसी में ही 100 एकड़ में भारत का पहला फ्रेट विलेज विकसित किया गया है. यह फ्रेट विलेज माल के भंडारण, पैकेजिंग और शिपमेंट के लिए सभी आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है, जिससे स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचना सरल हो गया है.

संस्थागत सुधार और अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण

जल परिवहन की संभावनाओं को व्यवस्थित गति देने के लिए योगी सरकार ने *'उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण'* का गठन किया है. यह प्राधिकरण राज्य की नदियों में नए परिवहन मार्गों की पहचान करने और उनके किनारे आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए उत्तरदायी है. वाराणसी की तर्ज पर ही अब *रामनगर, चंदौली, मीरजापुर और गाजीपुर* में भी टर्मिनल और फ्रेट विलेज विकसित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है.

लैंडलॉक्ड राज्यों की श्रेणी में उत्तर प्रदेश का कीर्तिमान 

इन बुनियादी ढांचागत सुधारों का ही परिणाम है कि भारत सरकार द्वारा जनवरी 2026 में जारी 'एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स 2024' में उत्तर प्रदेश ने लंबी छलांग लगाई है. राज्य अब पूरे देश में निर्यात तैयारी के मामले में चौथे स्थान पर है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि'लैंडलॉक्ड' राज्यों की श्रेणी में उत्तर प्रदेश पूरे देश में प्रथम स्थान पर है. यह उपलब्धि राज्य की निर्यात क्षमता और जलमार्गों जैसे आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती को दर्शाती है.

आर्थिक प्रभाव और निर्यात में ऐतिहासिक वृद्धि

जलमार्गों और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर (जैसे ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर) के एकीकरण ने राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति दी है. वर्ष 2016-17 में राज्य का निर्यात जो मात्र ₹86 हजार करोड़ था, वह वर्ष 2024-25 में बढ़कर ₹1.86 लाख करोड़ के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है. इस विकास ने निवेशकों के भरोसे को मजबूत किया है और राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के संकल्प की ओर अग्रसर किया है.

नमामि गंगे और एकीकृत विकास

जलमार्गों का विकास केवल व्यापार तक सीमित नहीं है. 'नमामि गंगे' परियोजना के तहत गंगा की निर्मलता और इसके किनारे 80 घाटों का पुनरुद्धार पर्यटन और संस्कृति को भी बढ़ावा दे रहा है. गंगा नदी के किनारे जैविक खेती और 'गंगा बायोडावर्सिटी पार्क' की स्थापना जैसे प्रयास जलमार्गों के किनारे एक नया आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रहे हैं.

कायाकल्प काल

योगी सरकार के 9 वर्षों का कार्यकाल उत्तर प्रदेश के लिए एक 'कायाकल्प' का काल रहा है. 'लैंडलॉक्ड' राज्य की सीमाएं अब इसके विकास के आड़े नहीं आतीं, क्योंकि नदियों के माध्यम से उत्तर प्रदेश अब सीधे समुद्र और वैश्विक बाजारों से जुड़ चुका है. जलमार्ग इंफ्रास्ट्रक्चर में हुए ये निवेश न केवल आज की व्यापारिक जरूरतों को पूरा कर रहे हैं, बल्कि विजन 2047 के तहत एक विकसित और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की नींव भी रख रहे हैं. 'काम दमदार-डबल इंजन सरकार' का यह विजन उत्तर प्रदेश को भारत के विकास का सबसे बड़ा आधार बना रहा है.

लेखाक: अमिताभ सत्यम. 

आईआईटी कानपुर के पुराछात्र अमिताभ सत्यम ने अमेरिका के Fisher Collge of Business से MBA की शिक्षा हासिल की है. अमेरिका में Shearson Lehman Brothers और CableVision में काम किया और भारत में IBM, Reliance, SAP और Siemens में उच्च पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं. सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर निरंतर लेखन करते हैं.

Disclaimer: यहां व्यक्त विचार लेखक की व्यक्तिगत राय हैं.