यूपी में बसने वाला है नया शहर, 37 गांवों के किसानों से ली जाएगी जमीन; इतना मिलेगा मुआवजा

आयशा शेख़

• 03:08 PM • 29 Jul 2026

दिल्ली-एनसीआर के 'नया नोएडा' प्रोजेक्ट के लिए 37 गांवों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है. किसानों को 4,300 प्रति वर्गमीटर तक मुआवजा और विकसित भूखंड का विकल्प दिया जाएगा.

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दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट और औद्योगिक क्षेत्र में हलचल मचाने आ रहे 'नया नोएडा' (दादरी नोएडा गाजियाबाद विशेष निवेश क्षेत्र - DNGIR) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. 209.11 वर्ग किलोमीटर में बसने वाले इस हाई-टेक शहर के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया मंगलवार से औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है. 

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नवनियुक्त 5 लेखपालों की टीम ने 37 चिह्नित गांवों में पहुंचकर सर्वेक्षण और राजस्व अभिलेखों के सत्यापन का काम संभाल लिया है. ये परियोजना बुलंदशहर और गौतमबुद्ध नगर जिलों के किसानों की किस्मत बदलने जा रही है. पहले चरण में शामिल 37 गांवों में से 24 गांव बुलंदशहर के हैं और 13 गांव गौतमबुद्ध नगर के हैं. 

लेखपालों की टीम खेतों की मौजूदा स्थिति, खसरा-खतौनी, मालिकाना हक और आबादी क्षेत्र का ब्योरा जुटा रही है, ताकि बिना किसी कानूनी अड़चन के किसानों से आपसी सहमति के जरिए जमीन खरीदी जा सके.

4300 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से मिलेगा मुआवजा

'नया नोएडा' को एक विश्वस्तरीय औद्योगिक, आवासीय और लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित किया जा रहा है. इतनी बड़ी योजना के लिए विशाल भू-भाग की जरूरत है, इसीलिए प्राधिकरण किसी भी विवाद से बचने के लिए रिकॉर्ड अपडेट करने में जुटा है.

जमीन का मुआवजा 4,300 रुपये प्रति वर्गमीटर निर्धारित किया गया है. इसके अलावा 3,800 रुपये प्रति वर्गमीटर के साथ 7 प्रतिशत विकसित भूखंड देने का भी विकल्प शामिल किया गया है. जमीन सिर्फ और सिर्फ किसानों की आपसी सहमति से ही ली जाएगी, जिसके लिए दो अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई हैं.

सैटेलाइट इमेज से होगी निगरानी

जमीन अधिग्रहण में अक्सर मुआवजे के लालच में रातों-रात निर्माण करने की होड़ मच जाती है, लेकिन इस बार प्राधिकरण ने सख्त रुख अपनाया है. 18 अक्टूबर 2024 के बाद किए गए किसी भी नए निर्माण को अवैध माना जाएगा. इसके लिए सैटेलाइट तस्वीरों का सहारा लिया जा रहा है.

साफ कर दिया गया है कि 18 अक्टूबर 2024 के बाद बने किसी भी ढांचे को आबादी क्षेत्र में नहीं गिना जाएगा और न ही उसका कोई मुआवजा मिलेगा. इसके अलावा, गांवों की जमीन अधिग्रहण के बाद क्षेत्र के बेहतर संपर्क के लिए ईस्टर्न पेरीफेरल बनाने का भी प्रस्ताव रखा गया है.

37 गांवों में चल रहा है सर्वे

  1. बुलंदशहर के 24 गांव: बिरोंडी फौलादपुर, बिरोंडी तेजपुर, चोला, डिमरी आदिलपुर, गोपालपुर, हृदयपुर, जोखाबाद, कैथरा, कनवरा, काड़ू, किशनुपर, लुहाकर, मुरादाबाद, नगलाबरोधा, नवादा, राजरमपुर, राजपुर खुर्द, सबदलपुर, सलेमपुर कायस्थ, सनवाली, शाहपुर कालन, सेरपुर और सिकरा.
  2. गौतमबुद्ध नगर के 13 गांव: आनंदपुर, बैरंगपुर उर्फ नई बस्ती, बील अकबरपुर, छायसा, दया नगर, गिरिराजपुर, कोट, मिलक खंडेरा, नगला कामरू, नगला न्यानसुख, नेकरामपुर उर्फ विशनुपर, फूलपुर और सैंथली.

नया नोएडा का बनना दिल्ली-एनसीआर के आर्थिक विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा. इससे न सिर्फ लाखों रोजगार पैदा होंगे बल्कि विश्वस्तरीय लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा. हालांकि, ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि किसानों को उनका हक बिना किसी प्रशासनिक चक्कर के समय पर मिले.