उत्तर प्रदेश में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के संकल्प को और गति देते हुए योगी सरकार ने जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) प्रभावित गांवों में जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए मिशन मोड में कार्य करने का खाका तैयार किया है.
ADVERTISEMENT
जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा है कि जिन प्रभावित गांवों में अभी तक नल से सप्लाई शुरू नहीं हुई है, वहां 24 घंटे तीन शिफ्टों में लगातार काम करवाकर तुरंत पानी पहुंचाया जाए.
राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन कार्यालय में आयोजित जल जीवन मिशन की समीक्षा बैठक के दौरान यह बड़ा फैसला लिया गया. सरकार का पूरा जोर इस बात पर है कि गंदे पानी से होने वाली जानलेवा बीमारियों पर जल्द से जल्द लगाम लगाई जा सके.
मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने स्पष्ट शब्दों में चेताया है कि परियोजनाओं में गुणवत्ता और समयसीमा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
24 घंटे काम और सीधे सख्त एक्शन की चेतावनी
यूपी के कई इलाके सालों से इंसेफेलाइटिस की मार झेलते रहे हैं और इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण दूषित पानी ही माना जाता है. इसी को देखते हुए जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने अधिकारियों को साफ कह दिया है कि प्रभावित गांवों तक स्वच्छ पानी पहुंचाना सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है.
जिन गांवों में अभी काम अटका है, वहां दिन-रात 24 घंटे तीन शिफ्ट में काम चलाकर जलापूर्ति शुरू की जाए. पेयजल से जुड़ी किसी भी समस्या का तुरंत समाधान किया जाए, ताकि ग्रामीणों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें. अगर किसी भी स्तर पर ढिलाई या लापरवाही मिली, तो संबंधित अधिकारी पर गाज गिरना तय है.
टूटी सड़कों की तुरंत मरम्मत का फरमान
गांवों में पाइपलाइन बिछाने के नाम पर सड़कें खोदकर छोड़ देना एक आम समस्या बन चुकी है, जिससे ग्रामीणों की जिंदगी दूभर हो जाती है. मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को नियमित गांव का दौरा करने को कहा है.
उन्होंने साफ हिदायत दी कि सिंगल विलेज योजनाओं के सभी पेंडिंग काम समय पर पूरे किए जाएं और पाइपलाइन डालने के चक्कर में जो सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, उनकी तुरंत मरम्मत करवाई जाए. इसमें देरी करने वाले अफसरों पर सीधी कार्रवाई होगी.
गांवों में लगेगी 'जल चौपाल', बनेगा 'जल अर्पण' का माहौल
सरकार सिर्फ पाइप बिछाकर शांत बैठने के मूड में नहीं है, बल्कि योजना के असर को जमीन पर जांचना भी चाहती है. अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे खुद गांवों में जाकर देखें कि साफ पानी मिलने से जलजनित बीमारियों में कितनी कमी आई है.
पारदर्शिता और जनभागीदारी बढ़ाने के लिए भी कई कदम उठाए जा रहे हैं. जिन गांवों में नल से पानी आना शुरू हो गया है, वहां 'जल अर्पण' कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.
हर जिले में नियमित रूप से 'जल चौपाल' लगाई जाएगी ताकि लोगों को पानी की बचत और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा सके. जनप्रतिनिधियों को 'जल सारथी' ऐप और प्रगति पोर्टल से जोड़ा जाएगा, जिससे योजनाओं की पल-पल की जानकारी सामने रहे.
ADVERTISEMENT











