भगवान श्रीकृष्ण पांच वक्त के नमाजी थे... कौन हैं मौलाना जरजिश अंसारी जिन्होंने दिया ये विवादित बयान?

यूपी तक

• 09:26 AM • 17 Jul 2026

Maulana Jarjish Ansari Controversy: भगवान श्रीकृष्ण पर कथित विवादित टिप्पणी के मामले में मौलाना जरजिश अंसारी के खिलाफ लखनऊ में एफआईआर दर्ज हुई है. वायरल वीडियो के बाद हिंदू संगठनों और संतों ने कड़ी कार्रवाई की मांग की है, जबकि पुलिस मामले की जांच कर रही है.

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Maulana Jarjish Ansari Controversy: सनातन धर्म की आस्था के केंद्र भगवान श्रीकृष्ण के खिलाफ अमर्यादित और भ्रामक टिप्पणी करने के मामले में मौलाना जरजिश अंसारी की मुश्किलें बढ़ गई हैं. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मौलाना के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है. विभिन्न हिंदू संगठनों और संतों द्वारा जताए गए कड़े विरोध के बाद पुलिस ने यह कानूनी कदम उठाया है. फिलहाल पुलिस वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों को ध्यान में रखकर मामले की गहराई से तफ्तीश कर रही है.

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झारखंड के मंच से दिया था विवादित बयान

सामने आए वीडियो के अनुसार यह पूरा विवाद बीते 23 जून को झारखंड में आयोजित एक मजहबी जलसे के दौरान शुरू हुआ. उत्तर प्रदेश के इटावा के रहने वाले मौलाना जरजिश अंसारी ने मंच से अपनी तकरीर के दौरान हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भगवद गीता के एक श्लोक का जिक्र किया. आरोप है कि मौलाना ने जानबूझकर उस श्लोक को मनगढ़ंत और बेहद भ्रामक तरीके से बताया. मौलाना ने दावा किया कि भगवान श्रीकृष्ण वास्तव में पांच वक्त के नमाजी थे और वे धरती पर इस्लाम धर्म का प्रचार-प्रसार करते थे. सोशल मीडिया पर यह बयान आते ही बवाल मच गया.

श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद के बीच संतों का फूटा गुस्सा 

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा पहले से ही गरमाया हुआ है. मौलाना के इस बयान के बाद ब्रज क्षेत्र के साधु-संतों में गहरा असंतोष है. श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के मुख्य पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह ने इस टिप्पणी को सनातन आस्था पर सीधा प्रहार बताया है. उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि  "इस्लाम धरम लगभग 1400 वर्ष पहले आया है, जबकि भगवान श्रीकृष्ण का कालखंड 5000 वर्ष पहले आए थे. मौलाना को गीता के श्लोकों का कोई ज्ञान नहीं है और उन्हें इस हरकत के लिए पूरे हिंदू समाज से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए."

वहीं, श्रीकृष्ण जन्म संघर्ष न्यास के प्रमुख दिनेश फलाहारी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मौलाना के पूर्वज भी सनातनी ही थे, इसके बावजूद वे ऐसी अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं. उन्होंने मौलाना को पाकिस्तान भेजे जाने की बात कही. इसके साथ ही साध्वी इंदुलेखा और अनमोल दास जी महाराज जैसे प्रमुख संतों ने भी इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.

गहरी साजिश का अंदेशा

इस मामले पर राजनीतिक गलियारों से भी तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. भारतीय जनता पार्टी के नेता मनीष शुक्ला ने मौलाना जरजिश अंसारी के बयान को करोड़ों सनातनियों की भावनाओं को आहत करने वाला बताया. उन्होंने अंदेशा जताया कि इस तरह की भ्रामक टिप्पणियां किसी बड़ी और गहरी साजिश का हिस्सा हो सकती हैं, जिसकी उच्च स्तरीय जांच बेहद जरूरी है. इसके साथ ही उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक नेताओं के ढुलमुल रवैये के कारण ही ऐसे तत्वों का मनोबल बढ़ता है जो आए दिन हिंदू देवी-देवताओं पर अपमानजनक टिप्पणियां करते रहते हैं.

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