वाराणसी रिंग रोड और NH-19 के बीच 6-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी, ₹541 करोड़ में होगा जमीन अधिग्रहण का काम

आयशा शेख़

• 10:55 AM • 16 Jul 2026

केंद्र सरकार ने वाराणसी में NH-19 को रिंग रोड से जोड़ने वाले 46.04 किलोमीटर लंबे 6-लेन ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है.

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UP Greenfield Elevated Corridor: धर्म और संस्कृति की नगरी वाराणसी में हर साल आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को जल्द ही एक बड़ी सौगात मिलने वाली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने नेशनल हाईवे-19 (NH-19) और वाराणसी रिंग रोड को जोड़ने वाले 6-लेन ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण को हरी झंडी दे दी है.

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इस प्रोजेक्ट पर सरकार कुल 14,447.64 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है, जिसे हाइब्रिड एनुइटी मॉडल के तहत तैयार किया जाएगा. यह सिर्फ एक सड़क नहीं है, बल्कि वाराणसी की ट्रैफिक व्यवस्था का कायाकल्प करने वाला एक मास्टर प्लान है, जो गंगा नदी के किनारे से होते हुए शहर को जाम से पूरी तरह मुक्ति दिलाएगा.

खर्च का लेखा-जोखा

  • कुल लागत: ₹14,447.64 करोड़
  • सिविल कंस्ट्रक्शन कॉस्ट: ₹6,037.85 करोड़ (यूटिलिटी शिफ्टिंग सहित, बिना GST)
  • जमीन अधिग्रहण लागत: ₹541.11 करोड़

1 घंटे का सफर अब सिर्फ 20 मिनट में!

इस 46.039 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर को 80 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार के लिए डिजाइन किया जा रहा है. सबसे बड़ी राहत समय की बचत को लेकर होगी।

  • सफर का समय घटा: इस कॉरिडोर के बनने के बाद प्रभावित इलाकों में जो दूरी तय करने में करीब 60 मिनट (1 घंटा) का समय लगता था, वह घटकर सिर्फ 20 मिनट रह जाएगा. यानी सीधे 67% समय की बचत.
  • काशी रेलवे स्टेशन पहुंचना आसान: NH-19 से काशी रेलवे स्टेशन जाने वाले लोगों को अब ट्रैफिक में नहीं जूझना पड़ेगा। 50 मिनट का यह सफर अब सिर्फ 25 मिनट में पूरा हो जाएगा.

काशी विश्वनाथ मंदिर और BHU जाना होगा आसान

वाराणसी में हर साल 15 करोड़ से ज्यादा पर्यटक और तीर्थयात्री आते हैं. ऐसे में शहर के अंदरूनी रास्तों पर दबाव बहुत बढ़ जाता है. यह प्रोजेक्ट वाराणसी और चंदौली के ट्रैफिक को एक नया और हाई-स्पीड रूट देगा, जिससे शहर के भीतर गाड़ियों का लोड काफी कम हो जाएगा.

इस कॉरिडोर के जरिए काशी विश्वनाथ मंदिर, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU), नमो घाट, रामनगर किला और वाराणसी के प्रसिद्ध घाटों तक पहुंचना काफी आसान हो जाएगा. यही नहीं, लंका जंक्शन पर लगने वाले भारी जाम से निपटने के लिए BHU/लंका से सामने घाट के बीच एक विशेष एलिवेटेड स्पूर भी बनाया जाएगा, जो स्थानीय और बाहरी ट्रैफिक को अलग कर देगा.

प्रोजेक्ट की इंजीनियरिंग है बेमिसाल

यह सिर्फ एक साधारण एलिवेटेड कॉरिडोर नहीं है, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग का एक बेजोड़ नमूना होने वाला है:

  • केबल स्टेड ब्रिज: गंगा नदी पर एक शानदार 910 मीटर लंबा आइकॉनिक केबल-स्टेड ब्रिज बनाया जाएगा.
  • फुट ओवर ब्रिज और ट्रैवलर: काशी विश्वनाथ मंदिर के पास पैदल यात्रियों के लिए 1.32 किमी लंबा एक्स्ट्राडोज्ड फुट ओवर ब्रिज बनेगा, जिसमें 'ट्रैवलर' (चलती हुई सीढ़ियां/वॉकवे) की सुविधा होगी.
  • आधुनिक सुविधाएं: सुरक्षा के लिए इमरजेंसी पार्किंग बे, ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए नॉइज बैरियर और कॉरिडोर को खूबसूरत बनाने के लिए आकर्षक फंसाड लाइटिंग लगाई जाएगी. इसकी वास्तुकला में काशी की सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलेगी.

मल्टीमोडल कनेक्टिविटी और बिजनेस को रफ्तार

पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत तैयार यह कॉरिडोर सिर्फ यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि व्यापार के लिए भी गेम-चेंजर साबित होगा. यह कॉरिडोर लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट, 5 प्रमुख रेलवे स्टेशनों (काशी, बनारस, वाराणसी सिटी, और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन) और रामनगर IWAI पोर्ट को आपस में जोड़ेगा. इससे लॉजिस्टिक्स खर्च कम होगा और पूरे पूर्वी उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास को एक नई रफ्तार मिलेगी.