Ram Mandir News: लखनऊ में बुधवार 15 जुलाई को आयोजित 'पंचायत आजतक उत्तर प्रदेश' कार्यक्रम में अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कई अहम मुद्दों पर संत समाज ने खुलकर अपनी राय रखी. राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले और ट्रस्ट द्वारा CEO पद के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू किए जाने के बीच संतों ने कहा कि मंदिर को किसी प्रशासनिक अधिकारी की नहीं, बल्कि 'प्रधान राम सेवक' की जरूरत है. इस दौरान मंदिर की व्यवस्था, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर भी कई संतों ने अपने-अपने विचार रखे.
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जगद्गुरु सतीशाचार्य ने क्या कहा?
कार्यक्रम के 'जो राम को लाए हैं' सत्र में निर्वाणी अखाड़े के महंत धर्मदास, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास, हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास, स्वामी करपात्री जी महाराज और जगद्गुरु सतीशाचार्य जी महाराज शामिल हुए. इस दौरान जगद्गुरु सतीशाचार्य जी महाराज ने कहा, 'हमें CEO नहीं चाहिए, हमें दास चाहिए. हमारे यहां दासत्व की परंपरा है. राम मंदिर में ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जो रामानंदी संप्रदाय से जुड़ा, शिक्षित, विद्वान और धर्म की समझ रखने वाला हो. राम यहां के रग-रग में बसते हैं और इस देश की पहचान राम की परंपरा से है.' उन्होंने कहा कि मंदिर का संचालन धार्मिक मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए.
महंत धर्मदास ने क्या कहा?
निर्वाणी अखाड़े के महंत धर्मदास ने भी CEO की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा, 'राम मंदिर में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि वहां स्वयं भगवान राम विराजमान हैं. बिना श्रद्धा के भक्ति और पूजा संभव नहीं है.' उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भरोसा जताते हुए कहा, 'योगी जी नहीं होते तो इतने लोग नहीं पकड़े जाते. हमें विश्वास है कि उनके रहते किसी के साथ अन्याय नहीं होगा.' उन्होंने यह भी कहा कि श्रद्धा और सेवा की भावना मंदिर व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत होनी चाहिए.
करपात्री जी महाराज ने क्या कहा?
स्वामी करपात्री जी महाराज ने कहा, 'राम मंदिर को CEO नहीं, प्रधान राम सेवक चाहिए और वह रामानंदी समाज से होना चाहिए.' उन्होंने कहा कि मंदिर की व्यवस्था धार्मिक परंपराओं के अनुरूप चलनी चाहिए. साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विवाद का समाधान भी आपसी सहमति और बातचीत के जरिए निकल सकता है. करपात्री जी ने कहा कि आस्था से जुड़े मामलों में धार्मिक परंपराओं का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए.
ट्रस्ट की व्यवस्था पर उठाए सवाल
महंत धर्मदास ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, 'वहां एक बिजनेस पॉइंट खोल दिया गया. जितने विवादित मंदिर थे, सब चंपत राय को दे दिए गए. मैंने 2020 में इस संबंध में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को पत्र भी भेजा था.' उन्होंने दावा किया कि साधु समाज को मंदिर की व्यवस्था से अलग कर दिया गया है और कई फैसले ऐसे हुए जिन पर समय रहते ध्यान दिया जाना चाहिए था. उन्होंने कहा कि साधु किसी राजनीतिक दल का नहीं होता और मंदिर की व्यवस्था में संत समाज की भूमिका महत्वपूर्ण होनी चाहिए.
करपात्री जी ने गोपाल राव पर लगाए आरोप
करपात्री जी महाराज ने अपने संबोधन में मंदिर आंदोलन में जान गंवाने वालों को याद किया और कुछ व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पहले उन्हें चरणामृत से व्रत तोड़ने की सलाह दी गई थी, लेकिन बाद में उन्हें जानकारी मिली कि कुछ व्यवस्थाएं बदल दी गई हैं. उन्होंने गोपाल राव पर कई आरोप लगाए और कहा, 'राम किसी पार्टी की बपौती नहीं हैं. राम पूरे समाज के हैं.' उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर की परंपराओं से जुड़े निर्णयों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए.
महंत राजू दास ने क्या कहा?
हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने कहा, 'अगर राम मंदिर की व्यवस्था अखाड़ों के हाथ में होती तो ऐसी गड़बड़ियां नहीं होतीं. संत परंपरा में ठाकुर जी की सेवा कभी व्यवसाय नहीं होती, बल्कि आस्था से की जाती है.' उन्होंने कहा कि राम मंदिर में कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. साथ ही उन्होंने नृपेंद्र मिश्रा के इस्तीफे की भी मांग की और कहा कि भगवान राम किसी एक दल या संगठन के नहीं, बल्कि पूरे देश की आस्था के केंद्र हैं.
ट्रस्ट सदस्य दिनेंद्र दास ने अपनी भूमिका बताई
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास ने ट्रस्ट में अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा, 'मुझे कोर्ट के आदेश के बाद केवल ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया है, कोई प्रशासनिक पद नहीं मिला है. तीन महीने में जब बैठक होती है, तब मैं उसमें शामिल होता हूं.' उन्होंने कहा, 'रामलला के यहां जो चोरी करेगा, उसे स्वयं रामलला दंड देंगे.' उन्होंने कहा कि ट्रस्ट अपनी प्रक्रिया के अनुसार काम कर रहा है और सभी विषयों पर समय-समय पर बैठक में चर्चा होती है.
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