Asha Bhosle Passes Away: सुरों की मल्लिका और पद्म विभूषण से सम्मानित आशा भोसले का 12 अप्रैल को निधन हो गया. चेस्ट इंफेक्शन और अत्यधिक थकान की शिकायत के बाद उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. आशा ताई के जाने से भारतीय संगीत के एक युग का पटाक्षेप हो गया है. आशा भोसले के निधन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुख व्यक्त किया.
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सीएम योगी ने कहा, "भारतीय संगीत जगत की स्वर-सम्राज्ञी, महान सुर-साधिका, 'पद्म विभूषण' आशा भोसले जी का निधन अत्यंत दुःखद एवं कला जगत की अपूरणीय क्षति है. उनकी अद्वितीय गायकी ने भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं। उनके मधुर स्वर सदैव देश वासियों के मन में गूंजते रहेंगे. प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को सद्गति और शोकाकुल परिजनों एवं प्रशंसकों को यह अपार दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें. ॐ शांति!"
40 के दशक से शुरू हुआ सुरों का सफर
आशा भोसले ने अपने करियर की शुरुआत 1940 के दशक में की थी. अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर की छत्रछाया और अपने हुनर के दम पर उन्होंने संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई. दिग्गजों के साथ काम: उन्होंने राज कपूर, बिमल रॉय जैसे निर्देशकों और ओपी नय्यर, एआर रहमान, खय्याम जैसे महान संगीतकारों के साथ कालजयी गाने दिए.
1952 की फिल्म संगदिल ने उन्हें पहली बड़ी पहचान दिलाई. उन्होंने हिंदी, मराठी, बंगाली समेत 20 से अधिक भाषाओं में गाने गाए, जिसके लिए उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ.
91 की उम्र में भी बरकरार था वही जोश
आशा ताई अपने जिंदादिल स्वभाव के लिए जानी जाती थीं. 79 साल की उम्र में उन्होंने फिल्म 'माई' (2013) से अभिनय की दुनिया में कदम रखा और अल्जाइमर मरीज की भूमिका निभाकर आलोचकों का दिल जीत लिया. 2020 में उन्होंने अपना यूट्यूब चैनल लॉन्च किया था. जनवरी 2025 में दुबई के एक कॉन्सर्ट में 91 साल की उम्र में उन्होंने विक्की कौशल के गाने तौबा-तौबा पर परफॉर्म कर सबको हैरान कर दिया था. स्टेज पर उनके वो अतरंगी स्टेप्स आज भी प्रशंसकों की यादों में ताजा हैं.
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