Monalisa Case: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले की रहने वाली वायरल गर्ल मोनालिसा एक बार फिर चर्चा में आ गई है. इस बार मोनालिसा से जुड़ा एक बड़ा सच सामने आ गया है जिसे सुनकर हर कोई हैरान है. मोनालिसा ने हाल ही में यूपी के रहने वाले एक फरमान नाम के लड़के से शादी की थी जिसके बाद से ही वो सुर्खियों में बनी हुई है. एक ओर मोनालिसा का परिवार यह दावा कर रहा था कि वह नाबालिग है. वहीं दूसरी ओर मोनालिसा फरमान के साथ अपनी खुशहाल जिंदगी बसाने का सपना देख रही थी. इस बीच राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की जांच रिपोर्ट में यह सामने आया है कि मोनालिसा नाबालिग है.ऐसे में अब कार्रवाई करते हुए फरमान के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के साथ साथ कई और गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है.
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महाकुंभ वायरल गर्ल मोनालिसा कैसे आई सुर्खियों में
मोनालिसा खरगोन जिला मुख्यालय से करीब 65 किलोमीटर दूर पर्यटन स्थल महेश्वर की रहने वाली है. महाकुंभ में वायरल हुई मोनालिसा एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है. बता दें कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग कीजांच में एक ऐसा हैरान कर देने वाला सच सामने आया, जिसे सुन सब चौंक गए. जांच में सामने आया कि मोनालिसा असल में पारधी जनजाति समुदाय की एक नाबालिग लड़की है. बता दें कि उसकी बालिग बताकर शादी करवाई गई थी.
आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के नेतृत्व में यह जांच की गई है. इस जांच में पूर्व न्यायाधीश और आयोग के सलाहकार प्रकाश उइके का मार्गदर्शन रहा है. इस संवेदनशील मामले को अधिवक्ता प्रथम दुबे ने 17 मार्च 2026 को आयोग के समक्ष उठाया था, जिसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू की गई.
सरकारी रिकॉर्ड में सामने आई असली डेट ऑफ बर्थ
जांच टीम ने केरल से लेकर मध्य प्रदेश तक कई स्थानों पर गहन पड़ताल की. बता दें कि इस जांच की शुरुआत केरल के उसी नयनार देवा मंदिर से की गई जहां मोनालिसा की शादी हुई थी. मंदिर प्रशासन ने बताया कि शादी आधार कार्ड में दर्ज आयु के आधार पर ही कराई गई थी. यही नहीं इस जांच में यह भी सामने आया कि केरल के पुअर गांव की ग्राम पंचायत में शादी का पंजीकरण किया गया था, जिसमें गलत जन्म प्रमाण पत्र का उपयोग किया गया था. यह प्रमाण पत्र मध्य प्रदेश के महेश्वर नगरपालिका से जारी किया गया था.
इसके बाद जांच दल ने महेश्वर के सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच की जिसमें पाया गया कि मोनालिसा का जन्म 30 दिसंबर 2009 को शाम 5:50 बजे हुआ था. इस आधार पर 11 मार्च 2026 को हुए शादी के समय उसकी उम्र 16 वर्ष 2 महीने और 12 दिन थी. जांच के दौरान नगरपालिका के द्वारा जारी गलत जन्म प्रमाण पत्र को निरस्त कराने के लिए भी प्रशासन को निर्देश दिए गए. प्रमाण पत्र में जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज थी.
पारधी जनजाति से संबंध की भी हुई पुष्टि
इस जांच के दौरान मोनालिसा के माता-पिता ने उनके ब्लड रिलेटिव्स के जाति प्रमाण पत्र भी आयोग को दिखाए, जिससे ये साफ हुआ कि वह पारधी जनजाति समुदाय से है और अनुसूचित जनजाति वर्ग में शामिल है. जैसे ही आयोग के सामने इस सच की पुष्टि हुई, वैसे ही इस मामले में अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) की धाराएं भी लागू कर दी गईं.
आरोपी फरमान पर कई धाराओं में हुआ केस दर्ज
बता दें कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर मध्य प्रदेश के महेश्वर थाने में आरोपी फरमान के खिलाफ पॉक्सो एक्ट, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और एट्रोसिटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है. महेश्वर थाना प्रभारी जगदीश गोयल ने बताया कि नाबालिग मोनालिसा के मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत FIR दर्ज कर ली गई है और आगे की जांच जारी है.
इसके अलावा इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने 22 अप्रैल 2026 को केरल और मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को नई दिल्ली स्थित आयोग मुख्यालय में बुलाया है. आयोग ने अपनी तरफ से यह स्पष्ट किया है कि दोषियों को सजा मिलने तक इस पूरे मामले की निगरानी जारी रखी जाएगी. साथ ही दोनों राज्यों के पुलिस अधिकारियों से हर तीन दिन में प्रगति रिपोर्ट भी मांगी गई है.
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