क्षत्रिय महासभा के प्रदेश महासचिव राज ने अपने संगठन को खूब सुनाया! CM शुभेंदू के PA मर्डर केस में गलती से हुई थी गिरफ्तारी

Raj Singh about Kshatriya Mahasabha: पश्चिम बंगाल CM शुभेंदु अधिकारी के पीए हत्याकांड में गलत पहचान के चलते गिरफ्तार हुए राज सिंह ने अब क्षत्रिय महासभा पर नाराजगी जताई है. CBI जांच में बेगुनाह साबित होने के बाद राज सिंह ने संगठन पर संकट में साथ न देने का आरोप लगाया.

Raj Singh

यूपी तक

• 02:50 PM • 23 May 2026

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पश्चिम बंगाल के CM शुभेंदू अधिकारी के पीए की हत्या मामले में गलत पहचान के कारण गिरफ्तार किया गया बलिया का राज सिंह चर्चा में है. सीबीआई जांच के बाद बाइज्जत बरी होकर लौटे राज सिंह का गुस्सा अब अपनी ही संस्था 'क्षत्रिय महासभा' पर फूटा है. यूपी Tak से खास बातचीत में राज सिंह ने गुस्सा जताते हुए कहा कि जब वह और उनका परिवार संकट से जूझ रहे थे तब खुद को रक्षक बताने वाले संगठन का कोई भी व्यक्ति उनके आंसू पोंछने आगे नहीं आया.

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झूठ-मूठ की लाइमलाइट है संगठन का पद

क्षत्रिय महासभा में प्रदेश महासचिव के पद पर तैनात राज सिंह ने संगठन से मिले शून्य सहयोग पर गहरी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने अपने घर की तरफ इशारा करते हुए कहा कि 'देखिए ऊपर एक बोर्ड लगा है कि मैं प्रदेश महासचिव हूं. लेकिन अब मुझे नहीं लगता कि वो बोर्ड वहां बरकरार रहेगा, मैं उसे उतार दूंगा क्योंकि ऐसे पद का कोई मतलब नहीं है. यह सब बस झूठ-मूठ की लाइमलाइट के लिए है, जिस समय मैं इस बड़े संकट में फंसा था, मेरे परिवार वाले बता रहे हैं कि संगठन का कोई भी व्यक्ति हमारे घर ढंढस बंधाने या मदद के लिए आगे नहीं आया. बुरे वक्त में कोई काम नहीं आता, बस कुछ अपने खास परिजन ही साथ खड़े रहे.' वहीं जब उनसे पूछा गया कि क्या वह क्षत्रिय महासभा से इस्तीफा देंगे तो उन्होंने कहा कि इसका फैसला वह आगे लेंगे.

अयोध्या से लौटते समय ढाबे से हुई थी गिरफ्तारी

राज सिंह ने अपनी गिरफ्तारी के उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया कि वह, उनकी मां और पूरा परिवार अयोध्या में प्रभु श्री राम के दर्शन करने गए थे. वहां से लौटते समय बलिया के रास्ते में वे लोग खाना खाने के लिए एक ढाबे पर रुके. जैसे ही वे खाना खाकर घर जाने के लिए निकले तभी एसओजी की टीम ने उन्हें अचानक घेरकर गिरफ्तार कर लिया. राज सिंह का आरोप है कि पुलिस और एसओजी ने बिना किसी गहन जांच के सिर्फ नाम के कंफ्यूजन के कारण उन पर जानबूझकर जुर्म कबूल करने का भयंकर दबाव बनाया. उन्होंने कस्टडी के दौरान मिले भयानक मानसिक टॉर्चर का भी आरोप लगाया और कहा कि अगर इस केस में सीबीआई की निष्पक्ष जांच नहीं हुई होती तो पुलिस उनका एनकाउंटर तक कर देती.

कोलकाता पुलिस और यूपी पुलिस की थ्योरी में ऐसे आया ट्विस्ट

इस पूरे मामले की शुरुआत 11 मई को हुई थी जब कोलकाता पुलिस ने अयोध्या क्राइम ब्रांच की मदद से राज सिंह को गिरफ्तार किया था. दरअसल, पुलिस ने इससे पहले बिहार के बक्सर से दो आरोपियों विक्की मौर्या और मयंक मिश्रा को गिरफ्तार किया था. इन्हीं दोनों से पूछताछ के आधार पर पुलिस राज सिंह तक पहुंची थी. शुरुआत से ही राज सिंह का परिवार चीख-चीखकर उनकी बेगुनाही के सबूत दे रहा था. परिजनों का दावा था कि जिस दिन हत्या हुई उस दिन राज सिंह बलिया में ही मौजूद थे और उनके पास इसके पुख्ता साक्ष्य भी थे. लेकिन शुरुआती जांच में पुलिस ने इन दावों को पूरी तरह गंभीरता से नहीं लिया.

असली कातिल राजकुमार सिंह निकला

मामले की जांच जब सीबीआई के हाथों में पहुंची तब जाकर इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा ट्विस्ट सामने आया. सीबीआई जांच में साफ हुआ कि यूपी और बंगाल पुलिस ने जिस राज सिंह को हत्यारा मानकर जेल में डाल दिया था, उसका इस हत्याकांड से कोई लेना-देना ही नहीं था. यह पूरी तरह से 'गलत पहचान' का मामला था. सीबीआई की जांच में पता चला कि असली आरोपी का नाम राजकुमार सिंह है जो उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का ही रहने वाला है यानी पुलिस को 'राजकुमार सिंह' की तलाश थी और वे नाम के कंफ्यूजन में 'राज सिंह' को उठा ले गए.

असली आरोपी गिरफ्तार

सीबीआई और मुजफ्फरनगर पुलिस की संयुक्त टीम ने दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे-58 पर स्थित छपार टोल प्लाजा से असली आरोपी राजकुमार सिंह को दो दिन पहले ही गिरफ्तार कर लिया है. असली कातिल की गिरफ्तारी और निर्दोष राज सिंह की बाइज्जत रिहाई के बाद अब यूपी और बंगाल पुलिस की कार्यप्रणाली और जल्दबाजी में किए गए एक्शन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.