Raj Singh:"अगर मेरे पास वो सबूत नहीं होता, तो आज मैं आप लोगों के बीच नहीं होता, मेरा कभी का एनकाउंटर हो गया होता. मैंने अपने लिए ड्रेसलैंड मॉल से ₹2800 कुछ रुपये का एक कुर्ता-पायजामा खरीदा था, उस मॉल के बिल और सीसीटीवी फुटेज ने ही इस बात की गवाही दी कि मैं निर्दोष हूं." यह दास्तां बलिया के रहने वाले राज सिंह की है, जिन्हें पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी के पीए हत्याकांड में गलत पहचान के चलते गिरफ्तार कर लिया गया था. पूरी तरह बेगुनाह साबित होकर घर लौटने के बाद राज सिंह ने यूपी Tak से एक्सक्लूसिव बातचीत में कस्टडी के खौफनाक अनुभव साझा किए.
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'अयोध्या से लौटते वक्त ढाबे पर पुलिस ने घेरा'
अपनी गिरफ्तारी के घटनाक्रम को याद करते हुए अखिल भारत महासभा के प्रदेश महासचिव राज सिंह ने बताया, "मैं अपनी मम्मी और पूरे परिवार के साथ अयोध्या में भगवान श्री राम के दर्शन करने गया था. वहां से दर्शन करके हम लोग वापस बलिया लौट रहे थे. रास्ते में खाना खाने के लिए हम एक ढाबे पर रुके. खाना खाकर जैसे ही हम लोग घर जाने के लिए निकले, तभी अचानक SOG की टीम ने मुझे घेर कर गिरफ्तार कर लिया. पुलिस और सोग टीम ने बिना किसी प्रकार की शुरुआती जांच किए मुझ पर जानबूझकर यह दबाव बनाना शुरू कर दिया कि 'हां, तुमने यह अपराध किया है, तुम बोलो कि हां तुमने किया है.' जबकि मैं पूरी तरह सत्य पर था, तो मैं क्यों किसी के आगे झुकता या दबता."
'झूठ बोलोगे तो गोली मार देंगे, एनकाउंटर कर देंगे'
राज सिंह का आरोप है कि पुलिस कस्टडी के दौरान उन पर फर्जी तरीके से जुर्म कबूल करवाने के लिए भयंकर मानसिक और शारीरिक दबाव बनाया गया. राज सिंह के मुताबिक, "मुझे डराया जा रहा था कि बोलो-बोलो, झूठ बोलोगे तो गोली मार देंगे, एनकाउंटर कर देंगे. मैंने उनसे हाथ जोड़कर साफ कहा कि जो कुछ भी है सब आपके सामने है, मेरा फोन ले लीजिए और मेरी पूरी कुंडली निकाल लीजिए, मेरा इस अपराध से कोई लेना-देना नहीं है. अपराध को जबरन कबूल करवाने के लिए पुलिस ने बहुत प्रेशर बनाया, लेकिन महादेव का आशीर्वाद था कि मैं उनकी इन धमकियों से डरा नहीं."
'बंगाल में बंगाली आती नहीं थी, लग रहा था मार देंगे'
राज सिंह ने कहा, "जब मुझे बंगाल लेकर गए, तो मुझे बंगाली भाषा आती नहीं थी. वहां भाषा की बहुत बड़ी समस्या हुई. पुलिस वहां मुझे एक बेहद शातिर अपराधी और जलील नजरों से देख रही थी. हम लोग शुरू से राजनीति में रहे हैं तो हमें पता है कि चीजें कैसे काम करती हैं. वहां मुझे साफ लगने लगा था कि ये लोग मेरा एनकाउंटर करने की प्लानिंग कर रहे हैं और मुझे कहीं ले जाकर मार देंगे. लेकिन यह तो अच्छा हुआ कि मेरे परिवार और परिजनों ने आप लोगों (मीडिया) के माध्यम से वहां तक अपनी आवाज पहुंचाई कि इस मामले की सीबीआई (CBI) जांच कराई जाए."
'₹2800 के कुर्ते का बिल और CCTV फुटेज नहीं होता, तो एनकाउंटर तय था'
जब यूपी Tak ने राज सिंह से पूछा कि अगर उनके घरवालों ने सीबीआई को सीसीटीवी फुटेज मुहैया नहीं कराई होती तो क्या होता? इस पर उन्होंने कहा, "अगर वो सबूत नहीं होता, तो मेरा तो एनकाउंटर हो गया होता. अगर सीबीआई नहीं आई होती तो मैं आज आपके सामने खड़ा नहीं होता. इस मामले में सीसीटीवी फुटेज और बिल ने सबसे अहम रोल प्ले किया है. मैंने जो अपने लिए कुर्ता-पायजामा ₹2800 कुछ रुपये का खरीदा था, वो मॉल का बिल मेरे पास था. मुझे खुद पर भरोसा था कि मैं गलत नहीं हूँ तो कुछ नहीं होगा."
सीबीआई और मीडिया का जताया आभार
उन्होंने कहा, "मैं सबसे पहले पत्रकार बंधुओं को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने मेरी आवाज को पूरे देश-विदेश में पहुंचाया कि मैं निर्दोष हूँ. और मैं उससे भी ज्यादा धन्यवाद सीबीआई (CBI) को देना चाहता हूँ. जब मैं सीबीआई के अंडर में आया, तो मेरे साथ किसी प्रकार की कोई बदतमीजी नहीं हुई. सीबीआई के अफसरों ने बिना किसी राजनीतिक दबाव या प्रेशर के निष्पक्ष होकर बहुत अच्छे से जांच की. जो उन्होंने मुझसे पूछा, मैंने सच-सच बताया."
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