CM शुभेंदु अधिकारी के PA हत्याकांड में बेकसूर साबित हुआ बलिया का राज सिंह, एडवोकेट बहन दीपशिखा ने कहा- मेरी मां की परवरिश गलत नहीं

अनिल अकेला

• 05:50 PM • 21 May 2026

पश्चिम बंगाल के हाई-प्रोफाइल हत्या केस में गलत पहचान के चलते गिरफ्तार बलिया निवासी राज सिंह को आखिरकार रिहा कर दिया गया. बहन दीपशिखा सिंह ने भाई की बेगुनाही पर भरोसा जताते हुए मीडिया और CBI का धन्यवाद किया.

Raj Singh Sister's Deepshikha

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पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में एक बड़ा मोड़ आया है. इस केस में गलत पहचान के चलते उत्तर प्रदेश के बलिया से गिरफ्तार किए गए निर्दोष युवक राजकुमार सिंह उर्फ राज सिंह को आखिरकार रिहा कर दिया गया है. भाई की सुरक्षित वापसी पर प्रयागराज हाईकोर्ट की एडवोकेट और राज सिंह की बहन दीपशिखा सिंह ने 'यूपी Tak' से खास बातचीत की है. इस दौरान दीपशिखा ने इमोशनल होकर कहा कि 'उन्हें शुरू से ही अपने भाई और अपनी मां की परवरिश पर पूरा भरोसा था कि उनका भाई कभी ऐसा घिनौना अपराध नहीं कर सकता. इसके साथ ही उन्होंने मीडिया और CBI का भी आभार व्यक्त किया है जिनकी वजह से उनके बेगुनाह भाई की जान बच सकी.'

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'हम तीनों भाई-बहन को गलत परवरिश नहीं मिली'

यूपी Tak से बात करते हुए प्रयागराज हाईकोर्ट की अधिवक्ता दीपशिखा सिंह ने अपने भाई की रिहाई को न्याय की जीत बताया. उन्होंने कहा कि 'मेरा भाई पूरी तरह निर्दोष था इसी वजह से आज वह मेरी आंखों के सामने सुरक्षित खड़ा है. मैं पहले दिन से यह बात कह रही थी, आज भी कह रही हूं और अपनी पूरी जिंदगी कहूंगी कि मेरा भाई कभी भी इस तरीके का कोई गलत काम कर ही नहीं सकता. मुझे अपने भाई पर अटूट विश्वास है. मेरी मां की परवरिश गलत नहीं है. हम तीनों भाई-बहनों को ऐसे संस्कार नहीं दिए गए हैं कि हम किसी के साथ कुछ गलत करें. मैं मीडिया और सीबीआई टीम को दिल से धन्यवाद देना चाहूंगी जिन्होंने सभी सबूतों को देखा और निष्पक्षता से जांच कर मेरे भाई को रिहा किया.'

रामलला के दर्शन कर लौटते वक्त हुई थी राज सिंह की गिरफ्तारी

इससे पहले रिहा हुए युवक राज सिंह ने अपनी गिरफ्तारी की खौफनाक दास्तान बयां करते हुए बताया कि वह अपने परिवार और मां के साथ अयोध्या में भगवान श्री राम के दर्शन करने गया था. दर्शन करने के बाद जब वे लोग वापस बलिया लौट रहे थे तो रास्ते में खाना खाने के लिए एक ढाबे पर रुके. खाना खाने के बाद जैसे ही वे लोग घर जाने के लिए आगे बढ़े, तभी यूपी पुलिस की एसओजी टीम ने उन्हें अचानक दबोच लिया. राज सिंह के मुताबिक, प्रशासन ने बिना किसी जांच-पड़ताल के सिर्फ नाम के कन्फ्यूजन या गलत पहचान के चलते उन्हें इस खौफनाक दलदल में झोंक दिया था.

पुलिस कस्टडी के दौरान मिले मानसिक और शारीरिक टॉर्चर को साझा करते हुए राज सिंह ने बताया कि 'मैं इस पूरे मामले में सबसे बड़ी लापरवाही और गलती पुलिस की एसओजी टीम की मानता हूं. उन्होंने कोई जांच नहीं की, बल्कि मुझ पर जबरन जुर्म कबूल करने का दबाव बनाया कि 'हां, तुम बोलो कि यह काम तुमने किया है'. मुझे बुरी तरह डराया-धमकाया जा रहा था और कहा जा रहा था कि अगर झूठ बोलोगे तो सीधे गोली मार देंगे, तुम्हारा एनकाउंटर कर देंगे. इसके बाद जब मुझे बंगाल ले जाया गया तो वहां भाषा की बड़ी समस्या थी. वहां मुझे एक अपराधी और बड़ी ही जलील नजरों से देखा जा रहा था. मुझे हर पल डर लग रहा था कि ये लोग कहीं ले जाकर मेरा एनकाउंटर करने की प्लानिंग कर रहे हैं.'

क्या है यह पूरा हाई-प्रोफाइल मामला?

दरअसल यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर की गई हत्या से जुड़ा हुआ है. बंगाल चुनाव के नतीजे आने के महज दो दिन बाद यानी 6 मई को चंद्रनाथ रथ की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. इस हाई प्रोफाइल मर्डर केस की जांच कर रही सीबीआई टीम ने जांच के सिलसिले में उत्तर प्रदेश के बलिया के रहने वाले राजकुमार सिंह को गिरफ्तार किया था. हालांकि, गहन तफ्तीश और पुख्ता सबूतों के सामने आने के बाद यह साफ हो गया कि यह गलत पहचान का मामला था जिसके बाद अब राज सिंह को बाइज्जत रिहा कर दिया गया है.