हर मां-बाप की जिंदगी का सबसे बड़ा सपना होता है कि उनका बेटा पढ़-लिखकर बड़ा आदमी बने. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के धूमनगंज थाना क्षेत्र के उमरौली इलाके में भी एक ऐसा ही घर था. पिता ने पाई-पाई जोड़कर बेटे को अच्छे से अच्छे स्कूल में पढ़ाया. लाखों रुपये खर्च किए और प्रयागराज के एक मशहूर कॉलेज में उसका दाखिला कराया. साल 2019 में बेटे ने शान से बीटेक (B.Tech) की डिग्री हासिल की. माता-पिता की आंखों में आंसू थे और दिल में यह तसल्ली कि अब बेटा इंजीनियर बन गया है, बड़ी कंपनी में नौकरी करेगा. पिता ने बेटे के हाथ में मोटी-मोटी किताबें और एक महंगा लैपटॉप लाकर रख दिया था ताकि वह नई तकनीक सीख सके. लेकिन उस पिता को शायद दूर-दूर तक इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि जिस बेटे के हाथ में उन्होंने किताबें और लैपटॉप दिया है, वही इंटरनेट की अंधेरी गलियों का सबसे बड़ा 'पोर्न मास्टरमाइंड' बन जाएगा.
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ये कहानी है विकास सिंह की
यह कहानी है विकास सिंह की. विकास सिंह किसी से ज्यादा बात नहीं करता था. न ही उसके दोस्त घर आते थे. वह दिन-रात, चौबीसों घंटे अपने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद रखता था. बाहर बैठे माता-पिता सोचते थे कि बेटा लैपटॉप पर कोडिंग सीख रहा है या नौकरी के लिए इंटरव्यू की तैयारी कर रहा है. लेकिन उस बंद कमरे वह मासूम बच्चों के भविष्य का कत्ल कर रहा था.
इंजीनियरिंग की पढ़ाई खत्म होने के बाद विकास सिंह ने साल 2020 से एक बेहद गंदा धंधा शुरू कर दिया था. उसने टेलीग्राम और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया ऐप्स का सहारा लिया और गुप्त तरीके से एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया जो सीधे तौर पर नाबालिग बच्चों को अपना निशाना बना रहा था.
कैसे हुआ इस घिनौने नेटवर्क का पर्दाफाश?
इस घिनौने नेटवर्क का पर्दाफाश तब हुआ, जब उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में एक नाबालिग छात्र इसका शिकार बना. इस छात्र का एक बेहद आपत्तिजनक और अश्लील वीडियो इंटरनेट की दुनिया में लीक हो गया. हरदोई के उस मासूम बच्चे को पता भी नहीं था कि उसका वीडियो किसी 'Ddose007.netofficial' और 'Ddose007.netALL' नाम के टेलीग्राम चैनलों पर अपलोड कर दिया गया है. जब इस बात की भनक पीड़ित पक्ष को लगी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. फर इस मामले की एक ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई गई.
ऑनलाइन शिकायत जैसे ही हरदोई पुलिस के पास पहुंची, हड़कंप मच गया. तारीख थी 17 मई 2026. सब इंस्पेक्टर रोशन सिंह की तहरीर पर हरदोई के साइबर थाने में मुकदमा अपराध संख्या दर्ज किया गया और तफ्तीश शुरू की गई. हरदोई के सीओ सिटी अंकित मिश्रा ने मामले की कमान संभाली और स्वाट, सर्विलांस तथा साइबर सेल की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया.
हनीट्रैप का जाल और मास्टरमाइंड की एक गलती
साइबर टीम ने जब उन टेलीग्राम चैनलों की पड़ताल शुरू की, तो उनके होश उड़ गए. यह कोई छोटा-मोटा ग्रुप नहीं था, बल्कि अश्लीलता का एक पूरा साम्राज्य था. विकास सिंह तकनीकी रूप से शातिर और दिमाग का तेज था. उसने इस गंदे धंधे को बकायदा एक कॉर्पोरेट कॉर्पोरेशन की तरह ऑनलाइन बिजनेस मॉडल में बदल दिया था. उसने अपने ग्राहकों के लिए बकायदा 'सब्सक्रिप्शन प्लान' तैयार कर रखे थे.
विकास सिंह के इस अश्लील साम्राज्य के रेट कार्ड कुछ इस तरह थे:
- मंथली प्लान (मासिक): ₹350
- क्वार्टरली प्लान (त्रैमासिक): ₹450
- हाफ इयरली प्लान (अर्धवार्षिक): ₹600
जो भी यूजर इन प्लान्स के हिसाब से पैसे देता था, विकास सिंह उसे अपने बेहद गुप्त और प्राइवेट टेलीग्राम चैनलों का लिंक (एक्सेस) दे देता था. पुलिस ने इस शातिर अपराधी को पकड़ने के लिए एक डिजिटल जाल बिछाया. पुलिस की साइबर टीम ने एक फर्जी आईडी बनाई और मुखबिर के जरिए विकास सिंह के टेलीग्राम चैनल पर मैसेज भेजकर उसका 'प्राइवेट सब्सक्रिप्शन' लेने की इच्छा जताई.
पर्दे के पीछे बैठे विकास सिंह को जरा सा भी अंदाजा नहीं था कि इस बार उसका ग्राहक कोई आम नागरिक नहीं, बल्कि खाकी वर्दी वाले हैं. विकास ने हमेशा की तरह मैसेज का जवाब दिया और मंथली प्लान के लिए ₹350 की मांग की. पुलिस ने जैसे ही हामी भरी, विकास सिंह ने पैसे ट्रांसफर करने के लिए अपना ओरिजिनल बैंक अकाउंट नंबर और यूपीआई आईडी भेज दी. बस, यही वह पल था जब उस शातिर बीटेक इंजीनियर से अपने जीवन की सबसे बड़ी और आखिरी भूल हो गई. उसका भेजा गया वह बैंक अकाउंट नंबर उसके पूरे डिजिटल साम्राज्य के कफन की कील बन गया.
करोड़ों का खेल आया सामने
हरदोई की साइबर टीम ने जैसे ही उस बैंक अकाउंट नंबर को ट्रेस करना शुरू किया, कंप्यूटर की स्क्रीन पर जो आंकड़े सामने आए, उन्हें देखकर अधिकारियों के माथे पर पसीना आ गया. विकास सिंह के नाम पर एक नहीं, बल्कि चार अलग-अलग बैंक खाते सक्रिय थे. जब इन खातों के लेन-देन (ट्रांजेक्शन) की खंगाली की गई, तो पता चला कि इस गंदे धंधे के जरिए उसने करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपये की भारी-भरकम धनराशि कमा रखी थी. पुलिस ने बिना देरी किए उन सभी बैंक खातों को फ्रीज करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी.
सीओ सिटी अंकित मिश्रा की देखरेख में जब विकास सिंह के लैपटॉप और मोबाइल का गहन फॉरेंसिक और तकनीकी विश्लेषण किया गया, तो अश्लीलता का एक ऐसा विशाल भंडार मिला जिसे देखकर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए. विकास के उन 21 गुप्त चैनलों से करीब 7 हजार एक्टिव यूजर्स जुड़े हुए थे. सबसे डरावना और परेशान करने वाला सच यह था कि इन 7 हजार सदस्यों में एक बहुत बड़ी संख्या आठवीं कक्षा से लेकर इंटरमीडिएट (12वीं) तक के नाबालिग छात्रों की थी.
विकास सिंह के पास से पुलिस ने जांच के दौरान 10000 से ज्यादा अश्लील और आपत्तिजनक वीडियो बरामद किए. 40000 से ज्यादा अश्लील तस्वीरें और प्राइवेट क्लिप्स जब्त कीं.
इंजीनियरिंग की पढ़ाई का उसने ऐसा खतरनाक इस्तेमाल किया था कि अगर इंटरनेट पर उसे किसी भी वीडियो का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा, क्लिप या स्क्रीनशॉट मिल जाता, तो वह गूगल लेंस (Google Lens) और अन्य अत्याधुनिक फॉरेंसिक सॉफ्टवेयर व तकनीकी टूल्स की मदद से उस वीडियो की असली लोकेशन और उसकी ओरिजिनल फाइल तक पहुंच जाता था. वहां से वह पूरी वीडियो डाउनलोड करता और अपने चैनलों पर अपलोड कर देता था.
विकास सिंह को हरदोई पुलिस की टीम ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और प्रयागराज के इनपुट्स के आधार पर दबोच लिया है. जब पुलिस उसे गिरफ्तार करने उसके घर पहुंची, तो उसके रिटायर्ड एयरफोर्स अफसर पिता और मां का रो-रोकर बुरा हाल था. गिरफ्तारी के बाद सोमवार को आरोपी विकास सिंह को भारी सुरक्षा के बीच एसडीएम सदर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया. अदालत ने मामले की गंभीरता और देश के बच्चों से जुड़े इस संवेदनशील अपराध को देखते हुए आरोपी विकास सिंह को तुरंत न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दे दिया.
हरदोई के सीओ सिटी अंकित मिश्रा ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए बताया, "17 मई 2026 को मिली शिकायत के आधार पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की. प्रयागराज के न्यू मार्केट शिवाला का रहने वाला विकास सिंह साल 2020 से टेलीग्राम पर 21 चैनल चलाकर नाबालिगों के बीच अश्लील सामग्री बेच रहा था. उसके पास से 10 हजार वीडियो, 40 हजार फोटो और खातों में 1.20 करोड़ रुपये मिले हैं. खातों को फ्रीज कर दिया गया है. पुलिस अब इस जांच में जुटी है कि इस पूरे रैकेट के तार देश के और किन-किन राज्यों से जुड़े हैं और क्या इसमें कुछ और लोग भी पर्दे के पीछे से काम कर रहे थे."
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