शिफ्ट में नमाज व्यवस्था पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने सीएम योगी के बयान पर जताई सहमति, दे दिया ये बयान

कृष्ण गोपाल यादव

18 May 2026 (अपडेटेड: 18 Jul 2026, 10:24 PM)

UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सड़कों पर नमाज न पढ़ने और नमाज को शिफ्ट में अदा करने के बयान पर बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने समर्थन जताया है.

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Maulana Shahabuddin Razvi and Yogi Adityanath (File Photo)

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UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सड़कों पर नमाज न पढ़ने और नमाज को शिफ्ट में अदा करने के बयान पर बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने समर्थन जताया है. उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था शरियत के अनुसार भी सही है और मुसलमानों को सड़कों पर नमाज नहीं पढ़नी चाहिए. ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने सोमवार को बरेली में मुख्यमंत्री के बयान पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि आने वाली 28 तारीख को ईद के मौके को देखते हुए सीएम योगी ने यह सुझाव दिया था कि नमाज शिफ्ट में पढ़ी जाए और सड़कों या सार्वजनिक स्थानों पर नमाज न हो. मौलाना ने कहा कि यह बात इस्लाम की सोच के अनुरूप है. उन्होंने बताया कि इस्लाम में भीड़ ज्यादा होने पर नमाज के लिए इमाम बदलकर दूसरी, तीसरी, चौथी या पांचवीं जमात (शिफ्ट) में नमाज अदा करने की व्यवस्था होती है, ताकि किसी तरह का ट्रैफिक बाधित न हो.

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मस्जिद और घर में नमाज पढ़ने का महत्व

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि नमाज पढ़ने से इंसान और खुदा के बीच एकाग्रता और शांति बनती है, जिसमें कोई बाधा नहीं होनी चाहिए. मस्जिद में नमाज पढ़ने का अधिक सवाब मिलता है और घर पर भी नमाज पढ़ी जा सकती है. उन्होंने कहा कि कोई भी मुसलमान जानबूझकर सड़क पर नमाज नहीं पढ़ता है. इस्लाम शांति और व्यवस्था को महत्व देता है, जिससे आम लोगों को कोई परेशानी न हो.

कुर्बानी को लेकर विशेष दिशा-निर्देश

आगामी 28 तारीख को मनाए जाने वाले बकरीद पर्व को लेकर मौलाना ने कहा कि कुर्बानी पूरी परंपरा और शान-शौकत के साथ की जाएगी. उन्होंने अपील की कि कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक स्थान, गली या चौराहे पर कुर्बानी न करे. कुर्बानी केवल घर या निजी स्थानों पर ही की जाए और जगह को चारों तरफ से ढक लिया जाए ताकि किसी को आपत्ति न हो.

प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी पर रोक की अपील

मौलाना ने आगे कहा कि सरकार हमेशा साफ-सफाई और कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास करती है. कुर्बानी की परंपरा जारी रहेगी, लेकिन इसके बाद अवशेषों को वहीं गड्ढा खोदकर दफना देना चाहिए ताकि किसी को कोई शिकायत न हो. साथ ही उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि किसी भी प्रतिबंधित पशु की कुर्बानी बिल्कुल न की जाए.