पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पीए (PA) चंद्रनाथ रथ मर्डर केस में गलत पहचान के कारण सलाखों के पीछे पहुंचे अखिल भारतीय क्षत्रिये महासभा के प्रदेश महासचिव राज सिंह अब अपने घर लौट आए हैं. राज सिंह के बेगुनाह साबित होने और सुरक्षित घर वापसी पर उनकी मां ने यूपी Tak से एक्सक्लूसिव बातचीत की. इस दौरान उन्होंने अपने संस्कारों पर सवाल उठाने वालों को करारा जवाब दिया और भगवान श्री राम का आभार प्रकट किया.
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'अगर ऐसा नहीं होता तो मैं मर गई होती'- भावुक हुईं मां
यूपी Tak से बात करते हुए राज सिंह की मां का गला भर आया. उन्होंने जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हुए कहा, "सीबीआई (CBI) टीम को भगवान ने मेरे बच्चे की जान बचाने के लिए भेजा था. अगर ऐसा नहीं होता तो मैं मर गई होती. मेरे संस्कारों पर जिन लोगों ने भी सवाल उठाए थे, आज उन सबको खुद-ब-खुद जवाब मिल गया है. मैंने अपने बच्चों को कभी भी गलत राय नहीं दी. भगवान हमेशा मेरे साथ हैं."
उन्होंने आगे रोते हुए कहा, "अगर हम सच्चे नहीं होते तो हमें कोई नहीं बचाता. इस पूरे मामले में आज 'श्री राम जी' यानी अयोध्या नरेश की जीत हुई है. अब इसके आगे मैं और क्या कहूं?"
क्या था पूरा मामला और कैसे फंसे थे राज सिंह?
राज सिंह की मां का यह बयान उनके बेटे द्वारा पुलिस कस्टडी को लेकर किए गए उन दावों के बाद आया है, जिसमें उन्होंने पुलिस पर एनकाउंटर की धमकी देने का आरोप लगाया था. इस पूरे घटनाक्रम की कड़ियां इस प्रकार हैं:
ढाबे पर खाना खाते वक्त अचानक हुई थी गिरफ्तारी: राज सिंह अपने परिवार और अपनी मां के साथ अयोध्या में रामलला के दर्शन करने गए थे. वहां से वापस बलिया लौटते समय रास्ते में एक ढाबे पर खाना खाकर जैसे ही वे निकले, तभी उत्तर प्रदेश पुलिस की सोग (SOG) टीम ने उन्हें अचानक धर दबोचा. राज सिंह का आरोप है कि पुलिस और सोग टीम ने बिना किसी जांच के उन पर गुनाह कबूल करने का दबाव बनाया.
'झूठ बोलोगे तो गोली मार देंगे': राज सिंह ने यूपी Tak को बताया था कि कस्टडी में उन्हें डराया और धमकाया गया. उनसे कहा गया कि 'झूठ बोलोगे तो गोली मार देंगे, एनकाउंटर कर देंगे.' लेकिन उन्होंने पुलिस से साफ कह दिया कि उनका इस अपराध से कोई वास्ता नहीं है और वे उनका फोन लेकर पूरी कुंडली जांच सकते हैं.
'बंगाल ले जाकर एनकाउंटर की थी प्लानिंग'
यूपी से जब राज सिंह को ट्रांजिट रिमांड पर पश्चिम बंगाल ले जाया गया, तो वहां भाषा की बड़ी समस्या खड़ी हो गई. राज सिंह के मुताबिक, वहां पुलिस उन्हें एक खूंखार अपराधी की नजर से देख रही थी और उन्हें डर था कि पुलिस उनका फर्जी एनकाउंटर करने की प्लानिंग कर रही है.
'₹200 के कुर्ते-पायजामे के बिल और CCTV फुटेज ने बचाई जान'
जब राज सिंह से पूछा गया कि अगर उनके पास सबूत नहीं होते तो क्या होता, तो उन्होंने बताया कि सीसीटीवी फुटेज ने उनकी जान बचाने में सबसे अहम भूमिका निभाई. दरअसल, घटना वाले दिन राज सिंह ने एक मॉल से ₹200 कुछ रुपये का एक कुर्ता-पायजामा खरीदा था. उनके घरवालों ने उस मॉल का सीसीटीवी फुटेज और खरीदारी का बिल सीबीआई को मुहैया कराया, जिससे यह साफ साबित हो गया कि घटना के समय राज सिंह बलिया/यूपी में थे, बंगाल में नहीं.
'संगठनों के खोखलेपन से दुखी राज सिंह दे सकते हैं इस्तीफा'
इस पूरे संकट में राज सिंह अपनी ही पार्टी और संगठनों के रवैये से बेहद आहत नजर आए. उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय क्षत्रिये महासभा के प्रदेश महासचिव पद का यह बोर्ड सिर्फ झूठी लाइमलाइट के लिए है. बुरे वक्त में कोई संगठन या राजनीतिक दल काम नहीं आया, सिर्फ उनके अपने परिजन और खास लोग ही खड़े रहे. उन्होंने संकेत दिए कि वे इस पद से इस्तीफा देने पर विचार कर रहे हैं.
विपक्ष चाहे जो कहे, सीबीआई ने निष्पक्ष काम किया
घर लौटने के बाद राज सिंह और उनकी मां, दोनों ने ही मीडिया और सीबीआई का हाथ जोड़कर धन्यवाद किया. राज सिंह ने कहा कि कस्टडी में उनके साथ किसी प्रकार की बदतमीजी नहीं हुई और सीबीआई ने बिना किसी राजनीतिक दबाव के निष्पक्ष जांच की. उन्होंने आम जनता से भी अपील की कि अगर कोई बेगुनाह है, तो उसे पुलिस या सोग के चक्कर में पड़ने के बजाय सीधे सीबीआई जांच की मांग करनी चाहिए, क्योंकि वह बेगुनाह को न्याय दिलाकर ही रहती है.
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