UP Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं. राजनीतिक रंग भी वैसे-वैसे परवान चढ़ रहा है. प्रदेश के पूर्वांचल इलाके के महराजगंज में राजनीति एक बार फिर से गरमा गई है. कवियत्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे बाहुबली नेता और पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी अब अपने अच्छे आचरण के कारण जेल से रिहा हो गए हैं.
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जेल से बाहर आते ही उन्होंने एक बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने साफ कर दिया है कि वो और उनका बेटा अमनमणि त्रिपाठी अगला विधानसभा चुनाव लड़ने वाले हैं. इस ऐलान के बाद अब देखना होगा कि क्या यह बाहुबली परिवार अपनी पुरानी राजनीतिक पकड़ वापस हासिल कर पाएगा. हालांकि वे किस पार्टी के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरेंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है.
मंच से किया चुनाव लड़ने का ऐलान
जेल से रिहा होने के बाद अमरमणि त्रिपाठी ने एक मंच से चुनाव लड़ने की घोषणा की है. उन्होंने दावा करते हुए कहा कि, वो 27वें विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे और उनका बेटा अमनमणि नौतनवा सीट से चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतरेगा. इसके साथ ही उन्होंने दावा किया है कि नौतनवा की जनता का पूरा सपोर्ट उनके परिवार के साथ बरकरार है. अमरमणि का मानना है कि उनका बेटा उनकी राजनीतिक विरासत को अब आगे बढ़ाएगा.
मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में हुई थी सजा
बाहुबली नेता अमरमणि त्रिपाठी को लखनऊ की मशहूर कवियत्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में दोषी ठहराया गया था. इस हत्याकांड की जांच में यह बात सामने आई थी कि मधुमिता के भ्रूण का डीएनए अमरमणि का है. इसी मामले को लेकर बाहुबली नेता अमरमणि त्रिपाठी को उम्रकैद की सजा हुई थी. अब यूपी सरकार की अच्छे आचरण वाले कैदियों को माफी दी जाने वाली नीति के तहत अमरमणि त्रिपाठी को भी माफी दी गई है और उन्हें जिले से रिहा किया गया है.
अमनमणि त्रिपाठी पर भी हैं गंभीर आरोप
अमरमणि के बेटे अमनमणि त्रिपाठी पर भी कई गंभीर आरोप लग चुके हैं. इनमें अमनमणि त्रिपाठी की अपनी ही पत्नी सारा सिंह की मौत का आरोप भी शामिल है. 2013 में सारा ने अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर अमनमणि से लव मैरिज की थी. बाद में सारा की मौत हो गई, जिसका आरोप अमनमणि पर लगा था. लेकिन अमनमणि ने इस हादसे को हमेशा एक दुर्घटना ही बताया है.
कैसा रहा है परिवार का राजनीतिक सफर?
इस परिवार का राजनीतिक सफर काफी लंबा रहा है.
अमरमणि का सफर: 1985 में पहली बार निर्दलीय चुनाव हारने वाले अमरमणि ने 1989 और 1996 में कांग्रेस के टिकट पर लक्ष्मीपुर से जीत दर्ज की थी. बाद में वे लोकतांत्रिक कांग्रेस और बसपा से भी चुनाव जीते. 2007 में उन्होंने जेल में रहते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) के टिकट पर नौतनवा से चुनाव जीता था.
अमनमणि का सफर: 2012 में सपा के टिकट पर चुनाव हारने वाले अमनमणि ने 2017 में सपा से टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी. लेकिन 2022 में उन्होंने किस्मत बसपा के टिकट से आजमाई और चुनाव हार गए, लेकिन फिर भी उन्हें इन चुनाव में 46 हजार से ज्यादा वोट मिले थे.
किस पार्टी से लड़ेंगे चुनाव?
अभी तक यह साफ नहीं है कि त्रिपाठी परिवार किस राजनीतिक दल से चुनाव लड़ेगा. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या उनकी सपा में वापसी होगी, या कांग्रेस उन्हें टिकट देगी, या फिर बीजेपी के किसी सहयोगी दल के जरिए वे चुनावी मैदान में उतर सकते हैं. सूत्रों की मानें तो इस परिवार की हर तरफ से बातचीत चल रही है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पूर्वांचल की राजनीति में क्या यह परिवार एक बार फिर अपनी मजबूत वापसी कर पाता है.
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