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उद्घाटन के 5 महीने बाद गंगा एक्सप्रेसवे का टोल प्लॉजा डूबा, इन 7 तस्वीरों ने खोली 36 हजार करोड़ में बनी इस हाईवे की पूरी सच्चाई!

उत्तर प्रदेश के 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले गंगा एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद टोल प्लॉजा पर जलभराव की समस्या सामने आई है. उन्नाव के बशीरतगंज में टोल प्लाजा और एंट्री मार्ग पर करीब दो फीट पानी भर गया. इससे वाहन चालकों को परेशानी हुई. कुछ दिन पहले सड़क 10 फीट तक धंसी थी.

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उत्तर प्रदेश के गंगा एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद जलभराव की तस्वीरें सामने आई हैं. उन्नाव के बशीरतगंज क्षेत्र में एक्सप्रेसवे पर चढ़ने वाले मार्ग और टोल प्लाजा के आसपास करीब दो फीट तक पानी भर गया. जलभराव के कारण वाहन चालकों और दोपहिया सवारों को परेशानी का सामना करना पड़ा. कई बाइक पानी में फंसकर बंद हो गईं. टोल प्लाजा के केबिन के अंदर तक पानी पहुंच गया, जिसके बाद कर्मचारियों को भी काफी दिक्कत हुई.

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बताया जा रहा है कि सोमवार को कुछ घंटे हुई बारिश के बाद बशीरतगंज क्षेत्र में गंगा एक्सप्रेसवे के एंट्री प्वाइंट पर पानी जमा हो गया. एक्सप्रेसवे के साथ लगी सर्विस रोड भी जलमग्न हो गई. करीब दो फीट पानी भरने से दोपहिया वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ गईं. कई बाइक पानी में फंसकर बंद हो गईं, जिन्हें आसपास मौजूद लोगों की मदद से खींचकर जलभराव वाले हिस्से से बाहर निकाला गया.

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जलभराव की स्थिति इतनी गंभीर रही कि बारिश का पानी टोल प्लाजा के केबिन के अंदर तक पहुंच गया. टोल वसूलने वाला कर्मचारी कुर्सी पर पैर ऊपर रखकर बैठने को मजबूर नजर आया. एक्सप्रेसवे के कर्मचारियों ने जनरेटर लगाकर पानी निकालने का काम शुरू किया. दोपहर से देर रात तक पानी निकालने की कोशिश चलती रही, लेकिन कई घंटे की मशक्कत के बाद भी पूरी तरह जल निकासी नहीं हो सकी.

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गंगा एक्सप्रेसवे पर जलभराव का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब कुछ दिन पहले ही इसकी सड़क धंसने की घटना चर्चा में रही थी. करीब 12 से 14 दिन पहले मेरठ से प्रयागराज जाने वाली लेन पर किलोमीटर संख्या 42.1 के पास सड़क में करीब 10 फीट गहरा गड्ढा हो गया था. इस घटना के बाद एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे थे.

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सड़क धंसने के बाद कार्यदायी संस्था ने बारिश के दौरान ही मरम्मत का काम कराया और गड्ढे पर पैचवर्क किया. हालांकि, मरम्मत के कुछ समय बाद सड़क पर दोबारा दरारें दिखाई देने लगीं. अब टोल प्लाजा और एक्सप्रेसवे के एंट्री मार्ग पर भारी जलभराव की तस्वीरों ने जल निकासी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.

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गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की बड़ी सड़क परियोजनाओं में शामिल है. यह करीब 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार छह लेन का एक्सप्रेसवे है. इसकी लंबाई मेरठ से प्रयागराज तक करीब 594 किलोमीटर है. इतनी बड़ी लागत और महत्व वाली परियोजना पर सड़क धंसने और जलभराव जैसी घटनाओं के बाद निर्माण और जल निकासी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है.

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गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. उद्घाटन के लगभग 5 महीनें बाद ही सड़क में करीब 10 फीट गहरा गड्ढा बनने और अब टोल प्लाजा के आसपास करीब दो फीट पानी भरने की घटनाओं ने एक्सप्रेसवे की व्यवस्थाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है. फिलहाल बारिश के बाद सामने आई इन तस्वीरों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतने बड़े एक्सप्रेसवे के एंट्री प्वाइंट और टोल प्लाजा पर पानी की निकासी की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं हो सकी.