उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. निर्वाचन आयोग द्वारा जारी ड्राफ्ट रोल के मुताबिक यूपी के कई बड़े जिलों में मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है. गौर करने वाली बात यह है कि पश्चिमी यूपी के मुस्लिम बहुल इलाकों में वोट कटने की दर बड़े शहरों के मुकाबले काफी कम रही है. उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक इस बार 2.89 करोड़ मतदाताओं को सूची से बाहर रखा गया है, जबकि 12.55 करोड़ मतदाताओं के नाम बरकरार हैं.
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लखनऊ और गाजियाबाद में सबसे ज्यादा 'सफाई'
मतदाता सूची से नाम कटने के मामले में राजधानी लखनऊ और दिल्ली से सटे गाजियाबाद सबसे ऊपर हैं. लखनऊ में सबसे ज्यादा 30.04% फॉर्म अनकलेक्टेड रहे. जिले के मतदाताओं की संख्या अक्टूबर 2025 में 39.94 लाख थी, जो अब घटकर 27.94 लाख रह गई है. यानी करीब 12 लाख मतदाता सूची से बाहर हुए हैं. इनमें 1.28 लाख मौत के मामले, 4.28 लाख लापता या अनुपस्थित और 5.36 लाख स्थाई रूप से शिफ्ट होने वाले मामले शामिल हैं.
इसी तरह गाजियाबाद में 28.83% फॉर्म अनकलेक्टेड रहे, जिससे करीब 5.83 लाख मतदाता कम हुए. जिले की कुल मतदाता संख्या 28.38 लाख से घटकर 20.20 लाख रह गई है.
मुस्लिम बहुल जिलों में कम कटे वोट
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम आबादी वाले जिलों में वोटर लिस्ट से नाम कटने की दर अपेक्षाकृत कम रही है:
जिला अनकलेक्टेड फॉर्म (%)
रामपुर 18.29%
मुरादाबाद 15.76%
सहारनपुर 16.37%
मुजफ्फरनगर 16.29%
अलीगढ़ 18.60%
आजमगढ़ 15.25%
मऊ 17.52%
पीलीभीत 13.61%
इन आंकड़ों से साफ है कि लखनऊ (30.04%) और गाजियाबाद (28.83%) जैसे महानगरों की तुलना में इन जिलों में मतदाताओं के नाम कम हटे हैं.
इन जिलों का भी रहा बुरा हाल
बलरामपुर: सूची से नाम कटने के मामले में यह तीसरे नंबर पर है. यहां 25.98% फॉर्म अनकलेक्टेड रहे, जिससे मतदाता 15.83 लाख से घटकर 11.18 लाख रह गए.
कानपुर नगर: यहां 25.50% की गिरावट दर्ज की गई. वोटरों की संख्या 35.38 लाख से घटकर 26.36 लाख रह गई है (9.02 लाख की कमी).
प्रयागराज: यहां 24.64% की गिरावट आई. कुल 11.56 लाख मतदाता कम हुए हैं.
गौतमबुद्ध नगर: यहां 23.98% फॉर्म अनकलेक्टेड रहे और नई सूची में मतदाता संख्या 18.65 लाख है.
आगरा: यहां 23.25% की कमी आई, जिससे मतदाता 36 लाख से घटकर 27.63 लाख रह गए.
बुंदेलखंड में सबसे कम बदलाव
यूपी के बुंदेलखंड क्षेत्र में मतदाता सूची में सबसे कम बदलाव देखने को मिला है. ललितपुर इस सूची में सबसे नीचे है. यहां सिर्फ 9.95% फॉर्म अनकलेक्टेड रहे. इसके बाद हमीरपुर (10.78%), महोबा (12.42%), बांदा (13%), चित्रकूट (13.67%) और झांसी (13.92%) का नंबर आता है.
क्यों कटे इतने नाम?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार, कुल 15.44 करोड़ सूचीबद्ध मतदाताओं में से 18.70% (2.89 करोड़) को बाहर किया गया है. इसके मुख्य कारणों में मतदाताओं की मृत्यु, स्थाई रूप से दूसरे स्थान पर पलायन (Migration) या एक से अधिक जगहों पर पंजीकरण (Duplicate Registration) शामिल है.
अंतिम प्रकाशन मार्च में: ये आंकड़े अभी ड्राफ्ट रोल पर आधारित हैं. 6 फरवरी तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं, जिसके बाद 6 मार्च को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा. अगर आपका नाम ड्राफ्ट सूची में गलती से कट गया है तो घबराने की जरूरत नहीं. यहां क्लिक कर जानिए कि कैसे आप अपना नाम अभी भी फाइनल वोटर लिस्ट में जुड़वा सकते हैं.
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