खुशखबरी! यूपी के इस 14 किमी रूट पर शुरू हुई नई तकनीक, अब समय पर पहुंचेंगी ट्रेनें

आयशा शेख़

• 12:35 PM • 22 Jul 2026

उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल में मुस्तरा-गढ़मऊ-पारीछा रेलखंड पर अत्याधुनिक ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग (ABS) प्रणाली शुरू कर दी गई है. इस नई तकनीक से ट्रेनों का संचालन अधिक सुरक्षित, तेज और समयबद्ध होगा.

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UP Train News: उत्तर मध्य रेलवे (NCR) के झांसी मंडल से सफर करने वाले रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी है. रेल परिचालन को ज्यादा सुरक्षित, आधुनिक और तेज बनाने के लिए रेलवे ने एक बड़ा कदम उठाया है.

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झांसी मंडल के मुस्तरा-गढ़मऊ-पारीछा रेल खंड में अत्याधुनिक ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग (ABS) प्रणाली को सफलतापूर्वक चालू कर दिया गया है. अब इस रूट पर ट्रेनों की रफ्तार और सुरक्षा दोनों में जबरदस्त इजाफा देखने को मिलेगा.

अब एक ही पटरी पर कम दूरी में चल सकेंगी कई ट्रेनें

अक्सर देखा जाता है कि एक ट्रेन के आगे निकलने तक दूसरी ट्रेन को पीछे वाले स्टेशन पर ही रोक दिया जाता है. इससे न सिर्फ समय बर्बाद होता है, बल्कि यात्रियों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ती है, लेकिन अब मुस्तरा, गढ़मऊ और पारीछा के बीच ऐसा नहीं होगा.

ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग लागू होने के बाद अब ट्रेनें बेहद कम अंतराल पर भी पूरी सुरक्षा के साथ एक के पीछे एक चल सकेंगी. इससे रूट की 'लाइन क्षमता' बढ़ेगी और ट्रेनों को बेवजह आउटर या स्टेशनों पर रुकना नहीं पड़ेगा. यानी आपका सफर अब और ज्यादा समयबद्ध और सुकून भरा होगा.

14 नए सिग्नल और हाई-टेक सेंसर

इस 14 किलोमीटर लंबे रेल खंड को हाई-टेक बनाने के लिए कानपुर प्रोजेक्ट इकाई ने पूरी मुस्तैदी से काम किया है. इस प्रोजेक्ट में कई आधुनिक बदलाव किए गए हैं:

  • 82 डिजिटल एक्सेल काउंटर (MSDAC): ट्रैक पर ट्रेन की सटीक लोकेशन का पता लगाने के लिए 82 MSDAC डिटेक्शन पॉइंट्स लगाए गए हैं. इससे सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह भरोसेमंद हो जाता है.
  • 14 नए ऑटोमैटिक सिग्नल: ट्रेनों को बिना किसी रुकावट के रफ्तार देने के लिए 14 नए ऑटोमैटिक सिग्नल खड़े किए गए हैं.
  • इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग अपग्रेड: मुस्तरा, गढ़मऊ और पारीछा स्टेशनों के सिग्नल सिस्टम को अपग्रेड किया गया है, जिससे सिग्नल अब पहले से ज्यादा तेजी से और सटीक काम करेंगे.

सड़क पर चलने वालों की सुरक्षा का भी रखा गया ध्यान

रेलवे ने न सिर्फ यात्रियों की सुविधाओं का ख्याल रखा है, बल्कि रेलवे फाटक पार करने वाले आम लोगों की सुरक्षा भी मजबूत की है. इस प्रोजेक्ट के तहत समपार फाटक संख्या 122 और 127 को भी नई ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली से जोड़ (गेट इंटरलॉक) दिया गया है. इससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा न के बराबर रह जाएगा.

बड़े अधिकारियों की देखरेख में पूरा हुआ मिशन

इस पूरे प्रोजेक्ट को समय पर और बिना किसी चूक के पूरा करने में रेलवे के आला अधिकारियों की अहम भूमिका रही. उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह, प्रधान मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता दीपक कुमार सिन्हा और झांसी के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) अनिरुद्ध कुमार के मार्गदर्शन में पूरी टीम ने इस मिशन को अंजाम दिया.

उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी (CPRO) डॉ. शिवम शर्मा के अनुसार, "यह परियोजना भारतीय रेल के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. इससे यात्रियों को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित, समयबद्ध और विश्वसनीय रेल यात्रा का अनुभव मिलेगा."