'मुझे सिर्फ आधी सैलरी दो...' यूपी के इस IAS अफसर ने अपने ही पैसे कम करने के लिए योगी सरकार को लिख दिया लेटर

यूपी तक

21 Jul 2026 (अपडेटेड: 21 Jul 2026, 05:10 PM)

जालौन में तैनात आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर केवल आधी सैलरी लेने की इच्छा जताई है. उनका कहना है कि उन्हें रोजाना करीब चार घंटे ही काम मिलता है, इसलिए बिना पर्याप्त कार्य के पूरा वेतन लेना नैतिक रूप से उचित नहीं है.

UP Tak
Google CTA

IAS Rinku Singh: अपनी बेबाक शैली और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जाने जाने वाले आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने सरकार को एक हैरान करने वाली चिट्ठी लिखी है. इस चिट्ठी में उन्होंने न सिर्फ यूपी की प्रशासनिक कार्यसंस्कृति पर गंभीर सवाल उठाए हैं, बल्कि एक ऐसी अनोखी मांग रख दी है, जिसकी चारों तरफ चर्चा हो रही है.

यह भी पढ़ें...

जालौन में उप-जिलाधिकारी (न्यायिक) के पद पर तैनात आईएएस रिंकू सिंह राही ने नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि उन्हें उनकी आधी ही सैलरी दी जाए. उनका तर्क है कि उनके पास रोजाना केवल चार घंटे का ही काम रहता है. 

"समान काम के लिए समान वेतन" का दिया हवाला

आईएएस रिंकू सिंह राही ने अपने पत्र में लिखा कि वे 22 जुलाई से अपनी आधी सैलरी ही स्वीकार करना चाहते हैं. उनका मानना है कि नैतिक सिद्धांतों के तहत "समान काम के लिए समान वेतन" मिलना चाहिए और बिना पर्याप्त काम किए पूरा वेतन लेना उनके लिए उचित नहीं है.

उन्होंने सरकार से मांग की है कि उनकी उपयोगिता का आकलन किया जाए. अगर वे उपयुक्त हैं तो उन्हें उनके बैच के बाकी अफसरों के बराबर जिम्मेदारी दी जाए, वरना नियमों के मुताबिक किसी दूसरे राज्य कैडर में ट्रांसफर कर दिया जाए.

रियल-टाइम सोशल ऑडिट और पारदर्शिता पर उठाए सवाल

राही ने अपने पत्र में बताया कि जालौन में तैनाती के दौरान उन्होंने हर ग्राम पंचायत और शहरी क्षेत्र के लिए वॉट्सऐप ग्रुप बनाए थे, ताकि जनता, अधिकारियों और कर्मचारियों को जोड़कर एक रियल-टाइम सोशल ऑडिट सिस्टम बनाया जा सके. इससे लेखपाल, ग्राम सचिव और सफाईकर्मियों की उपस्थिति और कामकाज पर सीधी नजर रखी जा सकती थी.

हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि वरिष्ठ अधिकारियों से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद मनरेगा कार्यों के विवरण, सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की सूची, लाभार्थियों की लिस्ट और टेंडर से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए गए.

"अवैध कब्जे, अवैध खनन और जनशिकायतों की जांच के दौरान मुझ पर भारी दबाव बनाया गया और मुझे विवादों में ढकेलने की कोशिश की गई. यहां तक कि फर्जी शिकायत निस्तारण रिपोर्ट स्वीकार करने का भी दबाव डाला गया."

- रिंकू सिंह राही (आईएएस)

पहले भी सुर्खियों में रहे हैं रिंकू सिंह राही

यह पहला मौका नहीं है जब रिंकू सिंह राही अपने फैसलों को लेकर चर्चा में आए हैं:

  1. 2009 का जानलेवा हमला: मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी (पीसीएस) रहते हुए उन्होंने करोड़ों रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले का पर्दाफाश किया था, जिसके बाद उन पर 7 गोलियां चलाई गई थीं. इसमें वे बाल-बाल बचे थे, हालांकि उनकी एक आंख की रोशनी चली गई थी.
  2. वकीलों के सामने उठक-बैठक: शाहजहांपुर में एसडीएम रहते हुए सफाई व्यवस्था पर वकीलों के विरोध को शांत करने के लिए उन्होंने जनता के सामने उठक-बैठक लगा ली थी, जिसका वीडियो काफी वायरल हुआ था.
  3. तकनीकी इस्तीफा: काम की कमी का हवाला देते हुए उन्होंने राष्ट्रपति को 'तकनीकी इस्तीफा' तक भेज दिया था, जिसके बाद उन्हें मौजूदा पद पर भेजा गया था.

फिलहाल, इस पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश सरकार या संबंधित विभाग की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है और जालौन के जिलाधिकारी से भी संपर्क नहीं हो सका है.