13 साल तक बेड पर जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ने वाले हरीश राणा के निधन के बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पीड़ित परिवार के साथ खड़ी नजर आ रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासन ने परिवार को आर्थिक सहायता और भविष्य में हर संभव मदद का भरोसा दिया है. सीएम के निर्देश पर प्रशासनिक अधिकारियों ने हरीश के घर पहुंचकर आर्थिक सहायता की घोषणा की है.
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यूपी Tak से एक्सक्लूसिव बातचीत में हरीश राणा के पिता अशोक राणा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दिल से आभार व्यक्त किया. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के आदेश पर जिलाधिकारी (DM), जीडीए वीसी और कमिश्नर उनके घर पहुंचे. अशोक राणा ने भावुक होते हुए कहा, "हम यूपी सरकार के मुख्यमंत्री माननीय आदित्यनाथ योगी जी का बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं. उन्होंने अधिकारियों को हमारे घर भेजा. सरकार की तरफ से 10 लाख की मदद की बात कही गई है."
13 साल का लंबा और दर्दनाक इंतजार
मालूम हो कि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग के छात्र रहे हरीश राणा की जिंदगी 20 अगस्त 2013 को एक हादसे ने बदल दी थी. पीजी की चौथी मंजिल से गिरने के कारण उनके सिर में गंभीर चोट आई थी, जिसके बाद वे परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट में चले गए थे. पिता ने 13 सालों तक अपने बेटे को बचाने की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन हालत में सुधार न होने पर अंत में सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए उन्हें पैसिव यूथेनेशिया (इच्छा मृत्यु) की इजाजत दी थी.
अंतिम विदाई और हरिद्वार के लिए प्रस्थान
24 मार्च को दिल्ली एम्स में हरीश राणा ने आखिरी सांस ली और 25 मार्च को उनका अंतिम संस्कार किया गया. आज, 26 मार्च की सुबह परिवार श्मशान घाट पहुंचकर अस्थियां इकट्ठा करने पहुंचा. हरीश के पिता ने बताया कि वे इन अस्थियों को लेकर हरिद्वार जाएंगे. 13 साल के संघर्ष के बाद हरीश भले ही पंचतत्व में विलीन हो गए हों लेकिन सरकार के इस सहारे ने टूट चुके परिवार को एक नई उम्मीद दी है.
इच्छा मृत्यु के बाद हरीश राणा के परिवार की मदद के लिए आगे आए सीएम योगी आदित्यनाथ. पिता ने 10 लाख की आर्थिक सहायता और सरकारी सहयोग के लिए जताया आभार.
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