उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है, जब अखिलेश यादव ने राज्य के दोनों उपमुख्यमंत्रियों पर तंज कसते हुए एक वीडियो साझा किया. इस वीडियो में केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक नजर आ रहे हैं. अखिलेश ने व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा, 'दो स्टूलों को मिलाने से कुर्सी नहीं बनती,' जिसके बाद सियासी माहौल गरमा गया.
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केशव मौर्य ने किया पलटवार
इस टिप्पणी के लगभग 14 घंटे बाद केशव मौर्य ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि उनकी और ब्रजेश पाठक की 'सफल और प्रभावी जोड़ी' से विपक्ष असहज है. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार में वंचित, श्रमिक और पिछड़े वर्गों के साथ अन्याय हुआ, जिसे जनता भूली नहीं है. शनिवार सुबह दिए गए अपने बयान में डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने खुद को चंद्रगुप्त मौर्य की विरासत का प्रतिनिधि बताया और कहा कि वे अखंड भारत के निर्माण के लिए संकल्पित हैं. उन्होंने यह भी कहा कि वे गौतम बुद्ध की शांति, समानता और न्याय की शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हैं. मौर्य ने शाक्य, कुशवाहा, मौर्य, सैनी समेत कई वंचित वर्गों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके साथ हुए अन्याय का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाएगा. उन्होंने विश्वास जताया कि जनता भविष्य में 'कमल खिलाकर' जवाब देगी और 2047 तक विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश का लक्ष्य हासिल किया जाएगा.
ब्रजेश पाठक का भी अखिलेश पर पलटवार
वहीं, ब्रजेश पाठक ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव पर निशाना साधा. उन्होंने लिखा कि 'तुष्टीकरण और कुत्सित राजनीति' विपक्ष की पुरानी नीति है और जनता सब जानती है. उन्होंने अपनी और केशव मौर्य की जोड़ी को 'नए उत्तर प्रदेश की सुपर जोड़ी' बताया और कहा कि वे जमीनी स्तर पर काम करने में विश्वास रखते हैं. ब्रजेश पाठक ने आगे कहा कि जनता लगातार चुनावों में विपक्ष को आईना दिखा रही है और आगे भी दिखाएगी. उन्होंने भरोसा जताया कि भाजपा 2027 में फिर सरकार बनाएगी. साथ ही उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और 'सबका साथ, सबका विकास' की विचारधारा पर आगे बढ़ रहे हैं.
कुशीनगर दौरे से शुरू हुआ था विवाद
यह पूरा विवाद उस वीडियो से शुरू हुआ, जो शुक्रवार का बताया जा रहा है. बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर दोनों उपमुख्यमंत्री कुशीनगर पहुंचे थे. वहां ब्रजेश पाठक ने भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली पर पहुंचने को सौभाग्य बताया और अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस का जिक्र करते हुए युवाओं से जागरूक होकर परिवर्तन में भागीदारी की अपील की.
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