Harish Rana News: 13 साल तक बिस्तर पर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने वाले हरीश राणा के निधन के बाद उनका परिवार आज अस्थियां संचित करने पहुंचा. इस भावुक क्षण में यूपी Tak से खास बातचीत करते हुए हरीश के पिता अशोक राणा ने उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस लंबी और कठिन कानूनी व स्वास्थ्य संबंधी लड़ाई में उनका साथ दिया. अशोक राणा ने इस दौरान विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और देश की सर्वोच्च अदालत के प्रति भी अपनी कृतज्ञता जाहिर की.
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2013 से हरीश राणा परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट में थे. हरीश के निधन के बाद उनके पिता अशोक राणा ने समाज और सरकार के सहयोग को याद किया. उन्होंने कहा कि यह उनके बेटे के मान की जीत है, जिसे सर्वोच्च अदालत ने समझा.
अशोक राणा ने सीएम योगी आदित्यनाथ का किए धन्यवाद
अशोक राणा ने भावुक होते हुए कहा, "हम यूपी सरकार के मुख्यमंत्री माननीय आदित्यनाथ योगी जी का दिल से बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं. उन्होंने जिला अधिकारी (DM), जीडीए वीसी और कमिश्नर को हमारे घर भेजा. उन्होंने हमारी सहायता के लिए घोषणाएं की हैं और मदद भी की है. उन्होंने 10 लाख रुपये की सहायता का आश्वासन दिया है."
अशोक राणा ने न्यायपालिका का आभार जताते हुए कहा कि न्यायमूर्ति पारदीवाला जी और न्यायमूर्ति विश्वनाथन जी ने जो मानवीय निर्देश दिए, वह सराहनीय थे. इसके साथ ही उन्होंने एम्स (AIIMS) के डायरेक्टर, एचओडी सीमा मिश्रा, प्रोफेसर सुषमा और अपनी कानूनी टीम (अधिवक्ता रश्मि नंदकार, डॉ. ध्वनि मेहता व अन्य) का भी शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया.
पड़ोसियों ने निभाया इंसानियत का धर्म
दुख की इस घड़ी में मानवीय संवेदनाओं की मिसाल देते हुए अशोक राणा ने अपने पड़ोसियों का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि उनकी सोसाइटी के अरविंद कुमार जैसे पड़ोसियों ने रात-दिन मेहमानों के लिए भोजन बनाया और सेवा की, क्योंकि रीति-रिवाजों के अनुसार उनके घर में चूल्हा नहीं जल सकता था.
हरीश राणा की अंतिम यात्रा, हरिद्वार से हिमाचल तक
हरीश राणा की अस्थियां लेकर परिवार अब हरिद्वार के लिए रवाना हो गया है. हरिद्वार में अस्थि विसर्जन के बाद परिवार अपने पैतृक गांव हिमाचल प्रदेश जाएगा. गांव से आए उनके करीबियों ने बताया कि हरीश के निधन के बाद से परिवार ने पारंपरिक नियमों का पालन करते हुए अन्न ग्रहण नहीं किया है. गांव में ही विधि-विधान के साथ 13वीं का संस्कार और अन्य धार्मिक क्रियाएं पूरी की जाएंगी.
गौरतलब है कि हरीश राणा चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से सिविल इंजीनियरिंग कर रहे थे, जब 2013 में एक हादसे ने उनकी जिंदगी बदल दी थी. 13 साल के लंबे इंतजार के बाद अब उनकी आत्मा को शांति मिली है.
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