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इग्नोर करना पड़ा महंगा... 'एक्स' पर वो एक पोस्ट रीपोस्ट कर देते आकाश आनंद तो क्या मायावती कर देतीं माफ?

अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद मायावती ने आकाश आनंद को बसपा से पूरी तरह मुक्त कर दिया है. मायावती के पोस्ट को रीपोस्ट न करने और ससुर के प्रति लगाव को लेकर यह कड़ा कदम उठाया गया.

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Mayawati and Akash Anand (Photo: AI)
Mayawati and Akash Anand
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बसपा प्रमुख मायावती के कड़े फैसले के बाद अब सियासी गलियारों में एक ही चर्चा है 'अगर आकाश आनंद ने 'एक्स' पर वह एक रिपोस्ट कर दिया होता तो शायद आज वह पार्टी में होते!' बता दें कि बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद बड़ा कदम उठाते हुए आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह से मुक्त (आजाद) कर दिया है.

मायावती के बयान से साफ इशारा मिलता है कि अगर आकाश आनंद अपने ससुर के मोह से परे हटकर बहनजी के 9 सितंबर वाले पोस्ट को रिपोस्ट कर अपनी वफादारी साबित कर देते, तो शायद आज तस्वीर कुछ और होती और मायावती उन्हें माफ कर पार्टी में मौका दे देतीं.

क्या एक 'रिपोस्ट' न करना पड़ा भारी? 

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने स्पष्ट किया है कि जिस प्रकार 3 सितंबर 2026 को आकाश आनंद को पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के पद से मुक्त किया गया था, उसी प्रकार अब उन्हें पार्टी से भी पूरी तरह से फ्री (आजाद) कर दिया गया है.

एक 'रिपोस्ट' न करके गंवा दिया मौका!

मायावती ने आकाश आनंद के रवैये पर सीधा सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने अपने करियर से ज्यादा अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रति लगाव बनाए रखा. मायावती ने खासतौर पर जिक्र किया कि आकाश आनंद ने बसपा प्रमुख के 'एक्स' अकाउंट के उस पोस्ट (जिसमें उन्होंने 9 सितंबर को अशोक सिद्धार्थ को संन्यास लेने की सलाह दी थी) को रिपोस्ट तक नहीं किया, जो खुद उनके ही भले और सकारात्मक भविष्य के लिए था.

मायावती के मुताबिक, इससे पहले आकाश आनंद बहनजी के पोस्ट को रिपोस्ट करके अपनी वफादारी का सबूत देते रहे हैं. लेकिन इस बार ऐसा न करने से साफ लगता है कि आकाश आनंद और उनके ससुर दोनों को पार्टी की सफलता से ज्यादा अपने निजी और पारिवारिक स्वार्थ का मोह है. अगर आकाश आनंद वह पोस्ट रिपोस्ट कर देते, तो शायद उनके प्रति सहानुभूति से विचार किया जा सकता था.

'अशोक सिद्धार्थ के फैसले में हुई बहुत देरी'

मायावती ने अपने बयान में कहा कि अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा 'देर आये दुरुस्त आये' की तरह बहुत देर से उठाया गया कदम है. अगर वे यह फैसला पहले ले लेते, तो बसपा, बहुजन आंदोलन और खुद आकाश आनंद को इन विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता.

उन्होंने यह भी कहा कि अगर अशोक सिद्धार्थ को अपने दामाद के भविष्य की सही चिंता होती, तो वे कल ही संन्यास का ऐलान कर देते, जिससे आकाश आनंद की पार्टी में सक्रियता सुनिश्चित हो सकती थी. लेकिन देरी करना यह दर्शाता है कि अशोक सिद्धार्थ की नीयत में खोट और अभिलाषा अभी भी बरकरार है.

'डबल माइंड' होकर कैसे करेंगे पार्टी का भला?

मायावती ने सख्त लहजे में कहा कि जब आकाश आनंद को पार्टी और करियर की परवाह कम और रिश्ते-नातों का मोह ज्यादा है, तो ऐसे में 'डबल माइंड' होकर वे बीएसपी का भला कैसे कर सकते हैं?

इसी वजह से पार्टी के लोगों की राय के अनुसार, उन्हें अब बीएसपी से पूरी तरह आजाद कर दिया गया है. मायावती ने कहा कि आकाश आनंद अब स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र हैं.

निजी स्वार्थ से ऊपर उठने की दी सीख

बसपा प्रमुख ने कार्यकर्ताओं को संदेश देते हुए कहा कि बीएसपी की परंपरा त्याग, संघर्ष और निजी स्वार्थ से दूर रहने की रही है. मान्यवर कांशीराम जी की तरह वे भी इसके लिए समर्पित हैं. उन्होंने कहा कि जितना बड़ा लक्ष्य होता है, उतनी ही बड़ी कुर्बानी देनी पड़ती है.

अंत में मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे विरोधियों के सभी हथकंडों का सामना करते हुए यूपी में फिर से पूर्ण बहुमत की 'सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय' वाली सरकार बनाने के लिए पूरे जी-जान से जुट जाएं.

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