लेटेस्ट न्यूज़

Opinion: शिवपाल को सपा की कमान देने की मांग कितनी जायज...कभी मुलायम के लिए लाठियां खाईं, जमीन से पार्टी को अर्श तक पहुंचाया

सपा में नेतृत्व को लेकर नई बहस छिड़ गई है. शिवपाल यादव को पार्टी की कमान सौंपने की मांग तेज हो रही है. कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पकड़, संगठनात्मक अनुभव और जमीनी जुड़ाव को 2027 चुनाव से पहले अहम माना जा रहा है.

ADVERTISEMENT

shivpal singh yadav
शिवपाल यादव. (फाइल फोटो)
social share
google news

Opinion: समाजवादी पार्टी (सपा) में एक बार फिर से नेतृत्व और पीढ़ीगत संक्रमण की बहस छिड़ गई है. सुल्तानपुर में सपा नेता जितेंद्र वर्मा ने एक कार्यक्रम के दौरान जो बयान दिया उसने न केवल पार्टी के अंदरूनी तनाव को उजागर किया बल्कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले एक नई खींचतान की नींव भी रख दी. वर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पार्टी की कमान अब शिवपाल सिंह यादव के हाथों में जानी चाहिए. उनकी इस मांग पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने इतनी जोरदार तालियां बजाईं कि पूरा कार्यक्रम एक तरह से शिवपाल यादव के समर्थन में मुनादी बन गया. उत्तर प्रदेश की राजनीति को समझने वाले जानते हैं कि यह तालियां बिना कारण नहीं बजीं. 2017 के बाद की सपा को देखने वाला जेन-ज़ी पीढ़ी का का एक बड़ा वर्ग मुख्य रूप से अखिलेश यादव के चेहरे को ही पार्टी का प्रतीक मानता है. सोशल मीडिया, रैलियां और आधुनिक छवि के कारण अखिलेश की नेतृत्व शैली नई पीढ़ी के एक वर्ग को आकर्षित करती हैं. लेकिन सपा का असली इतिहास मुलायम सिंह यादव के साथ खड़े उन नेताओं की मेहनत से लिखा गया है जिन्होंने पार्टी को अपने खून-पसीने से सींचा और इनमें सबसे प्रमुख नाम है शिवपाल सिंह यादव-मुलायम के छोटे भाई, अखिलेश के चाचा और पार्टी के सबसे अनुभवी ग्रासरूट संगठक.