Opinion: हनुमानगढ़ी में माथा टेका, बाहर आते ही मछली-भात की दावत! अजय राय के दोहरे आचरण पर सनातनियों का गुस्सा
अयोध्या में हनुमानगढ़ी दर्शन के बाद अजय राय के मछली-भात भोज को लेकर विवाद बढ़ गया है. लेख में धार्मिक मर्यादा, सावन-कांवड़ यात्रा, राजनीतिक आरोपों और संत समाज की प्रतिक्रिया के बीच उठे सवालों का विश्लेषण किया गया है.
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Opinion: हम जब भी सनातन आस्था और मर्यादा की बात करते हैं, बरबस ही अयोध्या का नाम आ जाता है. ऐसा इसलिए कि अयोध्या वह भूमि है जिसे सदियों से मर्यादा पुरुषोत्तम राम की जन्मस्थली के रूप में पूजा जाता रहा है और जो आज भी करोड़ों सनातनियों के लिए आस्था का सबसे संवेदनशील केंद्र है. राम मंदिर के निर्माण के बाद से अयोध्या पूरे हिंदू समाज के आत्मसम्मान का प्रतीक बन चुकी है. इसीलिए रामनगरी में विशेष और अनुशासित आचरण की अपेक्षा की जाती है. लेकिन कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने हनुमानगढ़ी मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद कांवड़ मार्ग पर ही मछली-भात भोज में शामिल होकर ऐसा आचरण किया जो सनातनियों को विचलित कर देने वाला है. सार्वजनिक जीवन जीने वाला कोई व्यक्ति अगर इस तरह का कोई कृत्य करता है तो इसे अनायास नहीं माना जा सकता. मंदिर में दर्शन करने के बाद यदि कोई मछली-भात में शामिल होता है तो यह सायास है और इसके पीछे कोई न कोई तो मंशा होगी ही.
