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आजमगढ़ में दरोगा संतोष यादव और बीजेपी नेता के बीच हुई झड़प, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, पुलिस ने दी ये सफाई

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Azamgarh Police Controversy: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से एक हैरान करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. यह वीडियो बिलेरियागंज थाने में तैनात दरोगा संतोष सिंह यादव और खुदको बीजेपी का जिला मंत्री बताने वाले एक व्यक्ति के बीच विवाद का है.

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Azamgarh Police Controversy: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से एक हैरान करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. यह वीडियो बिलेरियागंज थाने में तैनात दरोगा संतोष सिंह यादव और खुदको बीजेपी का जिला मंत्री बताने वाले एक व्यक्ति के बीच विवाद का है. आरोप है कि बीच सड़क पर पुलिस की गाड़ी ने बीजेपी नेता की कार को धक्का मार दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों में तीखी कहासुनी हो गई. वीडियो में बीजेपी नेता दरोगा पर गुंडई और दबंगई करने का आरोप लगा रहे हैं. इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं.

बीजेपी नेता ने लगाए गुंडई के आरोप

वायरल वीडियो में एक शख्स खुद को बीजेपी जिला अध्यक्ष ध्रुव सिंह की टीम का सदस्य और जिला मंत्री बता रहा है. वह कैमरे के सामने लगातार दरोगा संतोष सिंह यादव पर दबंगई करने के आरोप लगा रहा है. वीडियो में वह कहता हुआ सुनाई दे रहा है कि, 'आप गाड़ी पे धक्का मारेंगे... मैं भाजपा का जिला मंत्री हूं... आप आउटसाइड पर धक्का मार रहे हैं और अब आप जबरन गाड़ी में बैठ रहे हैं.' विवाद की वजह बताई जा रही है कि एक तरफ बाइक खड़ी थी और दूसरी तरफ से आ रही पुलिस की गाड़ी और बीजेपी नेता की कार के बीच धक्का लगने से यह बहस शुरू हुई.

वीडियो सामने आने पर पुलिस की सफाई

इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए. विवाद बढ़ता देख पुलिस के आला अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया. आजमगढ़ पुलिस की तरफ से एक बयान जारी कर कहा गया कि वायरल वीडियो को काट-छांट कर पेश किया गया है. पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि बलेनो कार अपनी लेन से हटकर गलत दिशा में आ गई थी, जिसकी वजह से पुलिस के वाहन का रास्ता रुक गया और जाम लग गया.

पुलिस ने आरोपों को किया खारिज

पुलिस ने दरोगा पर लगे दबंगई के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. पुलिस का साफ कहना है कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने सिर्फ यातायात व्यवस्था को सामान्य कराने की कोशिश की थी. पुलिस के मुताबिक, जो वीडियो वायरल हो रहा है वह आधा-अधूरा है और सिर्फ पुलिस की छवि खराब करने के लिए शेयर किया जा रहा है. आजमगढ़ पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जा रही है और उसके बाद ही कोई कानूनी कार्रवाई की जाएगी.