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सपा के अतुल प्रधान या भाजपा के संगीत सोम, सरधाना सीट पर किसका पलड़ा भारी? यहां समझ लीजिए

रजत कुमार

Meerut Sardhana Assembly Seat: मेरठ की सरधना विधानसभा सीट 2027 के चुनाव में भाजपा के संगीत सोम और सपा के अतुल प्रधान के बीच महामुकाबले की तैयारी में है. सीट पर जातीय और चुनावी समीकरण निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं.

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Meerut Sardhana Assembly Seat: मेरठ की सरधना विधानसभा सीट पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे हॉट सीटों में से एक मानी जाती है. मौजूदा समय में यहां की राजनीति मुख्य रूप से दो दिग्गजों भाजपा के संगीत सोम और सपा के अतुल प्रधान के इर्द-गिर्द ही घूमती नजर आ रही है. 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर यहां अभी से चुनावी बिसात बिछनी शुरू हो गई है. इस सीट के समीकरणों और राजनीतिक खींचतान पर आधारित ये विस्तृत न्यूज रिपोर्ट देखिए.  

पश्चिमी यूपी की सरधना सीट पर एक बार फिर दो कट्टर प्रतिद्वंद्वियों के बीच महामुकाबले की तैयारी है. एक तरफ भाजपा के फायरब्रांड नेता संगीत सोम हैं, जो अपनी हिंदुत्ववादी छवि और 'ठाकुर चौबीसी' के समर्थन के लिए जाने जाते हैं, तो दूसरी तरफ सपा के जमीनी नेता अतुल प्रधान हैं, जिन्होंने 2022 में संगीत सोम के विजय रथ को रोका था.

यहां नीचे देखिए सरधाना विधानसभा सीट पर हमारी ये खास वीडियो रिपोर्ट

सरधाना सीट का सियासी इतिहास और मौजूदा स्थिति

भाजपा का दबदबा: 2012 और 2017 में संगीत सोम यहां से लगातार दो बार विधायक रहे.
अतुल प्रधान की जीत: तीन बार के संघर्ष के बाद अतुल प्रधान ने 2022 में जीत हासिल की. मौजूदा समय में इस सीट पर अतुल प्रधान सपा के विधायक हैं. 

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अतुल प्रधान और संगीत सोम के दावे

अतुल प्रधान: हमने विकास के काम किए हैं. चाहे वो सड़कें हों, कॉलेज हों या बिजली घर. जनता भाजपा की गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार से ऊब चुकी है और 2027 में अखिलेश यादव के नेतृत्व में सरकार बनाएगी.
संगीत सोम: अतुल प्रधान तो छोड़िए, अगर अखिलेश यादव भी यहां से लड़ जाएं तो तीसरे नंबर पर रहेंगे. मैं गारंटी देता हूं कि इस बार 65000 से 70000 वोटों के अंतर से चुनाव जीतूंगा.

सरधाना सीट पर जातीय और चुनावी समीकरण

सरधना सीट पर हार-जीत का फैसला काफी हद तक जातीय समीकरणों पर निर्भर करता है. 

मुस्लिम: 95,000 (सबसे ज्यादा)
ठाकुर: 65,000
जाट: 55,000
दलित: 50,000
गुर्जर: 35,000

किसका खेल कहां बिगड़ता है? 

अतुल प्रधान गुर्जर समुदाय से आते हैं, लेकिन मुस्लिम, दलित और कुछ जाट वोटों के साथ आने से वे मजबूत हो जाते हैं. वहीं, संगीत सोम चाहते हैं कि चुनाव 'हिंदू बनाम मुस्लिम' के ध्रुवीकरण पर हो, जिससे उन्हें ठाकुर और दूसरे हिंदू वोटों का लाभ मिल सके. 

सरधाना में विवाद और हालिया मुद्दे

हाल ही में कपसाड़ गांव की घटना के बाद अतुल प्रधान ने पीड़ित दलित परिवार का साथ देकर अपनी स्थिति मजबूत की है. संगीत सोम पर 'अलदुआ' मीट कंपनी से जुड़े होने के पुराने आरोप फिर से उछाले जा रहे हैं. हालांकि, सोम ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उन्होंने 20 साल पहले केवल जमीन खरीदी और बेची थी, उनका मीट व्यापार से कोई लेना-देना नहीं है.

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