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माघ मेले में अब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर परिसर में लाठी डंडे लेकर घुसे ये लोग कौन? भारी बवाल के बीच ये हुआ

यूपी तक

24 जनवरी 2026 को प्रयागराज के माघ मेले में सेक्टर-4, त्रिवेणी मार्ग स्थित शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी के शिविर में कुछ अज्ञात असामाजिक लोग लाठी-डंडे और झंडे लेकर घुस आए और उपद्रव मचाया.

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Swami Avimukteshwarananda Saraswati
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Swami Avimukteshwarananda Camp Attack: प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य को लेकर विवाद के बीच एक बड़ी घटना सामने आई है. माघ मेला क्षेत्र में स्थित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के शिविर में कल शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कुछ अज्ञात असामाजिक और उपद्रवी लोग जबरन शिविर परिसर में घुस आए. बता दें कि यह घटना माघ मेला क्षेत्र के सेक्टर-4, त्रिवेणी मार्ग स्थित शिविर में 24 जनवरी की शाम लगभग 6:30 बजे से 7:30 बजे के बीच हुई. घटना के बाद शिविर प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना कल्पवासी में अज्ञात लोगों के खिलाफ तहरीर दी है.

लाठी-डंडों और झंडों के साथ शिविर में घुसे उपद्रवी

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दर्जनों की संख्या में पहुंचे उपद्रवी लोग हाथों में लाठी-डंडे और झंडे लिए हुए थे. वे शिविर में घुसते ही जोर-जोर से आक्रामक नारेबाजी करने लगे. उनका व्यवहार बेहद उग्र और हिंसक था, जिससे यह साफ प्रतीत हो रहा था कि वे लोग मारपीट करने और नुकसान पहुंचाने की नीयत से आए थे.

बता दें कि इस घटना के समय शिविर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सेवक और कार्यकर्ता मौजूद थे. उपद्रवियों की अचानक घुसपैठ और नारेबाजी से शिविर में भय और अफरा-तफरी का माहौल बन गया. स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि किसी भी समय कोई बड़ी अप्रिय घटना घट सकती थी.

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सेवकों की सूझबूझ से टली बड़ी घटना

हालांकि शिविर में मौजूद सेवकों और कार्यकर्ताओं ने संयम और शांति बनाए रखते हुए साहस का परिचय दिया और किसी तरह उन उपद्रवी तत्वों को शिविर परिसर से बाहर कर दिया.  उनकी तत्परता से एक बड़ी अनहोनी टल गई लेकिन इस घटना ने शिविर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 

मेला और पुलिस प्रशासन से की गई कड़ी मांग

इस पूरी घटना को लेकर मेला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है. शिकायत में मांग की गई है कि शिविर में घुसकर हंगामा करने वाले अज्ञात असामाजिक लोगों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और उनकी पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए. साथ ही यह भी आग्रह किया गया है कि शिविर परिसर और उसके आसपास पर्याप्त पुलिस बल की स्थायी तैनाती की जाए ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके और साधु-संतों व श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके. 

श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए बढ़ी चिंता

गौरतलब है कि शंकराचार्य महाराज के शिविर के आसपास हर समय श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है. स्वयं शंकराचार्य महाराज भी शिविर के बाहर शांतिपूर्वक विराजमान रहते हैं. ऐसे में भविष्य में अगर ऐसे लोग दोबारा शिविर या उसके आसपास घुसने की कोशिश करते हैं तो महाराज जी, साधु-संतों और श्रद्धालुओं के जीवन व संपत्ति को गंभीर खतरा हो सकता है.

भविष्य की घटनाओं की जिम्मेदारी प्रशासन पर

शिकायत में यह भी स्पष्ट रूप से अवगत कराया गया है कि अगर भविष्य में शिविर के भीतर या बाहर किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना घटित होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी मेला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की होगी.  बता दें कि यह तहरीर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के शिविर के मेला प्रभारी पंकज पांडे की ओर से थाना कल्पवासी, प्रयागराज में अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज कराई गई है.

क्या है पूरा मामला?

विवाद की शुरुआत 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन हुई एक घटना से हुई थी. उस दिन शंकराचार्य जी पालकी पर सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे. सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को देखते हुए पुलिस ने उन्हें पैदल जाने का निर्देश दिया. इस दौरान उनके समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हो गई. स्वामी जी का आरोप है कि इस झड़प में पुलिस ने उनके अनुयायियों और बटुकों के साथ मारपीट की. इसके विरोध में वे प्रशासन से सार्वजनिक माफी की मांग कर रहे हैं. वहीं पुलिस प्रशासन का पक्ष है कि यह कदम सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के कारण उठाया गया था लेकिन महाराज के समर्थकों का व्यवहार उग्र हो गया. इस घटना के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने शिविर के बाहर अन्न-जल त्याग कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था.

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