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कानपुर में 80 साल की बूढ़ी मां को बनारस के घाट छोड़कर भाग गई थी रंजीता, ऐसे खुली बेटी की पोल

रंजय सिंह

रिश्तों की मर्यादा को तार-तार करने वाली एक शर्मनाक घटना उत्तर प्रदेश के कानपुर से सामने आई . यहां शिवाला की रहने वाली रंजीता ने अपनी 80 साल की बूढ़ी मां इंदिरा सिंह को काशी के घाट पर लावारिस छोड़ दिया.

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रिश्तों की मर्यादा को तार-तार करने वाली एक शर्मनाक घटना उत्तर प्रदेश के कानपुर से सामने आई . यहां शिवाला की रहने वाली रंजीता ने अपनी 80 साल की बूढ़ी मां इंदिरा सिंह को काशी के घाट पर लावारिस छोड़ दिया. यह घटना तब सामने आई जब एक सामाजिक संस्था ने इंदिरा का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया.

वीडियो में बुजुर्ग इंदिरा अपनी बेटी द्वारा छोड़े जाने की दर्दनाक कहानी बयां कर रही थीं. वायरल वीडियो के बाद कानपुर पुलिस सक्रिय हुई और रंजीता व उनके पति आदर्श सिंह को पूछताछ के लिए बुलाया गया. दबाव में रंजीता अपनी मां को वापस लाने काशी पहुंची, जहां उनकी मां को एक सामाजिक संस्था ने अस्पताल में भर्ती कराया था.

 

 

क्या है पूरा मामला

कानपुर के शिवाला क्षेत्र में रहने वाली इंदिरा(80) की इकलौती बेटी रंजीता सिंह हैं. इंदिरा के पड़ोसियों के अनुसार, उनके पति की कई साल पहले मृत्यु हो चुकी थी. इंदिरा जिस मकान में रहती थीं, वह उनकी अपनी संपत्ति थी. इसके अलावा उनके पति का एक टी-स्टॉल था, जिसे अब उनका दामाद आदर्श सिंह चलाता है. आरोप है कि रंजीता और आदर्श अपनी मां (सास) की जिद और घरेलू विवादों से परेशान थे. इसी कारण उन्होंने इंदिरा को वाराणसी ले जाकर घाट पर छोड़ दिया.

सोशल मीडिया ने खोली पोल

काशी के घाट पर लावारिस हालत में पड़ी इंदिरा का वीडियो एक सामाजिक संस्था के सदस्य कबीर ने बनाया और सोशल मीडिया पर शेयर किया. वीडियो में इंदिरा ने बताया कि उनकी बेटी रंजीता ने उन्हें छोड़ दिया है. यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद कानपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की.
 

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कोतवाली क्षेत्र के एसीपी आशुतोष कुमार के निर्देश पर पुलिस ने जांच शुरू की. जांच में पता चला कि इंदिरा सिंह शिवाला की रहने वाली हैं और उनकी बेटी रंजीता और दामाद आदर्श ने उन्हें काशी में छोड़ा था. पुलिस ने दोनों को बुलाकर पूछताछ की. रंजीता ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि मां की जिद के कारण उन्होंने यह कदम उठाया. दबाव में रंजीता और आदर्श अपनी मां को लेने काशी के अस्पताल पहुंचे, जहां इंदिरा को एक सामाजिक संस्था ने भर्ती कराया था.

 

 

पड़ोसियों का गुस्सा

इंदिरा को मोहल्ले में लोग ‘ताई’ कहकर बुलाते थे और उनका सम्मान करते थे. जब यह घटना सामने आई तो पड़ोसियों में गुस्सा फैल गया. उन्होंने रंजीता और आदर्श के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. मोहल्ले के लोगों ने चेतावनी दी कि अगर इंदिरा को वापस लाकर उनकी ठीक से देखभाल नहीं की गई, तो वे स्वयं पुलिस में शिकायत दर्ज करेंगे.
 

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