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ससुर की मौत पर फूट-फूटकर रोई बहू, 21 दिन में 330 कॉल ने खोली पोल! 'कातिल' नौकरों को दिया था ये लालच, अब खुला पूरा राज!

कानपुर के दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या में पुलिस ने बहू शालू को गिरफ्तार किया है. जांच में 21 दिनों में करीब 330 कॉल, डुप्लीकेट चाबी और पुराने कर्मचारी विशाल गौतम का कनेक्शन सामने आया. पुलिस के मुताबिक, हत्या के लिए कथित तौर पर 6 लाख रुपये की सुपारी तय हुई थी.

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कानपुर के चर्चित दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, कहानी परिवार के अंदर तक पहुंचती चली गई. 63 साल के विनीत मिनोचा की रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट में चाकू से हत्या कर दी गई थी. उनके शरीर पर 26 से ज्यादा वार किए गए थे. शुरुआत में मामला घर में घुसे बाहरी हमलावरों का लग रहा था, लेकिन CCTV फुटेज, सुरक्षा गार्ड के बयान, पुराने कर्मचारी विशाल गौतम से जुड़ी जानकारी, डुप्लीकेट चाबी और कॉल डिटेल ने पुलिस की जांच की दिशा बदल दी. पुलिस के मुताबिक इस मामले में विनीत की बहू शालू की भूमिका सामने आई और उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया. जांच में यह भी सामने आया कि हत्या के पीछे कथित तौर पर 6 लाख रुपये की डील थी, जिसमें 2 लाख रुपये हत्या के बाद और बाकी 4 लाख रुपये करीब 15 दिन बाद दिए जाने की बात सामने आई है. हालांकि मामले में पुलिस अभी सभी सबूतों को मिलाकर जांच कर रही है

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पुलिस जांच में सबसे अहम कड़ी कॉल हिस्ट्री को माना जा रहा है. सामने आई जानकारी के मुताबिक हत्या से पहले के 21 दिनों में शालू और पुराने कर्मचारी विशाल गौतम के बीच करीब 30 बार बातचीत हुई थी. वहीं शालू के पति सुब्रत और विशाल के बीच करीब 300 कॉल होने की बात सामने आई है. यानी इन 21 दिनों में विशाल का परिवार से करीब 330 बार फोन संपर्क रहा. पुलिस अब इन कॉल के समय, अवधि और बातचीत के पैटर्न को खंगाल रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हत्या से पहले किस तरह की तैयारी चल रही थी. दूसरी तरफ सुब्रत ने पुलिस को बताया कि विशाल पहले परिवार के यहां काम करता था और बाद में भी उसके छोटे-मोटे काम करता था, इसलिए उससे फोन पर बातचीत होती रहती थी. पुलिस इसी दावे को कॉल रिकॉर्ड और दूसरे सबूतों से मिलाकर देख रही है. कुछ रिपोर्टों में शालू और विशाल के बीच घटना से पहले हुई बातचीत की अलग संख्या भी सामने आई है, इसलिए जांच एजेंसियां CDR के आधार पर पूरी टाइमलाइन तैयार कर रही हैं.

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जांच की दूसरी बड़ी कड़ी पुराने कर्मचारी विशाल गौतम तक पहुंची. पुलिस के मुताबिक विशाल करीब छह साल पहले विनीत के यहां काम करता था और चोरी के आरोपों के बाद उसे नौकरी से हटा दिया गया था. इसके बावजूद उसका परिवार के साथ संपर्क बना हुआ था और वह कभी-कभी घर आता-जाता था. पुलिस को पता चला कि विशाल को फ्लैट की बनावट, कमरों की स्थिति और परिवार की दिनचर्या की जानकारी थी. इसी वजह से उस पर शक गहराता गया. पुलिस ने CCTV फुटेज में दो लोगों को फ्लैट में आते-जाते देखा. इनमें से एक की पहचान विशाल के रूप में हुई, जबकि दूसरा उसका कथित साथी राजकिशोर था. दोनों के खिलाफ पहले भी आपराधिक मामले होने की जानकारी सामने आई है. पुलिस के मुताबिक दोनों को रविवार रात मुठभेड़ के बाद पकड़ा गया और उनके पैरों में गोली लगी. पूछताछ में दोनों ने कथित तौर पर हत्या में शालू की भूमिका के बारे में जानकारी दी.

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मामले में फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी भी अहम कड़ी बन गई. पुलिस के मुताबिक, मूल चाबी से दूसरी चाबी तैयार कराई गई थी. यह चाबी किसके कहने पर बनवाई गई, इसकी जांच जारी है. ताजा पुलिस दावों में यह भी कहा गया है कि विशाल को घर की चाबी उपलब्ध कराई गई थी, जिसके आधार पर डुप्लीकेट चाबी तैयार की गई. घटना वाली रात विशाल और राजकिशोर इसी रास्ते से फ्लैट के अंदर पहुंचे और विनीत के लौटने से पहले करीब 72 से 75 मिनट तक अंदर छिपे रहे. सुरक्षा गार्ड को पहले से बताया गया था कि एक व्यक्ति अपने साथी के साथ आएगा. आरोप है कि उसे दोनों को अंदर आने देने और रजिस्टर में सामान्य तरीके से एंट्री न करने को कहा गया. गार्ड ने शुरुआत में उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन बाद में फोन पर बातचीत के बाद उन्हें अंदर जाने दिया गया. पुलिस CCTV फुटेज और कॉल डिटेल के जरिए इस पूरी कड़ी की पुष्टि कर रही है.

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घटना शनिवार रात की है. सुब्रत, उनकी पत्नी शालू और उनका छह साल का बच्चा रात करीब 9:36 बजे पार्टी के लिए घर से निकले थे. पुलिस की जांच के मुताबिक इसके करीब 10 मिनट बाद दोनों संदिग्ध फ्लैट में दाखिल हुए और विनीत के लौटने का इंतजार करने लगे. करीब 10:58 बजे विनीत घर पहुंचे. कथित तौर पर शुरुआती योजना उन्हें सोते समय तकिए से दबाकर मारने की थी, ताकि मौत को हार्ट अटैक या सामान्य मौत जैसा दिखाया जा सके. लेकिन पुलिस के मुताबिक, विनीत बच्चों के कमरे की तरफ गए और वहां छिपे दोनों लोगों की गतिविधि देख ली. इसके बाद हमलावर घबरा गए और उन्होंने चाकू से हमला कर दिया. विनीत के गले, सीने और शरीर के दूसरे हिस्सों पर कई वार किए गए. पोस्टमार्टम में 26 से ज्यादा चाकू के घाव सामने आए. हत्या के बाद दोनों ने कपड़े बदले और फ्लैट से निकल गए. कुछ रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने मुख्य रास्ते के बजाय पीछे की दीवार फांदकर निकलने का रास्ता चुना, ताकि खून लगे कपड़ों के कारण पकड़े जाने का खतरा कम हो.

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पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि अगर हत्या लूट के लिए नहीं हुई, तो आखिर मकसद क्या था? फ्लैट से रुपये, जेवर या कोई बड़ी कीमती चीज गायब नहीं हुई. इसी वजह से पुलिस ने व्यक्तिगत विवाद और सुपारी देकर हत्या कराने के एंगल पर जांच बढ़ाई. पुलिस के मुताबिक, कथित तौर पर हत्या की कीमत 6 लाख रुपये तय हुई थी. इसमें 2 लाख रुपये हत्या के बाद और बाकी 4 लाख रुपये करीब 15 दिन बाद दिए जाने की बात सामने आई. जांच में परिवार के आर्थिक विवाद और घर के फैसलों को लेकर मतभेद की बात भी सामने आई है. पुलिस का कहना है कि विनीत अपने बेटे और बहू को सीमित रकम देते थे और अतिरिक्त पैसे के लिए उनसे मांग करनी पड़ती थी. इसके अलावा घर में लगाए गए CCTV कैमरों को लेकर भी विवाद की बात सामने आई है. पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इन घरेलू विवादों का हत्या की कथित साजिश से कितना संबंध था. विनीत करीब 45 साल से दवा कारोबार में थे और उनका परिवार शहर के प्रमुख फार्मा कारोबारियों में गिना जाता है. उनके पिता ने 1968 में कारोबार शुरू किया था, जिसे बाद में विनीत ने संभाला और फिर उनके बेटे सुब्रत भी कारोबार में शामिल हुए. पुलिस के अनुसार कारोबार का वार्षिक टर्नओवर 40 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है.

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विनीत की हत्या के बाद शालू को रोते हुए देखा गया था. उस समय परिवार और आसपास के लोगों को यही लग रहा था कि किसी बाहरी व्यक्ति ने घर में घुसकर हत्या की है. लेकिन CCTV, गार्ड के बयान, विशाल से जुड़े पुराने संबंध और कॉल रिकॉर्ड सामने आने के बाद जांच का रुख बदल गया. सोमवार को पुलिस ने शालू से करीब डेढ़ घंटे तक पूछताछ की. पूछताछ के दौरान सुब्रत, सास पुनिता, विनीत के भाई और सुरक्षा गार्ड मदन सिंह की मौजूदगी में करीब 15 सवाल पूछे गए. पुलिस के मुताबिक, विशाल और राजकिशोर के बयानों तथा दूसरे साक्ष्यों के सामने रखे जाने के बाद शालू की भूमिका सामने आई और उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. पुलिस अब यह भी जांच रही है कि सुब्रत की भूमिका केवल फोन पर पुराने कर्मचारी से संपर्क तक सीमित थी या उसे कथित साजिश की कोई जानकारी थी. इस मामले में BNS की धारा 61(2), यानी आपराधिक साजिश से संबंधित प्रावधान भी जोड़ा गया है. पुलिस शालू, सुब्रत और विशाल के कॉल रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, चाबी की पूरी कहानी और पैसों के लेनदेन समेत सभी सबूतों को मिलाकर यह पता लगाने में जुटी है कि 63 साल के कारोबारी की हत्या की पूरी साजिश आखिर कब और कैसे तैयार हुई.